झारखंड की जनजातियाँ : पूरी सूची, जनसंख्या, निवास जिले, संस्कृति, बोली और नृत्य

 झारखंड की जनजातियाँ: पूरी सूची, जनसंख्या, निवास जिले, संस्कृति, बोली और नृत्य

  • झारखंड की जनजातियों की सूची
  • झारखंड की 32 जनजातियाँ
  • Jharkhand Tribes List
  • Jharkhand ST List
  • झारखंड की अनुसूचित जनजातियाँ
  • झारखंड की जनजातियों की जनसंख्या
  • झारखंड की आदिवासी संस्कृति
  • झारखंड की जनजातियों की भाषा
  • झारखंड की PVTG जनजातियाँ
  • Jharkhand Tribal Culture
  • 1. प्रस्तावना

    झारखंड भारत का एक प्रमुख जनजातीय राज्य है। "झारखंड" शब्द का अर्थ है "झाड़ियों या वनों का प्रदेश"। यह राज्य अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक जीवन शैली के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है।

    भारत के संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत झारखंड की अनेक जनजातियों को अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe - ST) का दर्जा प्राप्त है। राज्य की लगभग 26 प्रतिशत से अधिक आबादी अनुसूचित जनजातियों की है। इन जनजातियों की अपनी अलग भाषा, संस्कृति, लोकनृत्य, त्योहार, सामाजिक व्यवस्था और धार्मिक परंपराएँ हैं।

    झारखंड में कुल 32 अनुसूचित जनजातियाँ अधिसूचित हैं, जिनमें से 8 जनजातियाँ विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG - Particularly Vulnerable Tribal Group) की श्रेणी में आती हैं।

    झारखंड की प्रमुख जनजातियों में संथाल, मुंडा, उरांव, हो, खड़िया, भूमिज, असुर, बिरहोर, माल पहाड़िया आदि शामिल हैं। इन जनजातियों ने राज्य के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन, लोक संस्कृति तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


    झारखंड की सभी अनुसूचित जनजातियों की सूची

    1. असुर
    2. बैगा
    3. बंजारा
    4. बथुड़ी
    5. बेदिया
    6. बिंझिया
    7. बिरहोर
    8. बिरजिया
    9. चेरो
    10. चिक बड़ाईक
    11. गोंड
    12. गोड़ैत
    13. हो
    14. कंवर
    15. करमाली
    16. खड़िया
    17. खरवार
    18. खोंड
    19. किसान
    20. कोल
    21. कोरा
    22. कोरवा
    23. लोहरा
    24. महली
    25. माल पहाड़िया
    26. मुंडा
    27. उरांव (ओरांव)
    28. परहैया
    29. संथाल
    30. सौरिया पहाड़िया
    31. सावर (सबर)
    32. भूमिज

     झारखंड की प्रत्येक जनजाति का सामान्य परिचय

    1. असुर जनजाति

    परिचय

    असुर झारखंड की सबसे प्राचीन जनजातियों में से एक है। यह अपनी पारंपरिक लौह गलाने (Iron Smelting) की कला के लिए प्रसिद्ध रही है और इसे PVTG श्रेणी में रखा गया है।

    जनसंख्या

    लगभग 22,000–25,000 (अनुमानित)

    निवास जिला

    गुमला, लातेहार, लोहरदगा, पलामू

    संस्कृति एवं परम्परा

    • सरना धर्म का पालन
    • प्रकृति पूजा
    • सामुदायिक जीवन व्यवस्था
    • पारंपरिक कृषि

    बोली

    असुरी भाषा (मुंडा भाषा परिवार)

    प्रमुख नृत्य

    • करमा नृत्य
    • सरहुल नृत्य

    2. बैगा जनजाति

    परिचय

    बैगा जनजाति अपनी पारंपरिक वन संस्कृति और औषधीय ज्ञान के लिए प्रसिद्ध है।

    जनसंख्या

    बहुत कम संख्या में

    निवास जिला

    गढ़वा, पलामू

    संस्कृति एवं परम्परा

    • वन आधारित जीवन
    • जड़ी-बूटी चिकित्सा
    • प्रकृति पूजा

    बोली

    बैगानी एवं स्थानीय हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    बैगा लोकनृत्य


    3. बंजारा जनजाति

    परिचय

    बंजारा जनजाति ऐतिहासिक रूप से घुमंतू व्यापारी समुदाय रही है।

    जनसंख्या

    सीमित

    निवास जिला

    रांची, बोकारो, धनबाद

    संस्कृति एवं परम्परा

    • रंग-बिरंगे वस्त्र
    • लोकगीत एवं लोककथाएँ
    • पारंपरिक व्यापार

    बोली

    गोर बोली (लंबाड़ी)

    प्रमुख नृत्य

    लंबाड़ी नृत्य


    4. बथुड़ी जनजाति

    परिचय

    बथुड़ी जनजाति मुख्यतः झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास करती है।

    जनसंख्या

    कम

    निवास जिला

    पूर्वी सिंहभूम

    संस्कृति एवं परम्परा

    • कृषि आधारित जीवन
    • सामुदायिक त्योहार

    बोली

    ओड़िया मिश्रित स्थानीय भाषा

    प्रमुख नृत्य

    करमा नृत्य


    5. बेदिया जनजाति

    परिचय

    बेदिया जनजाति मुख्यतः कृषि एवं श्रम कार्य से जुड़ी हुई है।

    जनसंख्या

    मध्यम

    निवास जिला

    रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो

    संस्कृति एवं परम्परा

    • सरहुल पर्व
    • करमा उत्सव
    • लोक संगीत

    बोली

    नागपुरी

    प्रमुख नृत्य

    झूमर


    6. बिंझिया जनजाति

    परिचय

    बिंझिया जनजाति झारखंड की छोटी जनजातियों में शामिल है।

    जनसंख्या

    कम

    निवास जिला

    गुमला, सिमडेगा

    संस्कृति एवं परम्परा

    • कृषि
    • वनोपज संग्रह
    • सामुदायिक जीवन

    बोली

    सदरी

    प्रमुख नृत्य

    करमा


    7. बिरहोर जनजाति (PVTG)

    परिचय

    बिरहोर जनजाति पारंपरिक रूप से शिकार एवं वन संसाधनों पर निर्भर रही है।

    जनसंख्या

    लगभग 10,000 के आसपास

    निवास जिला

    हजारीबाग, चतरा, रामगढ़, लातेहार

    संस्कृति एवं परम्परा

    • जंगल आधारित जीवन
    • रस्सी बनाने की पारंपरिक कला
    • प्रकृति पूजा

    बोली

    बिरहोरी

    प्रमुख नृत्य

    सामूहिक लोकनृत्य


    8. बिरजिया जनजाति (PVTG)

    परिचय

    बिरजिया झारखंड की अत्यंत लघु जनजातियों में से एक है।

    जनसंख्या

    बहुत कम

    निवास जिला

    गुमला, लातेहार

    संस्कृति एवं परम्परा

    • जंगल आधारित जीवन
    • सामूहिक सामाजिक व्यवस्था

    बोली

    बिरजिया

    प्रमुख नृत्य

    करमा

    9. चेरो जनजाति

    परिचय

    चेरो जनजाति झारखंड की प्राचीन जनजातियों में से एक मानी जाती है। ऐतिहासिक रूप से चेरो समुदाय का पलामू क्षेत्र में महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव रहा है। मध्यकाल में चेरो राजवंश ने पलामू क्षेत्र पर शासन किया था। वर्तमान में यह जनजाति मुख्य रूप से कृषि एवं पशुपालन पर निर्भर है।

    जनसंख्या

    झारखंड में चेरो जनजाति की जनसंख्या लगभग 95 हजार से 1 लाख के बीच मानी जाती है।

    निवास जिला

    • पलामू
    • गढ़वा
    • लातेहार
    • चतरा

    संस्कृति एवं परम्परा

    • सरना एवं प्रकृति पूजा की परंपरा
    • सामूहिक ग्राम व्यवस्था
    • करमा, सरहुल एवं फसल उत्सव का आयोजन
    • पारंपरिक विवाह एवं लोकगीतों की समृद्ध परंपरा

    बोली

    • नागपुरी
    • भोजपुरी
    • हिंदी
    • स्थानीय सदरी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा नृत्य
    • झूमर नृत्य

    10. चिक बड़ाईक जनजाति

    परिचय

    चिक बड़ाईक जनजाति पारंपरिक रूप से बुनकर (Weaver) समुदाय के रूप में प्रसिद्ध है। यह जनजाति अपने हस्तनिर्मित वस्त्रों एवं पारंपरिक कपड़ा निर्माण कला के लिए जानी जाती है।

    जनसंख्या

    लगभग 55 हजार से 60 हजार

    निवास जिला

    • रांची
    • खूंटी
    • गुमला
    • लोहरदगा
    • सिमडेगा

    संस्कृति एवं परम्परा

    • पारंपरिक हथकरघा उद्योग
    • सरहुल एवं करमा पर्व का उत्सव
    • सामुदायिक जीवन एवं लोकगीतों की समृद्ध परंपरा

    बोली

    • नागपुरी
    • सदरी
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • झूमर
    • करमा नृत्य

    11. गोंड जनजाति  :- विस्तार से पढ़े 

    परिचय

    गोंड भारत की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक है। झारखंड में इनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन पलामू प्रमंडल में इनका अच्छा निवास पाया जाता है। गोंड समुदाय अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति एवं प्रकृति पूजा के लिए प्रसिद्ध है।

    जनसंख्या

    लगभग 50 हजार के आसपास

    निवास जिला

    • पलामू
    • गढ़वा
    • लातेहार

    संस्कृति एवं परम्परा

    • बड़ादेव एवं प्रकृति पूजा
    • कृषि एवं वनोपज आधारित जीवन
    • सामूहिक त्योहार एवं लोकगीत

    बोली

    • गोंडी
    • हिंदी
    • स्थानीय बोलियाँ

    प्रमुख नृत्य

    • सेल नृत्य
    • करमा नृत्य

    12. गोड़ैत जनजाति

    परिचय

    गोड़ैत जनजाति परंपरागत रूप से ग्राम प्रहरी एवं संदेशवाहक के रूप में कार्य करती थी। वर्तमान में अधिकांश परिवार कृषि एवं मजदूरी से जुड़े हुए हैं।

    जनसंख्या

    लगभग 15 हजार से 20 हजार

    निवास जिला

    • रांची
    • गुमला
    • खूंटी
    • लोहरदगा

    संस्कृति एवं परम्परा

    • सरना धर्म का पालन
    • प्रकृति पूजा
    • सामुदायिक सामाजिक व्यवस्था

    बोली

    • नागपुरी
    • सदरी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा
    • झूमर

    13. हो जनजाति

    परिचय

    हो जनजाति झारखंड की प्रमुख एवं समृद्ध जनजातियों में से एक है। "हो" शब्द का अर्थ उनकी भाषा में "मनुष्य" होता है। यह जनजाति अपनी विशिष्ट सामाजिक व्यवस्था, लोक संस्कृति और सामुदायिक जीवन के लिए प्रसिद्ध है।

    जनसंख्या

    लगभग 9.5 लाख से अधिक, जो झारखंड की प्रमुख जनजातीय आबादी में शामिल है।

    निवास जिला

    • पश्चिमी सिंहभूम
    • पूर्वी सिंहभूम
    • सरायकेला-खरसावां

    संस्कृति एवं परम्परा

    • मागे परब
    • बा परब
    • जोमनामा उत्सव
    • सरना धर्म एवं प्रकृति पूजा
    • सामूहिक नृत्य एवं लोकसंगीत

    बोली

    • हो भाषा (ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा परिवार)
    • हिंदी
    • ओड़िया (कुछ क्षेत्रों में)

    प्रमुख नृत्य

    • मागे नृत्य
    • बा नृत्य
    • करमा नृत्य

    14. कंवर जनजाति :- विस्तार से पढ़े 

    परिचय

    कंवर जनजाति मुख्य रूप से कृषि एवं पशुपालन से जुड़ी हुई है। झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में इनका निवास पाया जाता है।

    जनसंख्या

    लगभग 20 हजार से कम

    निवास जिला

    • पलामू
    • गढ़वा
    • लातेहार

    संस्कृति एवं परम्परा

    • प्रकृति पूजा
    • कृषि आधारित जीवन
    • सामूहिक ग्राम व्यवस्था

    बोली

    • कंवर
    • हिंदी
    • स्थानीय सदरी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा
    • झूमर

    15. करमाली जनजाति

    परिचय

    करमाली जनजाति पारंपरिक रूप से लोहे के औजार बनाने में दक्ष मानी जाती है। यह जनजाति ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।

    जनसंख्या

    लगभग 65 हजार से 70 हजार

    निवास जिला

    • रांची
    • बोकारो
    • रामगढ़
    • हजारीबाग

    संस्कृति एवं परम्परा

    • लौह शिल्पकला
    • करमा एवं सरहुल पर्व
    • सामुदायिक जीवन

    बोली

    • नागपुरी
    • सदरी
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा
    • झूमर

    16. खड़िया जनजाति

    परिचय

    खड़िया जनजाति झारखंड की प्रमुख जनजातियों में से एक है। इसके तीन प्रमुख उपसमूह—दूध खड़िया, ढेलकी खड़िया और पहाड़ी खड़िया—प्रसिद्ध हैं। पहाड़ी खड़िया को PVTG श्रेणी में शामिल किया गया है।

    जनसंख्या

    लगभग 2.5 लाख से अधिक

    निवास जिला

    • सिमडेगा
    • गुमला
    • रांची
    • खूंटी

    संस्कृति एवं परम्परा

    • सरना धर्म
    • सरहुल एवं करमा पर्व
    • कृषि एवं वनोपज आधारित जीवन
    • पारंपरिक लोकगीत

    बोली

    • खड़िया भाषा
    • सदरी
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा नृत्य
    • सरहुल नृत्य
    • खड़िया लोकनृत्य

    17. खरवार जनजाति

    परिचय

    खरवार जनजाति झारखंड की प्राचीन जनजातियों में से एक है। इस जनजाति का इतिहास रोहतास और पलामू क्षेत्र के प्राचीन शासकों से भी जुड़ा माना जाता है। वर्तमान में खरवार समुदाय मुख्य रूप से कृषि, वनोपज संग्रह एवं पशुपालन पर निर्भर है। यह समुदाय अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और सामुदायिक जीवन के लिए प्रसिद्ध है।

    जनसंख्या

    झारखंड में अनुमानित जनसंख्या लगभग 2.5 से 3 लाख के बीच है।

    निवास जिला

    • पलामू
    • गढ़वा
    • लातेहार
    • चतरा
    • लोहरदगा

    संस्कृति एवं परम्परा

    • सरना धर्म एवं प्रकृति पूजा
    • करमा, सरहुल एवं सोहराय पर्व का आयोजन
    • सामूहिक विवाह एवं लोकगीतों की परंपरा
    • कृषि आधारित सामाजिक व्यवस्था

    बोली

    • खरवारी
    • नागपुरी
    • हिंदी
    • सदरी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा नृत्य
    • झूमर नृत्य
    • सरहुल नृत्य

    18. खोंड (कोंध) जनजाति

    परिचय

    खोंड या कोंध जनजाति मुख्य रूप से ओडिशा और झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास करती है। यह जनजाति प्रकृति संरक्षण, पारंपरिक कृषि और सामुदायिक जीवन के लिए जानी जाती है।

    जनसंख्या

    झारखंड में जनसंख्या अपेक्षाकृत कम है।

    निवास जिला

    • पूर्वी सिंहभूम
    • पश्चिमी सिंहभूम
    • सरायकेला-खरसावां

    संस्कृति एवं परम्परा

    • धरती माता एवं प्रकृति पूजा
    • सामुदायिक कृषि व्यवस्था
    • पारंपरिक लोकगीत एवं लोककथाएँ
    • पर्व-त्योहारों में सामूहिक सहभागिता

    बोली

    • कुई (Kui)
    • ओड़िया
    • स्थानीय हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • मेरिया नृत्य
    • करमा नृत्य

    19. किसान जनजाति

    परिचय

    किसान जनजाति मुख्य रूप से कृषि कार्य से जुड़ी हुई है। यह जनजाति अपने मेहनती स्वभाव एवं ग्रामीण जीवन शैली के लिए जानी जाती है।

    जनसंख्या

    झारखंड में लगभग 60 हजार से अधिक

    निवास जिला

    • गुमला
    • सिमडेगा
    • रांची
    • लोहरदगा

    संस्कृति एवं परम्परा

    • सरना धर्म का पालन
    • कृषि एवं पशुपालन प्रमुख व्यवसाय
    • करमा, सरहुल एवं सोहराय पर्व का आयोजन

    बोली

    • सदरी
    • नागपुरी
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा नृत्य
    • झूमर

    20. कोल जनजाति

    परिचय

    कोल जनजाति भारत की प्राचीन आदिवासी जनजातियों में गिनी जाती है। झारखंड में इनकी संख्या सीमित है और अधिकांश परिवार कृषि एवं मजदूरी से जुड़े हुए हैं।

    जनसंख्या

    अनुमानित 40 हजार से अधिक

    निवास जिला

    • पलामू
    • गढ़वा
    • चतरा
    • लातेहार

    संस्कृति एवं परम्परा

    • प्रकृति पूजा
    • सामुदायिक जीवन व्यवस्था
    • पारंपरिक लोकगीत एवं लोककथाएँ
    • कृषि आधारित अर्थव्यवस्था

    बोली

    • हिंदी
    • स्थानीय सदरी
    • नागपुरी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा
    • झूमर

    21. कोरा जनजाति

    परिचय

    कोरा जनजाति झारखंड की एक महत्वपूर्ण अनुसूचित जनजाति है। परंपरागत रूप से यह समुदाय मिट्टी के कार्य, कृषि एवं श्रम कार्यों से जुड़ा रहा है।

    जनसंख्या

    लगभग 35 हजार से अधिक

    निवास जिला

    • धनबाद
    • बोकारो
    • गिरिडीह
    • हजारीबाग

    संस्कृति एवं परम्परा

    • सरहुल एवं करमा पर्व
    • सामूहिक सामाजिक व्यवस्था
    • लोकगीत एवं पारंपरिक रीति-रिवाज

    बोली

    • कोरा
    • नागपुरी
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • झूमर
    • करमा

    22. कोरवा जनजाति (PVTG)

    परिचय

    कोरवा जनजाति झारखंड की विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) में शामिल है। यह समुदाय लंबे समय तक जंगलों एवं पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करता रहा है और पारंपरिक जीवन शैली को आज भी संरक्षित किए हुए है।

    जनसंख्या

    लगभग 35 हजार से अधिक

    निवास जिला

    • गढ़वा
    • लातेहार
    • पलामू

    संस्कृति एवं परम्परा

    • वन आधारित जीवन
    • प्रकृति पूजा
    • शिकार एवं वनोपज संग्रह की परंपरा
    • सामुदायिक सामाजिक व्यवस्था

    बोली

    • कोरवा भाषा
    • सदरी
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा नृत्य
    • पारंपरिक सामूहिक लोकनृत्य

    23. लोहरा जनजाति

    परिचय

    लोहरा जनजाति पारंपरिक रूप से लोहे के औजार बनाने में दक्ष रही है। ग्रामीण समाज में कृषि उपकरणों के निर्माण में इस समुदाय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इनके नाम से ही झारखंड का लोहरदगा जिला भी जुड़ा माना जाता है।

    जनसंख्या

    लगभग 2 लाख से अधिक

    निवास जिला

    • लोहरदगा
    • रांची
    • गुमला
    • खूंटी
    • सिमडेगा

    संस्कृति एवं परम्परा

    • लौह शिल्पकला
    • सरहुल, करमा एवं सोहराय पर्व
    • सामुदायिक जीवन एवं लोकसंगीत
    • पारंपरिक हस्तकला

    बोली

    • नागपुरी
    • सदरी
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • झूमर
    • करमा
    • सरहुल नृत्य

    24. महली जनजाति

    परिचय

    महली जनजाति अपनी उत्कृष्ट बाँस शिल्प कला और हस्तनिर्मित टोकरी, सूप, डलिया एवं घरेलू उपयोग की वस्तुओं के निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। यह जनजाति झारखंड की पारंपरिक हस्तशिल्प संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    जनसंख्या

    लगभग 1.5 लाख के आसपास

    निवास जिला

    • रांची
    • खूंटी
    • गुमला
    • लोहरदगा
    • सिमडेगा
    • पश्चिमी सिंहभूम

    संस्कृति एवं परम्परा

    • बाँस शिल्प एवं हस्तकला
    • सरहुल, करमा और सोहराय पर्व
    • सामुदायिक सहयोग की परंपरा
    • लोकगीत एवं लोकसंगीत

    बोली

    • नागपुरी
    • सदरी
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा नृत्य
    • झूमर
    • सरहुल नृत्य

    25. माल पहाड़िया जनजाति (PVTG)

    परिचय

    माल पहाड़िया जनजाति झारखंड की प्राचीन एवं विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) में शामिल है। यह समुदाय मुख्यतः संथाल परगना के राजमहल पर्वतीय क्षेत्रों में निवास करता है। माल पहाड़िया अपनी विशिष्ट संस्कृति, पारंपरिक जीवन शैली एवं प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण संबंध के लिए प्रसिद्ध है।

    जनसंख्या

    भारत की जनगणना 2011 के अनुसार झारखंड में माल पहाड़िया जनजाति की जनसंख्या लगभग 1.35 लाख है।

    निवास जिला

    • साहिबगंज
    • पाकुड़
    • दुमका
    • गोड्डा

    संस्कृति एवं परम्परा

    • प्रकृति एवं पूर्वजों की पूजा
    • पारंपरिक कृषि एवं वनोपज संग्रह
    • सामुदायिक जीवन एवं ग्राम सभा की परंपरा
    • सोहराय एवं स्थानीय पर्वों का उत्सव

    बोली

    • मालतो (माल्टो)
    • हिंदी
    • संथाली (कुछ क्षेत्रों में)

    प्रमुख नृत्य

    • माल पहाड़िया लोकनृत्य
    • करमा नृत्य

    26. मुंडा जनजाति

    परिचय

    मुंडा जनजाति झारखंड की सबसे प्रमुख एवं ऐतिहासिक जनजातियों में से एक है। इस समुदाय ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसमें भगवान बिरसा मुंडा का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। मुंडा समाज अपनी संगठित सामाजिक व्यवस्था और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है।

    जनसंख्या

    जनगणना 2011 के अनुसार झारखंड में मुंडा जनजाति की जनसंख्या लगभग 12 लाख है।

    निवास जिला

    • रांची
    • खूंटी
    • गुमला
    • सिमडेगा
    • लोहरदगा
    • पश्चिमी सिंहभूम

    संस्कृति एवं परम्परा

    • सरना धर्म एवं प्रकृति पूजा
    • सरहुल, करमा, फागु एवं सोहराय पर्व
    • पारंपरिक "मुंडा-मांकी" सामाजिक व्यवस्था
    • सामूहिक नृत्य एवं लोकसंगीत

    बोली

    • मुंडारी
    • नागपुरी
    • सदरी
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • सरहुल नृत्य
    • करमा नृत्य
    • जदुर नृत्य

    27. उरांव (ओरांव/कुड़ुख) जनजाति

    परिचय

    उरांव, जिन्हें कुड़ुख भी कहा जाता है, झारखंड की प्रमुख जनजातियों में से एक हैं। यह समुदाय कृषि, सामुदायिक संगठन एवं लोकसंस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। उरांव समाज में पारंपरिक "परहा पंचायत" व्यवस्था का विशेष महत्व है।

    जनसंख्या

    जनगणना 2011 के अनुसार झारखंड में उरांव जनजाति की जनसंख्या लगभग 17 लाख है।

    निवास जिला

    • गुमला
    • लोहरदगा
    • रांची
    • सिमडेगा
    • लातेहार
    • खूंटी

    संस्कृति एवं परम्परा

    • सरना धर्म
    • करमा, सरहुल एवं खद्दी पर्व
    • परहा पंचायत व्यवस्था
    • लोकगीत एवं लोकनृत्य की समृद्ध परंपरा

    बोली

    • कुड़ुख
    • सदरी
    • नागपुरी
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा नृत्य
    • सरहुल नृत्य
    • झूमर

    28. परहैया जनजाति (PVTG)

    परिचय

    परहैया जनजाति झारखंड की विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) में शामिल है। यह समुदाय मुख्यतः पहाड़ी एवं वन क्षेत्रों में निवास करता है तथा पारंपरिक रूप से शिकार, वनोपज संग्रह एवं लघु कृषि पर निर्भर रहा है।

    जनसंख्या

    जनगणना 2011 के अनुसार लगभग 25 हजार

    निवास जिला

    • पलामू
    • लातेहार
    • गढ़वा
    • चतरा

    संस्कृति एवं परम्परा

    • प्रकृति पूजा
    • सामुदायिक जीवन
    • पारंपरिक लोककथाएँ एवं लोकगीत
    • वन संसाधनों पर आधारित जीवन शैली

    बोली

    • परहैया
    • सदरी
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा नृत्य
    • पारंपरिक सामूहिक लोकनृत्य

    29. संथाल जनजाति

    परिचय

    संथाल झारखंड की सबसे बड़ी जनजाति है। यह समुदाय अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोकसंगीत, नृत्य एवं ऐतिहासिक संथाल हूल (1855) के लिए प्रसिद्ध है। संथाल समाज में सामुदायिक जीवन और प्रकृति संरक्षण की परंपरा अत्यंत मजबूत है।

    जनसंख्या

    जनगणना 2011 के अनुसार झारखंड में लगभग 27 लाख

    निवास जिला

    • दुमका
    • जामताड़ा
    • पाकुड़
    • साहिबगंज
    • गोड्डा
    • देवघर
    • पूर्वी सिंहभूम

    संस्कृति एवं परम्परा

    • सरना धर्म
    • बाहा, सोहराय, करमा एवं ईरोक पर्व
    • मांझी-परगना सामाजिक व्यवस्था
    • लोकगीत एवं पारंपरिक वाद्य यंत्रों का विशेष महत्व

    बोली

    • संताली (ओल चिकी लिपि)
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • संथाली नृत्य
    • डोंग नृत्य
    • सोहराय नृत्य

    30. सौरिया पहाड़िया जनजाति (PVTG)

    परिचय

    सौरिया पहाड़िया जनजाति राजमहल पहाड़ियों में निवास करने वाली प्राचीन जनजाति है। यह समुदाय अपनी विशिष्ट भाषा, पारंपरिक संस्कृति एवं पहाड़ी जीवन शैली के लिए जाना जाता है।

    जनसंख्या

    जनगणना 2011 के अनुसार लगभग 46 हजार

    निवास जिला

    • साहिबगंज
    • पाकुड़
    • गोड्डा

    संस्कृति एवं परम्परा

    • प्रकृति एवं पूर्वजों की पूजा
    • झूम कृषि की परंपरा
    • सामुदायिक ग्राम व्यवस्था
    • पारंपरिक लोकगीत

    बोली

    • मालतो
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • पहाड़िया लोकनृत्य
    • करमा नृत्य

    31. सावर (सबर) जनजाति

    परिचय

    सावर या सबर जनजाति झारखंड की प्राचीन वनवासी जनजातियों में से एक है। यह समुदाय ऐतिहासिक रूप से शिकार, वनोपज संग्रह एवं हस्तशिल्प कार्यों से जुड़ा रहा है।

    जनसंख्या

    जनगणना 2011 के अनुसार लगभग 10 हजार से अधिक

    निवास जिला

    • पूर्वी सिंहभूम
    • पश्चिमी सिंहभूम
    • सरायकेला-खरसावां

    संस्कृति एवं परम्परा

    • प्रकृति पूजा
    • सामुदायिक जीवन
    • लोककथाओं एवं लोकसंगीत की समृद्ध परंपरा

    बोली

    • सवरा
    • ओड़िया
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • करमा नृत्य
    • सावर लोकनृत्य

    32. भूमिज जनजाति

    परिचय

    भूमिज जनजाति झारखंड की प्रमुख कृषक जनजातियों में से एक है। यह समुदाय मुख्य रूप से कोल जनजातीय समूह से संबंधित माना जाता है और अपनी कृषि परंपरा, सामुदायिक संस्कृति एवं लोककला के लिए प्रसिद्ध है।

    जनसंख्या

    जनगणना 2011 के अनुसार झारखंड में लगभग 2.2 लाख

    निवास जिला

    • पूर्वी सिंहभूम
    • पश्चिमी सिंहभूम
    • सरायकेला-खरसावां
    • बोकारो

    संस्कृति एवं परम्परा

    • सरना धर्म एवं प्रकृति पूजा
    • करमा, टुसू एवं सोहराय पर्व
    • कृषि आधारित जीवन शैली
    • पारंपरिक लोकगीत एवं सामूहिक उत्सव

    बोली

    • भूमिज भाषा
    • बंगाली
    • ओड़िया
    • हिंदी

    प्रमुख नृत्य

    • छऊ नृत्य
    • करमा नृत्य
    • झूमर

    झारखंड की PVTG (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह)

    1. असुर
    2. बिरहोर
    3. बिरजिया
    4. कोरवा
    5. माल पहाड़िया
    6. परहैया
    7. सौरिया पहाड़िया
    8. पहाड़ी खड़िया (खड़िया जनजाति का उपसमूह)

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

    Q1. झारखंड में कुल कितनी जनजातियाँ हैं?

    उत्तर: झारखंड में कुल 32 अनुसूचित जनजातियाँ अधिसूचित हैं।

    Q2. झारखंड की सबसे बड़ी जनजाति कौन सी है?

    उत्तर: संथाल जनजाति झारखंड की सबसे बड़ी जनजाति है।

    Q3. झारखंड में कितनी PVTG जनजातियाँ हैं?

    उत्तर: झारखंड में 8 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) हैं।

    Q4. झारखंड की प्रमुख जनजातियाँ कौन-कौन सी हैं?

    उत्तर: संथाल, मुंडा, उरांव, हो, खड़िया, भूमिज, असुर, बिरहोर आदि प्रमुख जनजातियाँ हैं।

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