छत्तीसगढ़ की 42 जनजातियों की सूची | छत्तीसगढ़ की जनजातियों या आदिवासियों का संक्षिप्त परिचय

 छत्तीसगढ़ की 42 जनजातियों की सूची | नाम, प्रमुख क्षेत्र, भाषा एवं संक्षिप्त परिचय

छत्तीसगढ़ की 42 जनजातियों की पूरी जानकारी

  • छत्तीसगढ़ भारत का एक प्रमुख आदिवासी बहुल राज्य है, जहाँ समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराएँ, भाषाएँ और लोकजीवन आज भी जीवंत रूप में देखने को मिलते हैं। राज्य की कुल जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) समुदायों से संबंधित है। इन जनजातियों ने सदियों से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखा है।
  • इस लेख में हम छत्तीसगढ़ की 42 जनजातियों की सूची, उनके प्रमुख निवास क्षेत्र, भाषाएँ तथा संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कर रहे हैं। यह जानकारी विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों तथा आदिवासी संस्कृति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है।


छत्तीसगढ़ की 42 जनजातियों की सूची

  1. अबूझमाड़िया
  2. अगरिया
  3. बैगा
  4. बैगानी
  5. बिन्झवार
  6. बिरहोर
  7. दंडामी माड़िया
  8. धुरवा
  9. गोंड  
  10. हल्बा
  11. कमार
  12. कंवर
  13. कवर
  14. कोरकू
  15. कोरवा
  16. मझवार
  17. मांझी
  18. मौरिया
  19. मुरिया
  20. नागेशिया
  21. ओझा
  22. पर्धान
  23. परजा
  24. सहारिया
  25. सावर
  26. सवरा
  27. सोनझरी
  28. उरांव
  29. भतरा
  30. भींजवार
  31. खैरवार
  32. कोल
  33. कोरबा
  34. मुंडा
  35. परही
  36. पंडो
  37. राजगोंड
  38. सोंटा
  39. झरिया
  40. मुरिया गोंड
  41. गोंड माड़िया
  42. भैना

छत्तीसगढ़ की जनजातियों की प्रमुख विशेषताएँ

  • अधिकांश जनजातियाँ वन एवं पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करती हैं।
  • कृषि, वनोपज संग्रह, पशुपालन और हस्तशिल्प इनके प्रमुख आजीविका स्रोत हैं।
  • गोंडी, हल्बी, कुड़ुख, मुंडारी, छत्तीसगढ़ी तथा अन्य स्थानीय बोलियाँ व्यापक रूप से बोली जाती हैं।
  • प्रकृति पूजा, पूर्वज पूजा और ग्राम देवताओं की आराधना इनकी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • मड़ई, करमा, सरहुल, नवाखाई तथा अन्य पारंपरिक पर्व बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं।

प्रमुख जनजातियाँ

गोंड

  • छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी जनजाति है। यह बस्तर, कांकेर, राजनांदगांव और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में निवास करती है। गोंड समुदाय अपनी समृद्ध लोककला, नृत्य और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। ,  राज गोंड , मुरिया गोंड , माडिया गोंड ( अबूझ माडिया , दण्डामी माडिया आदि  ), नगेशिया, मुरिया, मौरिया , ध्रुरुवा , अगरिया , प्रर्धन/ पठारी , आदि  गोंड, का ही उपजाति हैं | हालाकि कुछ विद्वान इन्हें अलग अलग मानते हैं | विस्तार से पढ़े 

बैगा

  • बैगा जनजाति को विशेष रूप से प्रकृति प्रेमी समुदाय माना जाता है। पारंपरिक औषधीय ज्ञान और जंगल आधारित जीवनशैली इसकी प्रमुख विशेषता है।

हल्बा

  • हल्बा समुदाय कृषि, शिक्षा और सामाजिक संगठन के लिए जाना जाता है। हल्बी भाषा इस समुदाय की प्रमुख भाषा है।

उरांव

  • उरांव जनजाति मुख्य रूप से उत्तर छत्तीसगढ़ में निवास करती है और अपनी सामुदायिक संस्कृति, लोकगीत एवं करमा नृत्य के लिए प्रसिद्ध है।

कंवर 

  • कंवर  जनजाति मुख्य रूप से उत्तर छत्तीसगढ़ में निवास करती है और अपनी सामुदायिक संस्कृति, लोकगीत एवं बैर नृत्य के लिए प्रसिद्ध है। तवर ,कवर, पैकरा , भैना  कंवर जनजाति का उपजाति हैं हालाकि कुछ विद्वान इन्हें स्थान विशेष के कारण अलग-अलग मानते हैं | विस्तार से पढ़े 


नीचे छत्तीसगढ़ की 42 प्रमुख जनजातियों का संक्षिप्त परिचय एक समान ढांचे में दिया जा रहा है —

👉 परिचय | अनुमानित जनसंख्या | प्रमुख क्षेत्र | भाषा | संस्कृति
(जनसंख्या अनुमानित है, क्योंकि जनजाति-वार सटीक आँकड़े जिले/उपजाति अनुसार बदलते हैं)

1. अबूझमाड़िया (Abujh Maria)

  • परिचय: गोंडों की अत्यंत प्राचीन व स्वायत्त जनजाति
  • जनसंख्या: ~40,000
  • क्षेत्र: नारायणपुर, बीजापुर
  • भाषा: गोंडी
  • संस्कृति: सामूहिक जीवन, घोटुल, प्रकृति पूजा

2. अगरिया

  • परिचय: पारंपरिक लौह शिल्पकार
  • जनसंख्या: ~30,000
  • क्षेत्र: सरगुजा, रायगढ़
  • भाषा: हिंदी, छत्तीसगढ़ी
  • संस्कृति: लोहे के औजार बनाना

3. बैगा

  • परिचय: आदिम जनजाति, जंगल आधारित जीवन
  • जनसंख्या: ~4 लाख
  • क्षेत्र: कबीरधाम, बिलासपुर
  • भाषा: बैगानी
  • संस्कृति: झाड़-फूंक, तंत्र, प्रकृति पूजा

4. बैगानी

  • परिचय: बैगा समुदाय की उपजाति
  • जनसंख्या: ~50,000
  • क्षेत्र: मध्य छत्तीसगढ़
  • भाषा: बैगानी
  • संस्कृति: कृषि व वनोपज

5. बिन्झवार

  • परिचय: कृषि प्रधान जनजाति
  • जनसंख्या: ~1.5 लाख
  • क्षेत्र: रायगढ़, कोरबा
  • भाषा: छत्तीसगढ़ी
  • संस्कृति: लोकनृत्य, देवी पूजा

6. बिरहोर

  • परिचय: अति पिछड़ी घुमंतू जनजाति
  • जनसंख्या: ~10,000
  • क्षेत्र: सरगुजा
  • भाषा: बिरहोर
  • संस्कृति: रस्सी बनाना, शिकार

7. दंडामी माड़िया

  • परिचय: माड़िया गोंड की शाखा
  • जनसंख्या: ~70,000
  • क्षेत्र: बस्तर
  • भाषा: गोंडी
  • संस्कृति: घोटुल, नृत्य

8. धुरवा

  • परिचय: कृषक जनजाति
  • जनसंख्या: ~1 लाख
  • क्षेत्र: बस्तर
  • भाषा: धुरवी
  • संस्कृति: लोकदेवता पूजा

9. गोंड

  • परिचय: छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी जनजाति
  • जनसंख्या: ~45 लाख
  • क्षेत्र: बस्तर, राजनांदगांव
  • भाषा: गोंडी
  • संस्कृति: घोटुल, देवगुड़ी

10. हल्बा

  • परिचय: संगठित व शिक्षित जनजाति
  • जनसंख्या: ~6 लाख
  • क्षेत्र: धमतरी, कांकेर
  • भाषा: हल्बी
  • संस्कृति: कृषि, लोकगीत

11. कमार

  • परिचय: अति पिछड़ी जनजाति
  • जनसंख्या: ~30,000
  • क्षेत्र: गरियाबंद
  • भाषा: कमारी
  • संस्कृति: शिकार, वनोपज

12. कंवर

  • परिचय: कृषक व श्रमिक जनजाति
  • जनसंख्या: ~10 लाख
  • क्षेत्र: सरगुजा
  • भाषा: छत्तीसगढ़ी
  • संस्कृति: खेतिहर परंपरा

13. कवर

  • परिचय: कंवर की उपजाति
  • जनसंख्या: ~2 लाख
  • क्षेत्र: उत्तर छत्तीसगढ़
  • भाषा: हिंदी
  • संस्कृति: ग्राम देवी पूजा

14. कोरकू

  • परिचय: मध्य भारत की प्रसिद्ध जनजाति
  • जनसंख्या: ~1 लाख
  • क्षेत्र: महासमुंद
  • भाषा: कोरकू
  • संस्कृति: पर्व-त्योहार

15. कोरवा

  • परिचय: आदिम जनजाति
  • जनसंख्या: ~1.5 लाख
  • क्षेत्र: जशपुर
  • भाषा: कोरवी
  • संस्कृति: झोपड़ी जीवन

16. मझवार

  • परिचय: कृषि व श्रम आधारित
  • जनसंख्या: ~3 लाख
  • क्षेत्र: बिलासपुर
  • भाषा: छत्तीसगढ़ी
  • संस्कृति: लोकदेवता

17. मांझी

  • परिचय: नदी किनारे बसने वाली जनजाति
  • जनसंख्या: ~1 लाख
  • क्षेत्र: रायपुर
  • भाषा: हिंदी
  • संस्कृति: नाविक परंपरा

18. मौरिया

  • परिचय: गोंड उपसमूह
  • जनसंख्या: ~60,000
  • क्षेत्र: बस्तर
  • भाषा: गोंडी
  • संस्कृति: नृत्य

19. मुरिया

  • परिचय: बस्तर की प्रमुख जनजाति
  • जनसंख्या: ~8 लाख
  • क्षेत्र: जगदलपुर
  • भाषा: गोंडी
  • संस्कृति: घोटुल, नृत्य

20. नागेशिया

  • परिचय: पहाड़ी जनजाति
  • जनसंख्या: ~2 लाख
  • क्षेत्र: सरगुजा
  • भाषा: नागेशिया
  • संस्कृति: पर्व पूजा

21. ओझा (Ojha)

  • परिचय: ओझा जनजाति पारंपरिक रूप से लोक चिकित्सा, धार्मिक अनुष्ठानों और कृषि कार्य से जुड़ी रही है।
  • जनसंख्या: लगभग 50,000
  • प्रमुख क्षेत्र: सरगुजा, जशपुर, रायगढ़
  • भाषा: हिंदी, छत्तीसगढ़ी, स्थानीय बोलियाँ
  • संस्कृति: प्रकृति पूजा, लोकदेवताओं में आस्था, पारंपरिक नृत्य एवं लोकगीत।

22. पर्धान (Pardhan)

  • परिचय: पर्धान समुदाय गोंड जनजाति के पारंपरिक गायक, कथावाचक एवं इतिहास संरक्षक माने जाते हैं।
  • जनसंख्या: लगभग 1 लाख
  • प्रमुख क्षेत्र: कबीरधाम, राजनांदगांव, कांकेर
  • भाषा: गोंडी, हिंदी
  • संस्कृति: लोक संगीत, बाना वाद्य यंत्र, बुढ़ादेव की पूजा।

23. परजा (Parja)

  • परिचय: परजा बस्तर क्षेत्र की प्रमुख कृषक जनजातियों में से एक है।
  • जनसंख्या: लगभग 80,000
  • प्रमुख क्षेत्र: बस्तर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा
  • भाषा: परजी, हल्बी
  • संस्कृति: कृषि, सामूहिक नृत्य, पारंपरिक त्योहार।

24. सहारिया (Sahariya)

  • परिचय: सहारिया एक वन आधारित जीवन शैली वाली जनजाति है।
  • जनसंख्या: लगभग 60,000
  • प्रमुख क्षेत्र: सरगुजा एवं सीमावर्ती क्षेत्र
  • भाषा: सहारिया, हिंदी
  • संस्कृति: शिकार, वनोपज संग्रह, प्रकृति पूजा।

25. सावर (Sawar)

  • परिचय: सावर जनजाति प्राचीन वनवासी समुदायों में से एक मानी जाती है।
  • जनसंख्या: लगभग 1 लाख
  • प्रमुख क्षेत्र: बस्तर, गरियाबंद
  • भाषा: सवरा बोली, ओड़िया, हिंदी
  • संस्कृति: सूर्य एवं प्रकृति पूजा, लोकनृत्य।

26. सवरा (Saora)

  • परिचय: सवरा जनजाति अपनी विशिष्ट चित्रकला और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है।
  • जनसंख्या: लगभग 80,000
  • प्रमुख क्षेत्र: गरियाबंद, महासमुंद
  • भाषा: सवरा भाषा
  • संस्कृति: दीवार चित्रकला, सामूहिक उत्सव, पूर्वज पूजा।

27. सोनझरी (Sonjhari)

  • परिचय: सोनझरी एक छोटा आदिवासी समुदाय है जो मुख्यतः कृषि एवं वनोपज पर निर्भर है।
  • जनसंख्या: लगभग 25,000
  • प्रमुख क्षेत्र: बस्तर एवं कांकेर
  • भाषा: छत्तीसगढ़ी, गोंडी
  • संस्कृति: लोकनृत्य, सामुदायिक जीवन, प्रकृति पूजा।

28. उरांव (Oraon)

  • परिचय: उरांव भारत की प्रमुख आदिवासी जनजातियों में से एक है।
  • जनसंख्या: लगभग 7 लाख
  • प्रमुख क्षेत्र: जशपुर, सरगुजा, बलरामपुर
  • भाषा: कुड़ुख, हिंदी
  • संस्कृति: सरहुल, करमा नृत्य, कृषि आधारित जीवन।

29. भतरा (Bhatra)

  • परिचय: भतरा जनजाति बस्तर क्षेत्र की महत्वपूर्ण कृषक जनजाति है।
  • जनसंख्या: लगभग 2 लाख
  • प्रमुख क्षेत्र: जगदलपुर, कोंडागांव
  • भाषा: हल्बी, भतरी
  • संस्कृति: लोकगीत, कृषि, देवी-देवता पूजा।

30. भींजवार (Bhinjwar)

  • परिचय: भींजवार समुदाय पारंपरिक रूप से कृषि और वनोपज संग्रह से जुड़ा है।
  • जनसंख्या: लगभग 2.5 लाख
  • प्रमुख क्षेत्र: कोरबा, रायगढ़, जांजगीर
  • भाषा: छत्तीसगढ़ी, हिंदी
  • संस्कृति: लोकनृत्य, ग्राम देवता पूजा।

31. खैरवार (Khairwar)

  • परिचय: खैरवार वन संसाधनों पर आधारित जीवन शैली रखने वाली जनजाति है।
  • जनसंख्या: लगभग 3 लाख
  • प्रमुख क्षेत्र: सरगुजा, जशपुर
  • भाषा: हिंदी, स्थानीय बोलियाँ
  • संस्कृति: वनोपज संग्रह, प्रकृति पूजा।

32. कोल (Kol)

  • परिचय: कोल एक प्राचीन जनजातीय समुदाय है जो कृषि एवं श्रम कार्यों से जुड़ा है।
  • जनसंख्या: लगभग 2 लाख
  • प्रमुख क्षेत्र: उत्तर छत्तीसगढ़
  • भाषा: हिंदी, छत्तीसगढ़ी
  • संस्कृति: सामुदायिक जीवन, लोकगीत।

33. कोरबा (Korba)

  • परिचय: कोरबा जनजाति जंगल और कृषि दोनों पर आधारित जीवन शैली अपनाती है।
  • जनसंख्या: लगभग 1 लाख
  • प्रमुख क्षेत्र: कोरबा जिला एवं आसपास
  • भाषा: कोरबा बोली, हिंदी
  • संस्कृति: प्रकृति पूजा, कृषि पर्व।

34. मुंडा (Munda)

  • परिचय: मुंडा जनजाति अपनी संगठित सामाजिक व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध है।
  • जनसंख्या: लगभग 1.5 लाख
  • प्रमुख क्षेत्र: जशपुर, सरगुजा
  • भाषा: मुंडारी
  • संस्कृति: सरहुल पर्व, सामूहिक नृत्य, प्रकृति पूजा।

35. परही (Parhi)

  • परिचय: परही एक छोटा जनजातीय समुदाय है जो मुख्यतः कृषि कार्य करता है।
  • जनसंख्या: लगभग 20,000
  • प्रमुख क्षेत्र: बस्तर क्षेत्र
  • भाषा: हल्बी, हिंदी
  • संस्कृति: ग्राम देवता पूजा, लोकनृत्य।

36. पंडो (Pando)

  • परिचय: पंडो छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों में शामिल है।
  • जनसंख्या: लगभग 45,000
  • प्रमुख क्षेत्र: बलरामपुर, सरगुजा
  • भाषा: हिंदी, स्थानीय बोलियाँ
  • संस्कृति: वनोपज संग्रह, पारंपरिक कृषि।

37. राजगोंड (Rajgond)

  • परिचय: राजगोंड गोंड जनजाति की प्रमुख शाखा है, जिसका ऐतिहासिक रूप से कई क्षेत्रों में शासन रहा है।
  • जनसंख्या: लगभग 8 लाख
  • प्रमुख क्षेत्र: कांकेर, राजनांदगांव, बस्तर
  • भाषा: गोंडी
  • संस्कृति: बुढ़ादेव पूजा, लोकनृत्य, सामुदायिक परंपराएँ।

38. सोंटा (Sonta)

  • परिचय: सोंटा एक लघु जनजातीय समुदाय है।
  • जनसंख्या: लगभग 15,000
  • प्रमुख क्षेत्र: बस्तर
  • भाषा: हल्बी
  • संस्कृति: कृषि एवं लोक परंपराएँ।

39. झरिया (Jharia)

  • परिचय: झरिया समुदाय पारंपरिक रूप से वन संसाधनों पर निर्भर रहा है।
  • जनसंख्या: लगभग 25,000
  • प्रमुख क्षेत्र: सरगुजा एवं रायगढ़
  • भाषा: हिंदी, स्थानीय बोलियाँ
  • संस्कृति: लोकगीत, प्रकृति पूजा।

40. मुरिया गोंड (Muria Gond)

  • परिचय: मुरिया गोंड, गोंड जनजाति की प्रमुख शाखा है जो बस्तर की घोटुल परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
  • जनसंख्या: लगभग 5 लाख
  • प्रमुख क्षेत्र: बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव
  • भाषा: गोंडी
  • संस्कृति: घोटुल, सामूहिक नृत्य, मड़ई उत्सव।

41. गोंड माड़िया (Gond Maria)

  • परिचय: गोंड माड़िया समुदाय अपनी पारंपरिक जीवन शैली और जंगल आधारित संस्कृति के लिए जाना जाता है।
  • जनसंख्या: लगभग 1 लाख
  • प्रमुख क्षेत्र: बीजापुर, दंतेवाड़ा
  • भाषा: माड़िया गोंडी
  • संस्कृति: पारंपरिक नृत्य, प्रकृति एवं पूर्वज पूजा।

42. भैना (Bhaina)

  • परिचय: भैना छत्तीसगढ़ की एक छोटी अनुसूचित जनजाति है जो मुख्यतः कृषि और वनोपज पर निर्भर है।
  • जनसंख्या: लगभग 60,000
  • प्रमुख क्षेत्र: मुंगेली, बिलासपुर, कबीरधाम
  • भाषा: छत्तीसगढ़ी, हिंदी
  • संस्कृति: कृषि, लोकगीत, ग्राम देवता पूजा।


छत्तीसगढ़ की जनजातियों का सांस्कृतिक महत्व

छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ राज्य की सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला हैं। इनके लोकनृत्य, लोकगीत, चित्रकला, हस्तशिल्प, पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की परंपरा भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाती है। बस्तर दशहरा, मड़ई मेला और करमा उत्सव जैसे आयोजन इनकी सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करते हैं।


प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • छत्तीसगढ़ भारत के प्रमुख आदिवासी बहुल राज्यों में से एक है।
  • राज्य में अनेक विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) समुदाय भी निवास करते हैं।
  • गोंड राज्य की सबसे बड़ी जनजाति मानी जाती है।
  • बस्तर संभाग आदिवासी संस्कृति का प्रमुख केंद्र है।
  • गोंडी और हल्बी राज्य की प्रमुख आदिवासी भाषाओं में शामिल हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

प्रश्न 1: छत्तीसगढ़ में कितनी जनजातियाँ हैं?

उत्तर: सामान्य रूप से अध्ययन सामग्री में 42 प्रमुख जनजातियों की सूची प्रस्तुत की जाती है।

प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी जनजाति कौन सी है?

उत्तर: गोंड जनजाति राज्य की सबसे बड़ी जनजाति मानी जाती है।

प्रश्न 3: छत्तीसगढ़ की प्रमुख आदिवासी भाषा कौन सी है?

उत्तर: गोंडी, हल्बी, कुड़ुख, मुंडारी तथा छत्तीसगढ़ी सहित अनेक भाषाएँ और बोलियाँ प्रचलित हैं।

प्रश्न 4: प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह सूची क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: CGPSC, CG Vyapam, UPSC, UGC NET, TET तथा अन्य सामान्य ज्ञान परीक्षाओं में छत्तीसगढ़ की जनजातियों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।


निष्कर्ष

  • छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ केवल सामाजिक समूह नहीं हैं, बल्कि वे राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी परंपराओं, भाषाओं और जीवनशैली का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि आप छत्तीसगढ़ की प्रत्येक जनजाति के इतिहास, संस्कृति, भाषा, त्योहार और सामाजिक जीवन के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो इस श्रृंखला के आगामी लेख अवश्य पढ़ें।


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