झारखंड की जनजातियाँ: पूरी सूची, जनसंख्या, निवास जिले, संस्कृति, बोली और नृत्य
भारत की सभी प्रमुख जनजातियों का इतिहास, संस्कृति, भाषा, परंपरा, सरकारी योजनाएँ, संवैधानिक अधिकार और शिक्षा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी हिंदी में पढ़ें।
शिक्षा हमारा अधिकार और भविष्य हैं,इसे हम सब मिलकर आगे बढ़ना हैं
आदिवासी संकृति और परम्परा आपने आप में बहुत विशाल हैं| जो आपने भागोलिक परिवेश में विशिस्ट और मधुर हैं
इस दुनिया में आदिवासी समाज का विशेष महत्व हैं जो प्रकृति के अनुकूल हैं
Adiwasi-Education
Adiwasi-Education
गोंड मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी जनजाति है। इनका इतिहास कई शताब्दियों पुराना है और मध्य भारत में अनेक गोंड राजवंश भी स्थापित हुए थे।
अनुमानित जनसंख्या: लगभग 50 लाख से अधिक
प्रमुख क्षेत्र:
मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, सिवनी, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर आदि।
भाषा:
गोंडी, हिंदी एवं स्थानीय बोलियाँ।
संस्कृति:
भील भारत की सबसे प्राचीन जनजातियों में मानी जाती है। मध्य प्रदेश के पश्चिमी भाग में इनकी बड़ी आबादी निवास करती है।
अनुमानित जनसंख्या: लगभग 35–40 लाख
प्रमुख क्षेत्र:
झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन।
भाषा:
भीली, हिंदी।
संस्कृति:
बैगा जनजाति को विशेष रूप से वन एवं प्रकृति से जुड़े जीवन के लिए जाना जाता है। इन्हें विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) में शामिल किया गया है।
अनुमानित जनसंख्या: लगभग 5 लाख
प्रमुख क्षेत्र:
डिंडोरी, मंडला, बालाघाट, उमरिया।
भाषा:
बैगानी, हिंदी।
संस्कृति:
कोरकू जनजाति मुख्यतः सतपुड़ा पर्वतीय क्षेत्र में निवास करती है।
अनुमानित जनसंख्या: लगभग 7–8 लाख
प्रमुख क्षेत्र:
खंडवा, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर।
भाषा:
कोरकू भाषा।
संस्कृति:
भारिया समुदाय अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान के लिए प्रसिद्ध है।
अनुमानित जनसंख्या: लगभग 2 लाख
प्रमुख क्षेत्र:
छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्र।
भाषा:
भारियाटी एवं हिंदी।
संस्कृति:
कोल जनजाति मध्य प्रदेश के उत्तर-पूर्वी जिलों में निवास करती है।
अनुमानित जनसंख्या: लगभग 10 लाख
प्रमुख क्षेत्र:
रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली।
भाषा:
कोल बोली एवं हिंदी।
संस्कृति:
सहरिया जनजाति मध्य प्रदेश की विशेष रूप से संवेदनशील जनजातियों में शामिल है।
अनुमानित जनसंख्या: लगभग 6 लाख
प्रमुख क्षेत्र:
श्योपुर, शिवपुरी, गुना।
भाषा:
सहरिया बोली, हिंदी।
संस्कृति:
प्रमुख क्षेत्र: बालाघाट, मंडला
भाषा: हल्बी, हिंदी
संस्कृति: कृषि, लोकगीत, पारंपरिक नृत्य एवं हस्तशिल्प।
प्रमुख क्षेत्र: धार, खरगोन, बड़वानी
भाषा: भीली एवं हिंदी
संस्कृति: भगोरिया उत्सव, कृषि, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा।
प्रमुख क्षेत्र: झाबुआ एवं अलीराजपुर
भाषा: भीली समूह की बोलियाँ
संस्कृति: कृषि, पशुपालन एवं लोक उत्सव।
![]() |
| राजस्थान ST List |
| क्रमांक | जनजाति |
|---|---|
| 1 | भील (Bhil) एवं उसकी उपशाखाएँ |
| 2 | भील मीणा |
| 3 | डामोर (डामरिया) |
| 4 | धनका |
| 5 | गरासिया (राजपूत गरासिया को छोड़कर) |
| 6 | काथोड़ी / कातकरी |
| 7 | कोकना / कोकनी / कुकना |
| 8 | कोली ढोर / टोकरे कोली / कोलचा / कोलघा |
| 9 | मीणा |
| 10 | नायकड़ा / नायका |
| 11 | पटेलिया |
| 12 | सहरिया (सेहरिया/सहरिया) |
लगभग 43.45 लाख, जो राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है।
लगभग 41 लाख, राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति।
| जिला | आदिवासी उपस्थिति |
|---|---|
| उदयपुर | बहुत अधिक |
| बांसवाड़ा | बहुत अधिक |
| डूंगरपुर | बहुत अधिक |
| प्रतापगढ़ | बहुत अधिक |
| सिरोही | अधिक |
| बारां | सहरिया जनजाति का प्रमुख क्षेत्र |
| करौली | मीणा एवं भील मीणा |
| दौसा | मीणा बहुल |
| सवाई माधोपुर | मीणा बहुल |
| जनजाति | अनुमानित जनसंख्या |
|---|---|
| मीणा | 43,45,528 |
| भील समूह | 41,00,264 |
| गरासिया | 3,14,194 |
| सहरिया | 1,11,377 |
| भील मीणा | 1,05,393 |
| धनका | 96,737 |
| डामोर | 91,463 |
| नायकड़ा | 8,355 |
| काथोड़ी | 4,833 |
| कोली ढोर | 1,535 |
| पटेलिया | 797 |
| कोकना | 361 |

भील
गरासिया
राठवा
धानका
डूंगरी भील
कोली
वारली
चौधरी (तड़वी)
रंगीन पारंपरिक वस्त्र
लोकनृत्य और लोकगीत
मेलों और हाटों की परंपरा
सामुदायिक सहयोग
आश्रम शालाएँ
एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय
छात्रवृत्ति योजनाएँ
डिजिटल शिक्षा की शुरुआत
चुनौतियाँ: पलायन, गरीबी और मातृभाषा में शिक्षण की कमी।
प्रश्न 1: गुजरात का सबसे प्रसिद्ध आदिवासी उत्सव कौन‑सा है?
उत्तर: भगोरिया हाट।
प्रश्न 2: पिठोरा पेंटिंग किस जनजाति से जुड़ी है?
उत्तर: राठवा जनजाति।
ओडिशा की लगभग 23% जनसंख्या अनुसूचित जनजातियों से संबंधित है। राज्य के कोरापुट, कालाहांडी, रायगड़ा, मलकानगिरी, मयूरभंज, सुंदरगढ़ और कंधमाल जिले जनजातीय बहुल हैं।
ओडिशा में 62 से अधिक जनजातियाँ और 13 PVTG समुदाय पाए जाते हैं, जो इसे भारत का सबसे विविध जनजातीय राज्य बनाते हैं।
ओडिशा (Odisha) की 62 से अधिक अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) की अधिकृत व प्रचलित सूची दी जा रही है।
(भारत सरकार/जनगणना में मान्य जनजातियाँ)
बाथुड़ी (Bathudi)
भुइयाँ / भूयां (Bhuyan / Bhuinya)
बिंझाल (Binjhal)
बोंडा (Bonda)
डल (Dal)
देशुआ भुमिज (Desua Bhumij)
धोंगड़ / धंगड़ा (Dhangada)
धोया (Dharua / Dhoya)
गदबा (Gadaba)
गंडा (Ganda)
गोंड (Gond)
हो (Ho)
जुआंग (Juanga)
खरिया (Kharia)
खोंड / कोंध (Khond / Kondh)
कूई (Kui)
कोल (Kol)
कोरा (Kora)
कोया (Koya)
कुतिया कोंध (Kutia Kondh)
लोधा (Lodha)
मडिया (Mirdha / Madia)
मंकिडिया (Mankidia / Mankirdia)
मटिया (Matia)
मुंडा (Munda)
मुंडारी (Mundari)
ओंरांव (Oraon)
परेंगा (Parenga)
पेंगु (Pengo)
संताल (Santhal)
सावर / सौरा (Saora / Savar)
शबर (Shabar)
सोरा (Sora)
तंतिया (Tantia)
उरांव (Uraon)
वल्मीकि (Valmiki)
भूमिज (Bhumij)
भोटड़ा / धुरुवा (Bhotada / Duruva)
दलखा (Dalakha)
देसिया खोंड (Desia Kondh)
झोरिया (Jhoria)
कंधा गोंड (Kandha Gond)
कंधा परजा (Kandha Paraja)
खोंड परजा (Khond Paraja)
किझार (Kisan)
माजही (Majhi)
मठिया (Mathia)
मल्ली (Mali)
मानसिया (Manasia)
परजा (Paraja)
रेड्डी (Reddy)
सौरा परजा (Saora Paraja)
थारुआ (Tharua)
टोडा (Toda)
बोरी (Bauri)
गडबा परजा (Gadaba Paraja)
कोया गोंड (Koya Gond)
जाटापू (Jatapu)
कोलहा (Kolha)
लांझिया साओरा (Lanjia Saora)
पहाड़िया (Paharia)
सिंगभूम भूमिज (Singhbhum Bhumij)
बंजारा (Banjara)
घसिया (Ghasia)
ओडिशा भारत का सबसे अधिक जनजातीय विविधता वाला राज्य है
यहाँ 13 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) पाए जाते हैं
कोंध, संताल, सावर, गोंड, बोंडा, जुआंग सबसे प्रमुख जनजातियाँ हैं
नियमगिरी पहाड़ियाँ (कालाहांडी और रायगड़ा)।
डोंगरिया कोंध पर्वतीय ढलानों पर छोटे गाँवों में रहते हैं। घर पत्थर, मिट्टी और लकड़ी से बने होते हैं।
कुई (कोंध भाषा समूह)।
महिलाएँ भारी चाँदी के गहने, नाक में रिंग और रंगीन वस्त्र पहनती हैं।
मिलेट्स, कंद-मूल, फल और वन उत्पाद।
नियम राजा की पूजा और प्रकृति संरक्षण की गहरी परंपरा।
पर्वतीय क्षेत्रों में स्कूल पहुँच सीमित, आश्रम शालाएँ सहारा हैं।
कंधमाल जिला।
कृषि और वनोपज पर आधारित।
बीज पर्व, देवी-देवताओं की पूजा।
साओरा पेंटिंग – आत्मा और पूर्वजों से संवाद की कला।
गंजाम और रायगड़ा।
साओरा (मुण्डारी समूह)।
मलकानगिरी की पहाड़ियाँ।
अत्यंत पारंपरिक और आत्मनिर्भर।
महिलाएँ मनके, गले के भारी हार और न्यून वस्त्र पहनती हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा की गंभीर कमी।
कोरापुट जिला।
डेमसा नृत्य, सामूहिक विवाह परंपरा।
प्राचीन जनजातीय समुदाय।
केओंझर और मयूरभंज।
वन-आधारित और झूम कृषि।
कोरापुट और मलकानगिरी।
कृषि और शिल्प।
ओडिशा–आंध्र सीमा क्षेत्र।
बीज पूजा और लोकगीत।
पर्वतीय और वन-आधारित जीवन
प्रकृति और पूर्वज पूजा
अनूठी चित्रकला और शिल्प
मजबूत सामुदायिक संरचना
आश्रम शालाएँ
एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय
मातृभाषा आधारित शिक्षा (MTB-MLE)
छात्रवृत्ति योजनाएँ
चुनौतियाँ: दुर्गम भूगोल, गरीबी और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी।
ओडिशा की जनजातियाँ भारत की सांस्कृतिक और जैव-विविधता की संरक्षक हैं। शिक्षा और आजीविका के साथ-साथ सांस्कृतिक संरक्षण इनके सतत विकास की कुंजी है।
प्रश्न 1: ओडिशा में सबसे अधिक जनजातियाँ किस जिले में हैं?
उत्तर: कोरापुट जिला।
प्रश्न 2: ओडिशा की प्रमुख PVTG जनजातियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर: डोंगरिया कोंध, बोंडा और जुआंग।