ओडिशा की जनजातियाँ: इतिहास, संस्कृति, भाषा, जीवन और 62 अनुसूचित जनजातियों का विस्तृत अध्ययन
ओडिशा भारत के उन राज्यों में शामिल है जहाँ आदिवासी एवं जनजातीय समुदायों की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य में अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में अनेक जनजातीय समुदाय निवास करते हैं, जिनकी अपनी भाषा, बोली, सामाजिक व्यवस्था, परंपराएँ, धार्मिक मान्यताएँ, कला, नृत्य, आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े जीवन-पद्धति हैं।
सरकारी अभिलेखों के अनुसार ओडिशा में 62 अनुसूचित जनजाति समुदाय हैं। इनमें 13 समुदायों को Particularly Vulnerable Tribal Groups (PVTGs) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
2011 की जनगणना के आधार पर ओडिशा की अनुसूचित जनजाति आबादी लगभग 95.91 लाख थी, जो राज्य की कुल आबादी का लगभग 22.85 प्रतिशत थी।
इस लेख में हम ओडिशा की जनजातियों को केवल नामों की सूची के रूप में नहीं, बल्कि उनके इतिहास, समाज, संस्कृति, भाषा, आजीविका और वर्तमान सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में समझने का प्रयास करेंगे।
1. ओडिशा में जनजातीय समाज का महत्व
ओडिशा का जनजातीय समाज एक समान समूह नहीं है। अलग-अलग समुदायों की अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामाजिक संरचना, भाषा और सांस्कृतिक पहचान है।
राज्य के जनजातीय समुदायों का एक बड़ा हिस्सा पहाड़ी, वन और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा रहा है। पारंपरिक रूप से कृषि, वनोपज संग्रह, पशुपालन, शिकार-संग्रह, हस्तशिल्प और मजदूरी जैसी गतिविधियाँ उनकी आजीविका का हिस्सा रही हैं।
ओडिशा सरकार के दस्तावेजों के अनुसार राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय आबादी की बड़ी उपस्थिति है और जनजातीय विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, रोजगार तथा वन एवं भूमि अधिकारों से संबंधित कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
2. ओडिशा में कितनी जनजातियाँ हैं?
ओडिशा में वर्तमान सरकारी वर्गीकरण के अनुसार 62 अनुसूचित जनजातियाँ (Scheduled Tribes) सूचीबद्ध हैं। ओडिशा स्टेट ट्राइबल म्यूजियम भी 62 अनुसूचित जनजातियों की सूची प्रकाशित करता है।
ओडिशा की 62 अनुसूचित जनजातियों की सूची
- बागता (Bagata)
- बैगा (Baiga)
- बंजारा (Banjara)
- बाथुड़ी (Bathudi)
- भोट्टाडा/भोटरा (Bhottada)
- भुइन्या/भुइयां (Bhuinya)
- भूमिया (Bhumia)
- भूमिज (Bhumij)
- भुंजिया (Bhunjia)
- बिंझाल (Binjhal)
- बिंझिया (Binjhia)
- बिरहोर (Birhor)
- बोंडा/बोंडा परोजा (Bonda Poraja)
- चेंचू (Chenchu)
- डाल (Dal)
- देसुआ भूमिज (Desua Bhumij)
- धरुआ (Dharua)
- दिदायी (Didayi)
- गडाबा (Gadaba)
- गांडिया (Gandia)
- घारा (Ghara)
- गोंड (Gond)
- हो (Ho)
- होलवा (Holva)
- जटापू (Jatapu)
- जुआंग (Juang)
- कंध/कंधा (Kandha)
- कंधा गौड़ा (Kandha Gauda)
- कवार (Kawar)
- खड़िया (Kharia)
- खरवार (Kharwar)
- किसान (Kisan)
- कोल (Kol)
- कोलाह (Kolah)
- कोल्हा (Kolha)
- कोली (Koli)
- मल्हार (Malhar)
- कोंडादोरा (Kondadora)
- कोरा (Kora)
- कोरुआ (Korua)
- कोटिया (Kotia)
- कोया (Koya)
- कुलिस (Kulis)
- लोढ़ा (Lodha)
- माडिया (Madia)
- महाली (Mahali)
- मांकिडी (Mankidi)
- मांकिरदिया (Mankirdia)
- मट्या (Matya)
- मिर्धास (Mirdhas)
- मुंडा (Munda)
- मुंडारी (Mundari)
- ओमनात्या (Omanatya)
- उरांव (Oraon)
- परेंगा (Parenga)
- परोजा (Paroja)
- पेंटिया (Pentia)
- राजुआर (Rajuar)
- संताल (Santal)
- साओरा/सवरा (Saora)
- शबर/लोढ़ा (Shabar, Lodha)
- सौंती (Sounti)
- थारुआ (Tharua)
नोट: अलग-अलग सरकारी/प्रशासनिक दस्तावेजों में कुछ जनजातीय नामों और उनके पर्याय/उपसमूहों की वर्तनी या प्रस्तुति अलग दिखाई दे सकती है। इसलिए ब्लॉग में आधिकारिक अनुसूचित जनजाति सूची को आधार बनाना उचित है। भारत सरकार की जनजातीय सांख्यिकी में भी ओडिशा के लिए समुदायों के साथ उनके वैकल्पिक नाम दर्ज हैं।
3. ओडिशा की 13 PVTG जनजातियाँ
ओडिशा की जनजातीय विविधता को समझने में PVTG समुदायों का विशेष महत्व है।
ओडिशा में निम्न 13 समुदायों को Particularly Vulnerable Tribal Groups के रूप में सूचीबद्ध किया गया है:
- बिरहोर
- बोंडा
- चुक्टिया भुंजिया
- दिदायी
- डोंगरिया कोंध
- हिल खड़िया
- जुआंग
- कुटिया कंध
- लांजिया साओरा
- लोढ़ा
- मांकिरदिया
- पाउड़ी भुइयां
- साओरा
इन समुदायों का भौगोलिक वितरण राज्य के अलग-अलग जिलों में है। उदाहरण के लिए बोंडा और दिदायी मुख्य रूप से मलकानगिरी क्षेत्र से जुड़े हैं, डोंगरिया कोंध रायगड़ा, चुक्टिया भुंजिया नुआपाड़ा तथा जुआंग के समूह क्योंझर, जाजपुर और ढेंकानाल क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
4. कंध/कंधा समुदाय
कंध ओडिशा के महत्वपूर्ण जनजातीय समुदायों में से एक है। विशेष रूप से दक्षिणी और मध्य ओडिशा के पहाड़ी क्षेत्रों में इनकी महत्वपूर्ण उपस्थिति रही है।
कंध समाज के भीतर भी विभिन्न समूह और स्थानीय पहचानें देखने को मिलती हैं। कुटिया कंध और डोंगरिया कंध जैसे समूहों की जीवन-पद्धति, भौगोलिक क्षेत्र और सांस्कृतिक विशेषताएँ अलग-अलग रूपों में दिखाई देती हैं।
इनका जीवन कृषि, वन संसाधनों और स्थानीय पर्यावरण से लंबे समय से जुड़ा रहा है।
5. डोंगरिया कोंध
डोंगरिया कोंध ओडिशा के सबसे चर्चित जनजातीय समुदायों में से एक हैं। इनका प्रमुख निवास क्षेत्र रायगड़ा जिले के नियमगिरि पहाड़ी क्षेत्र से जुड़ा है।
इनकी सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था पहाड़, जंगल, कृषि और प्राकृतिक संसाधनों के साथ गहरे संबंध को दर्शाती है।
डोंगरिया कोंध के संदर्भ में भूमि, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े प्रश्नों ने भी सार्वजनिक एवं मानवाधिकार विमर्श में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया है। इसलिए इस समुदाय का अध्ययन केवल संस्कृति के स्तर पर नहीं बल्कि भूमि, पर्यावरण, आजीविका और अधिकारों के संदर्भ में भी किया जाना चाहिए।
6. बोंडा जनजाति
बोंडा समुदाय मुख्यतः मलकानगिरी क्षेत्र से संबंधित है और ओडिशा के PVTG समुदायों में शामिल है।
बोंडा समाज की अपनी विशिष्ट पोशाक, आभूषण, सामाजिक परंपराएँ और भाषा-सांस्कृतिक पहचान है।
इनके बारे में इंटरनेट पर अनेक सामान्यीकृत और कभी-कभी अतिरंजित विवरण मिलते हैं। इसलिए बोंडा समुदाय पर लिखते समय सरकारी जनजातीय शोध संस्थानों तथा समुदाय-आधारित अध्ययनों को प्राथमिक स्रोत बनाना आवश्यक है।
7. साओरा/सवरा जनजाति
साओरा ओडिशा की महत्वपूर्ण जनजातियों में से एक है। दक्षिणी ओडिशा के विभिन्न क्षेत्रों में इनकी उपस्थिति मिलती है।
साओरा समुदाय की कला विशेष रूप से प्रसिद्ध है। उनकी पारंपरिक चित्रकला को कई जगह साओरा पेंटिंग के रूप में जाना जाता है।
साओरा समाज के अध्ययन में चित्रकला, कृषि, धार्मिक विश्वास, पारंपरिक ज्ञान, सामाजिक संगठन और स्थानीय भाषा महत्वपूर्ण विषय हैं।
8. गडाबा जनजाति
गडाबा समुदाय मुख्य रूप से दक्षिणी ओडिशा के क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।
गडाबा समाज में कृषि, सामुदायिक जीवन, पारंपरिक नृत्य, संगीत और उत्सवों का विशेष महत्व है।
ओडिशा स्टेट ट्राइबल म्यूजियम में गडाबा पारंपरिक आवास को भी प्रदर्शित किया गया है, जिससे इनके पारंपरिक जीवन और घरेलू व्यवस्था को समझने में सहायता मिलती है।
9. जुआंग जनजाति
जुआंग ओडिशा के महत्वपूर्ण जनजातीय समुदायों में से एक है और इसे PVTG सूची में भी शामिल किया गया है।
इनकी उपस्थिति मुख्यतः क्योंझर, जाजपुर और ढेंकानाल क्षेत्रों में दर्ज की गई है।
जुआंग समाज की पारंपरिक अर्थव्यवस्था में जंगल और स्थानीय संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
10. बिरहोर और मांकिरदिया
बिरहोर और मांकिरदिया समुदायों की पारंपरिक आजीविका में जंगल से प्राप्त संसाधनों का विशेष महत्व रहा है।
ओडिशा स्टेट ट्राइबल म्यूजियम के विवरण के अनुसार मांकिडी/मांकिरदिया समुदायों का पारंपरिक जीवन वन-संग्रह, रस्सी बनाने और अन्य जंगल आधारित गतिविधियों से जुड़ा रहा है।
इन समुदायों के अध्ययन में केवल उनकी पारंपरिक आजीविका ही नहीं, बल्कि बदलती अर्थव्यवस्था और आधुनिक रोजगार के प्रभावों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
11. संताल, मुंडा और हो समुदाय
ओडिशा के उत्तरी क्षेत्रों में संताल, मुंडा और हो जैसे समुदायों की महत्वपूर्ण उपस्थिति है।
इन समुदायों का सांस्कृतिक संबंध झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों से भी जुड़ता है। इसलिए इन जनजातियों का अध्ययन राज्य की सीमाओं से अलग व्यापक पूर्वी-मध्य भारतीय जनजातीय क्षेत्र के संदर्भ में किया जा सकता है।
इनकी भाषाएँ, नृत्य, गीत, कृषि परंपराएँ और सामाजिक संगठन इनके सांस्कृतिक जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
12. गोंड जनजाति
गोंड भारत की प्रमुख जनजातीय समुदायों में से एक हैं और ओडिशा में भी गोंड समुदाय की उपस्थिति दर्ज है।
ओडिशा स्टेट ट्राइबल म्यूजियम की 62 अनुसूचित जनजातियों की सूची में गोंड को भी शामिल किया गया है।
गोंड समाज का विस्तृत अध्ययन केवल एक राज्य तक सीमित नहीं होना चाहिए। मध्य भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले गोंड समुदायों की स्थानीय भाषाओं, सामाजिक संस्थाओं और सांस्कृतिक परंपराओं में विविधता मिलती है।
13. जनजातीय भाषाएँ और बोलियाँ
ओडिशा की जनजातीय विविधता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भाषाई विविधता है।
एक ही समुदाय के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में अलग स्थानीय नाम, उपसमूह या भाषाई रूप मिल सकते हैं। भारत की 2011 जनगणना में ओडिशा के लिए जनजाति-वार मातृभाषा संबंधी आंकड़े भी उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए साओरा, परोजा, मुंडा, मांकिरदिया और अन्य समुदायों के लिए अलग-अलग मातृभाषा/भाषाई नाम दर्ज किए गए हैं।
इसलिए किसी जनजाति की भाषा के बारे में लिखते समय “एक जनजाति = एक भाषा” जैसी सरल धारणा से बचना चाहिए।
14. जनजातीय समाज और जंगल
ओडिशा के अनेक जनजातीय समुदायों का जीवन जंगल और प्राकृतिक संसाधनों से ऐतिहासिक रूप से जुड़ा रहा है।
वन से मिलने वाली लघु वनोपज, खाद्य सामग्री, औषधीय पौधे, ईंधन, लकड़ी और अन्य संसाधन ग्रामीण एवं जनजातीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण रहे हैं।
इसी कारण वन अधिकार, सामुदायिक संसाधन, भूमि अधिकार और आजीविका के प्रश्न जनजातीय विकास के महत्वपूर्ण विषय हैं।
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के संसाधनों में Forest Rights Act, 2006 और PESA Act, 1996 जैसे कानून भी उपलब्ध हैं।
15. कृषि और आजीविका
ओडिशा के जनजातीय समुदायों में कृषि आजीविका का एक महत्वपूर्ण आधार है। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के कारण खेती के तरीके और फसलों में भी अंतर पाया जाता है।
कई समुदायों में पारंपरिक कृषि के साथ वनोपज संग्रह, पशुपालन, मजदूरी, हस्तशिल्प और अन्य आर्थिक गतिविधियाँ जुड़ी हुई हैं।
इसलिए जनजातीय अर्थव्यवस्था को केवल “कृषि पर निर्भर” कहना पर्याप्त नहीं है। वास्तविकता में कई परिवार विभिन्न प्रकार की आजीविका गतिविधियों का संयोजन करते हैं।
16. जनजातीय कला और संस्कृति
ओडिशा की जनजातीय संस्कृति में नृत्य, संगीत, लोकगीत, चित्रकला, आभूषण, वस्त्र, हस्तशिल्प और पारंपरिक वास्तुकला का महत्वपूर्ण स्थान है।
साओरा चित्रकला, गडाबा एवं जुआंग नृत्य-संगीत, बोंडा आभूषण और विभिन्न समुदायों की पारंपरिक आवास शैली ओडिशा की जनजातीय सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करती है।
ओडिशा स्टेट ट्राइबल म्यूजियम में संताल, जुआंग, गडाबा, साओरा, कंध, गोंड और चुक्टिया भुंजिया समुदायों के पारंपरिक आवासों के नमूने भी प्रदर्शित किए गए हैं।
17. जनजातीय त्योहार और सामुदायिक जीवन
जनजातीय समाज में त्योहार केवल धार्मिक गतिविधियाँ नहीं होते। वे सामाजिक संबंधों, कृषि चक्र, सामुदायिक सहयोग और सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़े हो सकते हैं।
अलग-अलग समुदायों में त्योहारों और अनुष्ठानों के स्वरूप अलग होते हैं। इसलिए “सभी ओडिशा की जनजातियाँ एक ही प्रकार के त्योहार मनाती हैं” कहना सही नहीं होगा।
प्रत्येक समुदाय के त्योहारों को उनके अपने सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ में समझना आवश्यक है।
18. जनजातीय समाज में महिलाओं की भूमिका
जनजातीय समाज का अध्ययन करते समय महिलाओं की भूमिका को भी विशेष रूप से समझना आवश्यक है।
कृषि, वनोपज संग्रह, घरेलू अर्थव्यवस्था, पशुपालन, हस्तशिल्प, स्थानीय बाजार और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में अनेक जनजातीय महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी होती है।
हालाँकि विभिन्न समुदायों में महिलाओं की सामाजिक स्थिति, संपत्ति संबंधी अधिकार, निर्णय लेने की भूमिका और आर्थिक भागीदारी अलग-अलग हो सकती है।
इसलिए पूरे जनजातीय समाज के लिए एक समान निष्कर्ष निकालने के बजाय समुदाय-विशिष्ट अध्ययन अधिक उचित है।
19. शिक्षा की स्थिति
जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार पिछले दशकों में बढ़ा है, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों में विद्यालय तक पहुंच, भाषा संबंधी कठिनाइयाँ, आर्थिक परिस्थितियाँ, परिवहन और उच्च शिक्षा तक पहुंच जैसी चुनौतियाँ महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।
ओडिशा सरकार के जनजातीय कल्याण कार्यक्रमों में शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा में स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक संदर्भों को समझना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
20. स्वास्थ्य और पोषण
दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच एक महत्वपूर्ण विकास विषय है।
पहाड़ी और वन क्षेत्रों में भौगोलिक दूरी, परिवहन, स्वास्थ्य संस्थानों की उपलब्धता तथा आर्थिक स्थिति जैसी परिस्थितियाँ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को प्रभावित कर सकती हैं।
PVTG समुदायों के लिए विशेष रूप से लक्षित कार्यक्रमों की आवश्यकता को सरकारी दस्तावेजों में भी महत्व दिया गया है।
21. भूमि और वन अधिकार
जनजातीय समाज और प्राकृतिक संसाधनों का संबंध ओडिशा के अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भूमि, जंगल और जल संसाधन केवल आर्थिक संसाधन नहीं हैं; कई समुदायों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी हिस्सा हैं।
इसी संदर्भ में अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन और ग्राम सभा से संबंधित PESA Act, 1996 भी महत्वपूर्ण कानूनी विषय है।
22. अनुसूचित क्षेत्र और जनजातीय विकास
ओडिशा में बड़ी संख्या में जनजातीय आबादी अनुसूचित क्षेत्रों में रहती है।
राज्य सरकार के अनुसार 69,403 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है तथा 13 जिलों में 119 ऐसे ब्लॉक हैं जहाँ जनजातीय आबादी का अनुपात 50 प्रतिशत से अधिक है।
अनुसूचित क्षेत्रों की व्यवस्था संविधान की पाँचवीं अनुसूची और उससे संबंधित कानूनों के संदर्भ में समझी जाती है।
23. सरकारी योजनाएँ और जनजातीय विकास
जनजातीय विकास के लिए सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार, कौशल विकास, आधारभूत संरचना तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
ओडिशा सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में ST समुदायों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और वन-भूमि अधिकारों तक पहुंच बढ़ाने को विकास उद्देश्यों में शामिल किया गया है।
PVTG समुदायों के लिए कुछ योजनाओं में विशेष प्रावधान भी किए जाते हैं। उदाहरण के लिए ओडिशा की MAMATA योजना में PVTG महिलाओं के लिए कुछ पात्रता नियमों में विशेष व्यवस्था दी गई है।
24. ओडिशा की जनजातियों का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है?
ओडिशा की जनजातियों का अध्ययन केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण नहीं है।
यह विषय कई क्षेत्रों से जुड़ा है:
इसी कारण ओडिशा की जनजातियों पर अध्ययन करते समय केवल नाम और जनसंख्या याद करने के बजाय उनके इतिहास, समाज, संस्कृति, भाषा, भूगोल और वर्तमान परिस्थितियों को समझना अधिक उपयोगी है।
25. निष्कर्ष
ओडिशा का जनजातीय समाज अनेक समुदायों, भाषाओं, संस्कृतियों और जीवन-पद्धतियों का व्यापक समूह है। राज्य में 62 अनुसूचित जनजातियाँ और 13 PVTG समुदाय सूचीबद्ध हैं।
बोंडा, डोंगरिया कोंध, कंध, साओरा, गडाबा, जुआंग, बिरहोर, गोंड, संताल, मुंडा, हो और अन्य समुदाय अपनी-अपनी विशिष्ट सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान रखते हैं।
इसलिए “ओडिशा की जनजाति” को एक ही संस्कृति या एक ही सामाजिक व्यवस्था के रूप में देखना उचित नहीं है। ओडिशा का जनजातीय समाज विविध समुदायों का समूह है और प्रत्येक समुदाय का अपना ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संदर्भ है।
आदिवासी Education का उद्देश्य ऐसे विषयों को केवल परीक्षा की दृष्टि से नहीं बल्कि प्रमाणित जानकारी, शोध, समुदाय की आवाज और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करना होना चाहिए।
संदर्भ के लिए प्रमुख स्रोत
- ओडिशा सरकार — ST & SC Development Department
- ओडिशा स्टेट ट्राइबल म्यूजियम
- भारत सरकार — Ministry of Tribal Affairs
- Census of India 2011
- Scheduled Castes & Scheduled Tribes Research and Training Institute, Odisha
- Forest Rights Act, 2006
- PESA Act, 1996