उरांव जनजाति: संपूर्ण जानकारी, इतिहास, संस्कृति, भाषा, जनसंख्या और परंपराएं
उरांव जनजाति से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
| विषय | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| जनजाति | उरांव |
| अन्य नाम | कुरुख, Oraon, Uraon, Dhangar आदि |
| प्रमुख भाषा | कुरुख |
| भाषा परिवार | द्रविड़ |
| प्रमुख क्षेत्र | छोटानागपुर पठार एवं आसपास के क्षेत्र |
| प्रमुख राज्य | झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा |
| प्रमुख त्योहार | सरहुल, करमा, नयाखानी आदि |
| प्रमुख नृत्य | करमा, सरहुल/खद्दी, फागु, जदुर आदि |
| प्रमुख वाद्य | मांदर, नगाड़ा, करताल |
| पारंपरिक व्यवसाय | कृषि, वनोपज, पशुपालन, मजदूरी |
| संवैधानिक स्थिति | अनुसूचित जनजाति |
| झारखंड जनसंख्या, 2011 | 17,16,618 |
| भारत में आबादी, 2011 | लगभग 36.97 लाख |
उपरोक्त जनजाति और भाषा संबंधी जानकारी Census 2011 तथा झारखंड के Tribal Welfare Research Institute के उपलब्ध अभिलेखों से मिलती है।
उरांव जनजाति पर परीक्षा उपयोगी प्रश्न
प्रश्न 1. उरांव जनजाति का दूसरा प्रमुख नाम क्या है?
उत्तर: कुरुख।
प्रश्न 2. उरांव जनजाति की प्रमुख भाषा कौन-सी है?
उत्तर: कुरुख।
प्रश्न 3. कुरुख भाषा किस भाषा परिवार से संबंधित है?
उत्तर: द्रविड़ भाषा परिवार।
प्रश्न 4. उरांव जनजाति की प्रमुख आबादी किस क्षेत्र में पाई जाती है?
उत्तर: छोटानागपुर पठार और आसपास के क्षेत्रों में।
प्रश्न 5. उरांव जनजाति के प्रमुख त्योहार कौन-कौन से हैं?
उत्तर: सरहुल, करमा, नयाखानी आदि।
प्रश्न 6. उरांव समाज के प्रमुख पारंपरिक वाद्य कौन-से हैं?
उत्तर: मांदर, नगाड़ा और करताल।
प्रश्न 7. Census 2011 के अनुसार झारखंड में उरांव की आबादी कितनी थी?
उत्तर: 17,16,618।
उरांव जनजाति का परिचय
उरांव भारत की महत्वपूर्ण अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribe) में शामिल है। समुदाय के लिए कुरुख नाम का भी व्यापक प्रयोग होता है और उनकी पारंपरिक मातृभाषा कुरुख (Kurukh/Oraon) है। जनगणना के आंकड़ों में भी “Oraon, Dhangar (Oraon)” नाम से समुदाय को दर्ज किया गया है।
उरांव समाज का ऐतिहासिक संबंध विशेष रूप से छोटानागपुर पठार से माना जाता है। वर्तमान समय में समुदाय के लोग कृषि, मजदूरी, सरकारी एवं निजी सेवाओं, व्यवसाय, शिक्षा तथा अन्य आधुनिक रोजगारों से भी जुड़े हुए हैं।
उरांव जनजाति के प्रमुख नाम
- उरांव
- कुरुख
- Oraon
- Uraon
- Dhangar/Dhangad — कुछ क्षेत्रों में प्रयुक्त नाम
ध्यान दें: अलग-अलग राज्यों और स्रोतों में नाम तथा स्थानीय संबोधन में अंतर मिल सकता है।
उरांव जनजाति की जनसंख्या
उपलब्ध जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार भारत में उरांव/कुरुख समुदाय की कुल आबादी लगभग 36.97 लाख बताई जाती है। प्रमुख राज्यों में इसकी आबादी इस प्रकार है।
उरांव जनजाति की राज्यवार जनसंख्या – 2011
| राज्य | उरांव जनसंख्या, 2011 |
|---|---|
| झारखंड | 17,16,618 |
| छत्तीसगढ़ | 7,48,739 |
| पश्चिम बंगाल | 6,43,510 |
| ओडिशा | 3,58,112 |
| बिहार | 1,44,472 |
| असम | 73,437* |
| त्रिपुरा | 12,011 |
| भारत | लगभग 36,96,899 |
उपरोक्त आंकड़े 2011 की जनगणना से संबंधित राज्यवार उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं। असम के आंकड़े के साथ दिए गए (*) चिह्न को मूल स्रोत/तालिका के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। भारत का कुल आंकड़ा लगभग 36.97 लाख दर्शाया गया है।
*असम के लिए उपलब्ध आंकड़ों में स्रोत/वर्ष की सावधानी आवश्यक है; इसलिए राज्यवार आंकड़ों की तुलना करते समय संबंधित Census तालिका देखना उचित है।
झारखंड की Census 2011 A-11 तालिका में “Oraon, Dhangar (Oraon)” की कुल आबादी 17,16,618 दर्ज है। इसमें ग्रामीण आबादी 14,72,590 और शहरी आबादी 2,44,028 थी।
महत्वपूर्ण बात
उरांव जनजाति की वर्तमान जनसंख्या का अनुमान लगाने के लिए 2011 Census को आधार मानना चाहिए, क्योंकि जनजातिवार विस्तृत आधिकारिक जनगणना आंकड़ों का प्रमुख उपलब्ध आधार Census 2011 है। भारत सरकार का Census Population Finder भी 2011 जनगणना के आंकड़ों पर आधारित है।
उरांव जनजाति कहाँ निवास करती है?
उरांव समुदाय का प्रमुख निवास क्षेत्र छोटानागपुर पठार और उसके आसपास के क्षेत्र हैं।
मुख्य रूप से उरांव लोग इन राज्यों में पाए जाते हैं:
- झारखंड
- छत्तीसगढ़
- पश्चिम बंगाल
- ओडिशा
- बिहार
- असम
- त्रिपुरा
झारखंड में उरांव समुदाय की महत्वपूर्ण आबादी रांची, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, खूंटी तथा आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है। Census 2011 की झारखंड संबंधी तालिकाओं में कुरुख/उरांव भाषा और उरांव जनजाति दोनों को अलग-अलग सांख्यिकीय रूप से दर्ज किया गया है।
उरांव जनजाति की भाषा
उरांव समुदाय की पारंपरिक भाषा कुरुख (Kurukh) है। यह द्रविड़ भाषा परिवार की उत्तरी शाखा से संबंधित है। भारत की जनगणना में इसे “KURUKH/ORAON” के रूप में भी दर्ज किया गया है।
कुरुख के अलावा अलग-अलग क्षेत्रों में उरांव लोग स्थानीय संपर्क भाषाओं का भी प्रयोग करते हैं, जैसे:
- सदरी
- हिंदी
- ओड़िया
- बंगाली
- नागपुरी/संबंधित स्थानीय भाषाएँ
झारखंड के Tribal Welfare Research Institute के अनुसार कई कुरुख परिवार स्थानीय संपर्क भाषाओं, विशेषकर सदरी और ओड़िया, का भी प्रयोग करते हैं।
कुरुख भाषा की विशेषता
कुरुख को भारत की उत्तरी द्रविड़ भाषाओं में रखा जाता है। भाषाई अध्ययन इसे माल्टो तथा ब्राहुई जैसी उत्तरी द्रविड़ भाषाओं से संबंधित बताते हैं।
उरांव जनजाति का सामाजिक जीवन
उरांव समाज की अपनी पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था रही है। परिवार और वंश व्यवस्था में पितृवंशीय (patrilineal) विशेषताएं देखने को मिलती हैं। Tribal Welfare Research Institute के अनुसार कुरुख समाज में वंश/कुल का संबंध पिता की ओर से आगे बढ़ता है।
समाज में पारंपरिक नेतृत्व और सामुदायिक संस्थाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गांव के सामाजिक और धार्मिक जीवन में बुजुर्गों तथा पारंपरिक पदाधिकारियों का सम्मान किया जाता है।
उरांव जनजाति की संस्कृति
उरांव संस्कृति प्रकृति, कृषि, सामुदायिक जीवन और लोक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है।
उनकी संस्कृति के प्रमुख पक्ष हैं:
- सामूहिक जीवन
- प्रकृति के प्रति सम्मान
- कृषि आधारित जीवन
- लोकगीत
- लोकनृत्य
- पारंपरिक वाद्ययंत्र
- सामुदायिक त्योहार
- पारंपरिक विवाह व्यवस्था
- लोककथाएं और मौखिक परंपराएं
उरांव समुदाय में त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि सामाजिक मेल-जोल और सामुदायिक एकता के अवसर भी होते हैं।
उरांव जनजाति के प्रमुख त्योहार
उरांव समाज में कई पारंपरिक त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
1. सरहुल
सरहुल उरांव सहित छोटानागपुर क्षेत्र के कई आदिवासी समुदायों का प्रमुख त्योहार है। इसमें प्रकृति और वृक्षों के प्रति सम्मान की भावना प्रमुख होती है।
2. कर्म/करमा
करमा या कर्म पर्व उरांव समाज के प्रमुख पारंपरिक त्योहारों में से एक है। इसके साथ कर्म वृक्ष, लोकगीत और सामूहिक नृत्य की परंपरा जुड़ी हुई है।
3. नयाखानी
नई फसल और कृषि जीवन से जुड़ा नयाखानी भी महत्वपूर्ण पारंपरिक पर्व है।
4. धनबुनी
कृषि और सामुदायिक जीवन से जुड़े पारंपरिक पर्वों में धनबुनी का भी उल्लेख मिलता है।
5. हरिहारी और खरियानी
उरांव समुदाय के पारंपरिक त्योहारों में हरिहारी और खरियानी भी शामिल हैं।
उरांव जनजाति के प्रमुख नृत्य
उरांव समाज की पहचान उसके समृद्ध लोकनृत्य और लोकगीतों से भी होती है।
प्रमुख नृत्य/नृत्य परंपराओं में शामिल हैं:
- करमा नृत्य
- सरहुल/खद्दी नृत्य
- फागु
- जदुर
- जागरा
- मथा
- बेंजा नलना — विवाह से संबंधित नृत्य
- चाली नृत्य
इन नृत्यों में पुरुष और महिलाएं दोनों सामूहिक रूप से भाग लेते हैं।
उरांव जनजाति के पारंपरिक वाद्ययंत्र
उरांव समाज में संगीत और नृत्य के साथ पारंपरिक वाद्ययंत्रों का महत्वपूर्ण स्थान है।
प्रमुख वाद्ययंत्र:
- मांदर
- नगाड़ा
- करताल
उरांव लोकगीतों और नृत्यों में इन वाद्ययंत्रों का प्रयोग सामुदायिक कार्यक्रमों तथा त्योहारों में किया जाता है।
उरांव जनजाति की धार्मिक मान्यताएं
उरांव समाज की पारंपरिक धार्मिक मान्यताएं प्रकृति और स्थानीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी रही हैं। आधुनिक समय में समुदाय के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक पहचान और आस्थाओं में विविधता भी देखने को मिलती है।
पारंपरिक विश्वासों में:
- प्रकृति के प्रति सम्मान
- पेड़-पौधों का महत्व
- जल और भूमि के प्रति श्रद्धा
- पूर्वजों की स्मृति
- ग्राम एवं सामुदायिक धार्मिक परंपराएं
महत्वपूर्ण हैं।
उरांव धार्मिक जीवन को समझने के लिए केवल एक धार्मिक श्रेणी में पूरे समुदाय को रखना उचित नहीं है, क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में धार्मिक व्यवहार अलग हो सकता है।
उरांव जनजाति का पारंपरिक व्यवसाय
परंपरागत रूप से उरांव समुदाय का जीवन कृषि और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा रहा है।
प्रमुख व्यवसाय:
- कृषि
- पशुपालन
- कृषि मजदूरी
- वनोपज संग्रह
- मजदूरी
- हस्तशिल्प
- स्थानीय व्यापार
समय के साथ उरांव समाज में रोजगार के क्षेत्र में काफी परिवर्तन आया है। आज समुदाय के लोग:
- सरकारी नौकरी
- निजी नौकरी
- शिक्षा
- स्वास्थ्य सेवाएं
- व्यवसाय
- तकनीकी कार्य
- शहरों में रोजगार
जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी कार्य कर रहे हैं।
उरांव जनजाति का भोजन
उरांव समुदाय का पारंपरिक भोजन स्थानीय कृषि और वन संसाधनों पर आधारित रहा है।
क्षेत्र के अनुसार भोजन में शामिल हो सकते हैं:
- चावल
- मड़िया/रागी जैसे मोटे अनाज
- मक्का
- दाल
- मौसमी सब्जियां
- कंद-मूल
- जंगल से प्राप्त खाद्य पदार्थ
- स्थानीय साग
भोजन की परंपरा क्षेत्र, परिवार और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
उरांव जनजाति की विवाह परंपरा
उरांव समाज में विवाह एक महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था है। विवाह केवल दो व्यक्तियों का संबंध नहीं बल्कि दो परिवारों और सामाजिक समूहों के बीच संबंध स्थापित करने वाला आयोजन भी माना जाता है।
विवाह से जुड़े प्रमुख तत्वों में:
- परिवार की सहमति
- सामाजिक नियम
- पारंपरिक रीति-रिवाज
- गीत-संगीत
- सामुदायिक भागीदारी
- विवाह भोज
- नृत्य
शामिल हो सकते हैं।
विवाह की रस्में अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार बदल सकती हैं।
उरांव जनजाति की वेशभूषा
उरांव समुदाय की पारंपरिक वेशभूषा में स्थानीय क्षेत्र की संस्कृति का प्रभाव दिखाई देता है।
महिलाएं पारंपरिक साड़ी तथा आभूषणों का प्रयोग करती हैं, जबकि पुरुष पारंपरिक धोती एवं अन्य स्थानीय वस्त्र पहनते रहे हैं।
त्योहारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पारंपरिक वेशभूषा विशेष रूप से दिखाई देती है।
उरांव जनजाति की शिक्षा
आधुनिक समय में उरांव समुदाय में शिक्षा का महत्व लगातार बढ़ा है। पहले ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा तक पहुंच सीमित थी, लेकिन सरकारी विद्यालयों, छात्रावासों, छात्रवृत्ति योजनाओं और उच्च शिक्षा के अवसरों से स्थिति में परिवर्तन आया है।
आज उरांव समाज के विद्यार्थी:
- प्राथमिक शिक्षा
- माध्यमिक शिक्षा
- उच्च माध्यमिक
- स्नातक
- तकनीकी शिक्षा
- चिकित्सा
- इंजीनियरिंग
- प्रशासनिक सेवाओं
जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं।
फिर भी दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, भाषा संबंधी बाधा, आर्थिक स्थिति और विद्यालय तक पहुंच जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
उरांव जनजाति और कुरुख भाषा का संरक्षण
कुरुख भाषा उरांव समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन कई क्षेत्रों में स्थानीय संपर्क भाषाओं के बढ़ते उपयोग के कारण मातृभाषा के उपयोग में परिवर्तन देखा गया है। झारखंड के Tribal Welfare Research Institute ने भी कुरुख के साथ सदरी और ओड़िया जैसी संपर्क भाषाओं के प्रयोग का उल्लेख किया है।
इसलिए कुरुख भाषा के संरक्षण के लिए:
- मातृभाषा में शिक्षा
- कुरुख साहित्य
- लोकगीतों का दस्तावेजीकरण
- डिजिटल सामग्री
- बच्चों को मातृभाषा सिखाना
- सांस्कृतिक कार्यक्रम
महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उरांव जनजाति की कला और लोक परंपरा
उरांव समाज की मौखिक परंपरा काफी समृद्ध रही है। लोकगीत, लोककथाएं, कहानियां, नृत्य और पारंपरिक संगीत पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते रहे हैं।
इन परंपराओं में सामाजिक जीवन, कृषि, प्रेम, प्रकृति, त्योहार और सामुदायिक संबंधों की झलक मिलती है। Tribal Welfare Research Institute भी उरांव समुदाय के लोकगीतों, नृत्यों, कथाओं और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करता है।
उरांव जनजाति का आधुनिक जीवन
आज का उरांव समाज परंपरा और आधुनिकता दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
आधुनिक उरांव समाज में परिवर्तन के प्रमुख क्षेत्र हैं:
शिक्षा → रोजगार → शहरीकरण → डिजिटल तकनीक → राजनीतिक भागीदारी → व्यवसाय → सामाजिक जागरूकता
इसके बावजूद सरहुल, करमा, लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक संस्कृति और कुरुख भाषा जैसे तत्व आज भी समुदाय की पहचान में महत्वपूर्ण हैं।
उरांव जनजाति के बारे में अक्सर पूछने वाला FAQ
1. उरांव जनजाति कौन है?
उरांव भारत की एक प्रमुख अनुसूचित जनजाति है, जिसे कुरुख नाम से भी जाना जाता है।
उरांव भारत की एक प्रमुख अनुसूचित जनजाति है, जिसे कुरुख नाम से भी जाना जाता है।
2. उरांव जनजाति की भाषा क्या है?
उरांव समुदाय की पारंपरिक भाषा कुरुख है, जो द्रविड़ भाषा परिवार की उत्तरी शाखा से संबंधित है।
उरांव समुदाय की पारंपरिक भाषा कुरुख है, जो द्रविड़ भाषा परिवार की उत्तरी शाखा से संबंधित है।
3. उरांव जनजाति मुख्य रूप से कहाँ रहती है?
मुख्य रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में।
मुख्य रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में।
4. उरांव जनजाति की जनसंख्या कितनी है?
Census 2011 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में उरांव/कुरुख समुदाय की आबादी लगभग 36.97 लाख थी।
Census 2011 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में उरांव/कुरुख समुदाय की आबादी लगभग 36.97 लाख थी।
5. उरांव जनजाति का प्रमुख त्योहार कौन-सा है?
सरहुल और करमा प्रमुख पारंपरिक त्योहारों में शामिल हैं।
सरहुल और करमा प्रमुख पारंपरिक त्योहारों में शामिल हैं।
6. उरांव जनजाति का प्रमुख नृत्य कौन-सा है?
करमा, सरहुल/खद्दी, फागु और जदुर आदि प्रमुख नृत्य परंपराएं हैं।
करमा, सरहुल/खद्दी, फागु और जदुर आदि प्रमुख नृत्य परंपराएं हैं।
7. उरांव जनजाति का पारंपरिक व्यवसाय क्या है?
मुख्य रूप से कृषि, कृषि मजदूरी, पशुपालन और वनोपज से जुड़ा जीवन रहा है।
मुख्य रूप से कृषि, कृषि मजदूरी, पशुपालन और वनोपज से जुड़ा जीवन रहा है।
8. क्या उरांव और कुरुख एक ही समुदाय के नाम हैं?
कई संदर्भों में उरांव समुदाय को कुरुख नाम से भी जाना जाता है। “कुरुख” उनकी भाषा और समुदाय की पहचान दोनों के संदर्भ में प्रयुक्त होता है।
कई संदर्भों में उरांव समुदाय को कुरुख नाम से भी जाना जाता है। “कुरुख” उनकी भाषा और समुदाय की पहचान दोनों के संदर्भ में प्रयुक्त होता है।
9. उरांव जनजाति की संस्कृति की विशेषता क्या है?
सामुदायिक जीवन, प्रकृति से जुड़ी मान्यताएं, लोकगीत, नृत्य, त्योहार और कुरुख भाषा इसकी प्रमुख सांस्कृतिक विशेषताएं हैं।
सामुदायिक जीवन, प्रकृति से जुड़ी मान्यताएं, लोकगीत, नृत्य, त्योहार और कुरुख भाषा इसकी प्रमुख सांस्कृतिक विशेषताएं हैं।
निष्कर्ष
उरांव जनजाति भारत की समृद्ध आदिवासी विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुरुख भाषा, सरहुल और करमा जैसे त्योहार, लोकनृत्य, संगीत तथा सामुदायिक परंपराएं इसकी विशिष्ट पहचान हैं। आधुनिक शिक्षा और रोजगार के साथ आगे बढ़ते हुए भी उरांव समाज अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने का प्रयास कर रहा है।
जानकारी के प्रमुख स्रोत
- भारत सरकार — Office of the Registrar General & Census Commissioner, India (Census 2011) — जनजातिवार जनसंख्या एवं भाषाई आंकड़ों के लिए।
- Tribal Welfare Research Institute, Jharkhand — उरांव/कुरुख समाज, भाषा, त्योहार, नृत्य और सामाजिक-सांस्कृतिक जानकारी के लिए।
- Ministry of Tribal Affairs, Government of India — Tribal Repository — उरांव जनजाति पर प्रकाशित Oraon हैंडबुक/जातीय अध्ययन के लिए।
- Census of India — Linguistic Survey / Kurukh-Oraon — कुरुख भाषा, उसका द्रविड़ भाषा परिवार से संबंध और भौगोलिक विस्तार समझने के लिए।
- Census 2011 Population Finder — भारत और राज्यों के जनसंख्या संबंधी आधिकारिक आंकड़ों के लिए।







0 Comments:
एक टिप्पणी भेजें