आदिवासी शिक्षा

शिक्षा हमारा अधिकार और भविष्य हैं,इसे हम सब मिलकर आगे बढ़ना हैं

आदिवासी संस्कृति एवं परम्परा

आदिवासी संकृति और परम्परा आपने आप में बहुत विशाल हैं| जो आपने भागोलिक परिवेश में विशिस्ट और मधुर हैं

प्रकृति का सम्मान, विचारो की उड़न,मीठी वाणी की पहचान और कलम की ताकत से बनाये शिक्षित और जागरूक समाज

इस दुनिया में आदिवासी समाज का विशेष महत्व हैं जो प्रकृति के अनुकूल हैं

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भारत में आदिवासी शिक्षा का इतिहास और वर्तमान स्थिति

 भारत में आदिवासी शिक्षा का इतिहास और वर्तमान स्थिति (History of Tribal Education in India)

history of tribal education in India


भूमिका (Introduction)

  • भारत विविधताओं का देश है, जहाँ अनेक संस्कृतियाँ, भाषाएँ और समुदाय साथ-साथ रहते हैं। इन्हीं समुदायों में से एक हैं आदिवासी या जनजातीय समुदाय, जो भारत की प्राचीनतम सभ्यताओं में गिने जाते हैं। आदिवासी समाज ने सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जिया है।
  • लेकिन जब बात शिक्षा की आती है, तो भारत में आदिवासी शिक्षा का इतिहास संघर्ष, उपेक्षा, सुधार और धीरे-धीरे प्रगति की कहानी है। यह लेख history of tribal education in India को ऐतिहासिक काल से लेकर वर्तमान समय तक विस्तार से प्रस्तुत करता है।


आदिवासी समुदाय का संक्षिप्त परिचय

  • भारत में आदिवासी समुदाय को संविधान में अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes – ST) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 8.6% आदिवासी है

  • प्रमुख राज्य:

    • मध्य प्रदेश

    • छत्तीसगढ़

    • झारखंड

    • ओडिशा

    • महाराष्ट्र

    • राजस्थान

    • गुजरात

    • उत्तर-पूर्वी राज्य

  • आदिवासी समुदायों की अपनी अलग-अलग भाषाएँ, परंपराएँ और जीवन शैली हैं, जिसने शिक्षा के स्वरूप को भी प्रभावित किया है।

प्राचीन काल में आदिवासी शिक्षा

प्राचीन भारत में औपचारिक स्कूल या विश्वविद्यालय जैसी व्यवस्था आदिवासी समाज में नहीं थी, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि शिक्षा नहीं थी।

🔹 मौखिक और व्यावहारिक शिक्षा

  • ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूप से दिया जाता था

  • जंगल, खेती, औषधीय पौधों, शिकार और पर्यावरण का ज्ञान

  • नैतिक मूल्य, सामाजिक नियम और सांस्कृतिक परंपराएँ

👉 यह शिक्षा जीवन-केंद्रित और व्यावहारिक थी।


मध्यकालीन भारत में आदिवासी शिक्षा

मध्यकाल में भी आदिवासी समाज मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से अलग रहा।

  • गुरुकुल या मदरसे आदिवासी क्षेत्रों तक नहीं पहुँचे

  • शिक्षा सामाजिक वर्गों तक सीमित रही

  • आदिवासी समुदाय स्वशासन और पारंपरिक ज्ञान पर निर्भर रहा

इस काल में आदिवासी शिक्षा का औपचारिक विकास नहीं हो पाया।


ब्रिटिश काल में आदिवासी शिक्षा का इतिहास

British period आदिवासी शिक्षा के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था।

🔹 प्रारंभिक स्थिति

  • अंग्रेजों की शिक्षा नीति मुख्यतः शहरी और उच्च वर्ग के लिए थी

  • आदिवासी क्षेत्रों को “पिछड़ा” माना गया

  • शिक्षा की पहुँच अत्यंत सीमित रही

🔹 मिशनरियों की भूमिका

कुछ ईसाई मिशनरियों ने:

  • आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल खोले

  • साक्षरता बढ़ाने का प्रयास किया

  • लेकिन शिक्षा धर्मांतरण से जुड़ी रही

🔹 नकारात्मक प्रभाव

  • पारंपरिक आदिवासी ज्ञान की उपेक्षा

  • औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली से सांस्कृतिक दूरी

  • शिक्षा रोजगार से नहीं जुड़ पाई

👉 इस दौर में tribal education का विकास असंतुलित और सीमित रहा।


स्वतंत्रता के बाद आदिवासी शिक्षा का विकास

1947 के बाद भारत सरकार ने आदिवासी शिक्षा को सुधारने की दिशा में कदम उठाए।


संविधान में आदिवासी शिक्षा के प्रावधान

भारतीय संविधान आदिवासी समुदायों को विशेष संरक्षण प्रदान करता है।

📜 प्रमुख अनुच्छेद

  • अनुच्छेद 15(4): शैक्षणिक आरक्षण

  • अनुच्छेद 46: ST वर्ग की शैक्षणिक उन्नति

  • अनुच्छेद 275(1): आदिवासी क्षेत्रों के लिए अनुदान

👉 यह history of tribal education in India का एक मजबूत आधार बना।


सरकारी योजनाओं का इतिहास

स्वतंत्रता के बाद आदिवासी शिक्षा के लिए कई योजनाएँ शुरू की गईं।

🔹 आश्रम स्कूल

  • ग्रामीण और वन क्षेत्रों में

  • मुफ्त शिक्षा + आवास

🔹 छात्रवृत्ति योजनाएँ

  • Pre-Matric Scholarship

  • Post-Matric Scholarship

🔹 छात्रावास

  • विशेषकर आदिवासी बालिकाओं के लिए


एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS)

1997 में शुरू की गई यह योजना आदिवासी शिक्षा के इतिहास में मील का पत्थर है।

विशेषताएँ:

  • CBSE आधारित शिक्षा

  • आधुनिक सुविधाएँ

  • खेल और कौशल विकास


वर्तमान समय में आदिवासी शिक्षा की स्थिति

  • अब बात करते हैं वर्तमान पर, जो history of tribal education in India का सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
  • शिक्षा किसी भी समाज के सर्वांगीण विकास की कुंजी होती है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में आदिवासी समुदाय (Adivasi / Tribal Community) देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसके बावजूद, भारत में Adivasi Education की स्थिति आज भी कई चुनौतियों से जूझ रही है। यह लेख आदिवासी शिक्षा की वर्तमान स्थिति, समस्याएं, सरकारी प्रयास और भविष्य की दिशा पर विस्तृत प्रकाश डालता है।


साक्षरता दर

  • आदिवासी साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से कम

  • महिला साक्षरता विशेष रूप से कम


नामांकन और ड्रॉपआउट

  • प्राथमिक स्तर पर नामांकन बढ़ा है

  • लेकिन:

    • माध्यमिक

    • उच्च शिक्षा

में ड्रॉपआउट दर अभी भी अधिक है।


वर्तमान चुनौतियाँ

1️⃣ गरीबी

2️⃣ स्कूल की दूरी

3️⃣ भाषा की समस्या

4️⃣ डिजिटल सुविधाओं की कमी

5️⃣ प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव


नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और आदिवासी शिक्षा

  • NEP 2020 आदिवासी शिक्षा के लिए नई उम्मीद लेकर आई।

🔹 प्रमुख बिंदु

  • मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा

  • ड्रॉपआउट कम करने के उपाय

  • डिजिटल शिक्षा का विस्तार


NGOs और समाज की भूमिका

आदिवासी शिक्षा के वर्तमान स्वरूप में NGOs का योगदान उल्लेखनीय है।

  • गैर-औपचारिक स्कूल

  • छात्रवृत्ति

  • शिक्षक प्रशिक्षण

  • जागरूकता अभियान


आदिवासी शिक्षा का सामाजिक प्रभाव

  • रोजगार के अवसर

  • सामाजिक जागरूकता

  • महिला सशक्तिकरण

  • आत्मनिर्भरता


भविष्य की दिशा (Future of Tribal Education in India)

आने वाले वर्षों में:

  • डिजिटल और हाइब्रिड शिक्षा

  • स्थानीय भाषा आधारित पाठ्यक्रम

  • समुदाय-आधारित शिक्षा मॉडल


निष्कर्ष (Conclusion)

  • भारत में आदिवासी शिक्षा का इतिहास संघर्ष और सुधार की लंबी यात्रा है। आज स्थिति पहले से बेहतर है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
यदि सरकार, समाज और आदिवासी समुदाय मिलकर कार्य करें, तो history of tribal education in India का अगला अध्याय प्रगति, समानता और सशक्तिकरण से भरा होगा।


FAQs

Q1. भारत में आदिवासी शिक्षा की शुरुआत कब हुई?
👉 औपचारिक रूप से ब्रिटिश काल में, लेकिन पारंपरिक शिक्षा प्राचीन काल से मौजूद थी।

Q2. आदिवासी शिक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण योजना कौन-सी है?
👉 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS)।

भारत में आदिवासी शिक्षा की स्थिति, समस्याएं और समाधान


Adivasi Education: भारत में आदिवासी शिक्षा की स्थिति, समस्याएं और समाधान

Adivasi Education


आदिवासी शिक्षा क्या है?

  • आदिवासी शिक्षा (Adivasi Education) का अर्थ है भारत के आदिवासी समुदाय के बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना। शिक्षा किसी भी समाज के विकास की नींव होती है, लेकिन आज भी भारत के कई आदिवासी क्षेत्र शिक्षा से वंचित हैं।


भारत में आदिवासी शिक्षा की वर्तमान स्थिति

शिक्षा किसी भी समाज के विकास की नींव होती है, लेकिन भारत में आज भी लाखों आदिवासी बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हैं। सरकार और समाज के प्रयासों के बावजूद, आदिवासी शिक्षा में कई गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं।

  • स्कूलों की कमी

  • प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव

  • गरीबी और जागरूकता की कमी

  • भाषा की समस्या

जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं।


आदिवासी बच्चों को शिक्षा में आने वाली मुख्य समस्याएं

1️⃣ आर्थिक समस्या

अधिकतर आदिवासी परिवार गरीबी में जीवन यापन करते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है।

  • बच्चों को पढ़ाने के बजाय मजदूरी करवाई जाती है

  • किताब, कॉपी, यूनिफॉर्म खरीदना कठिन

  • फीस और यात्रा खर्च बोझ बन जाते हैं

👉 गरीबी शिक्षा छोड़ने (Dropout) का सबसे बड़ा कारण है।

2️⃣ स्कूल और संसाधनों की कमी

दूर-दराज के इलाकों में स्कूल, कॉलेज और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं नहीं होतीं,कई आदिवासी क्षेत्र पहाड़ी, जंगल और दुर्गम इलाकों में स्थित हैं।

  • पास में प्राथमिक स्कूल नहीं

  • माध्यमिक विद्यालय बहुत दूर

  • रोज़ कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है

इस कारण छोटे बच्चे स्कूल जाना छोड़ देते हैं।

3️⃣ भाषा और संस्कृति की बाधा

शिक्षा का माध्यम अलग होने के कारण बच्चों को पढ़ाई समझने में कठिनाई होती है, अधिकांश आदिवासी बच्चों की मातृभाषा अलग होती है।

  • स्कूल में पढ़ाई हिंदी/अंग्रेज़ी में

  • बच्चे समझ नहीं पाते

  • आत्मविश्वास कम हो जाता है

👉 मातृभाषा आधारित शिक्षा की कमी एक बड़ी बाधा है।

 4️⃣ प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव

आदिवासी क्षेत्रों में योग्य और स्थायी शिक्षकों की भारी कमी है।

  • शिक्षक नियमित नहीं आते

  • मल्टी-ग्रेड क्लास चलती है

  • विषय विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं

👉 इससे शिक्षा की गुणवत्ता गिर जाती है।

5️⃣ जागरूकता की कमी

अभी भी कई लोग शिक्षा के महत्व को पूरी तरह नहीं समझते, कई आदिवासी परिवार शिक्षा के दीर्घकालिक लाभ नहीं समझ पाते।

  • जल्दी कमाने पर ज़ोर

  • लड़कियों की पढ़ाई को महत्व नहीं

  • सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं

6️⃣ उच्च ड्रॉपआउट दर

आदिवासी बच्चों में स्कूल छोड़ने की दर बहुत अधिक है।
मुख्य कारण:

  • गरीबी

  • पढ़ाई में रुचि की कमी

  • घरेलू काम और मजदूरी

  • असफलता का डर

7️⃣ डिजिटल सुविधाओं की कमी

आज की शिक्षा डिजिटल हो चुकी है, लेकिन:

  • इंटरनेट नहीं

  • मोबाइल / लैपटॉप नहीं

  • ऑनलाइन क्लास तक पहुंच नहीं

👉 डिजिटल डिवाइड ने शिक्षा में असमानता बढ़ा दी है।

8️⃣ स्वास्थ्य और पोषण की समस्या

कुपोषण और खराब स्वास्थ्य का सीधा असर पढ़ाई पर पड़ता है।

  • ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते

  • बार-बार बीमार पड़ते हैं

  • स्कूल में अनुपस्थिति बढ़ती है

9️⃣ सामाजिक भेदभाव और हीन भावना

कुछ जगहों पर आज भी:

  • भेदभाव होता है

  • आदिवासी बच्चों को कमज़ोर समझा जाता है

  • आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है

👉 इससे बच्चे स्कूल से दूर हो जाते हैं।


सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रमुख आदिवासी शिक्षा योजनाएं

✅ 1. एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS)

  • आदिवासी छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवासीय स्कूल

  • CBSE पैटर्न पर शिक्षा

✅ 2. आदिवासी छात्रवृत्ति योजना

  • Pre-Matric Scholarship

  • Post-Matric Scholarship

  • Higher Education Scholarship

✅ 3. डिजिटल शिक्षा पहल

  • Online classes

  • Free study material

  • Tablet / Laptop schemes (कुछ राज्यों में)


आदिवासी शिक्षा का महत्व

🌱 सामाजिक विकास

शिक्षा से सामाजिक कुरीतियों में कमी आती है।

💼 आर्थिक सशक्तिकरण

रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर बढ़ते हैं।

👩‍🎓 महिला सशक्तिकरण

आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा से पूरे समाज का विकास होता है।

🏛️ अधिकारों की समझ

शिक्षा से आदिवासी समुदाय अपने संवैधानिक अधिकारों को समझ पाता है।


आदिवासी शिक्षा सुधार के लिए समाधान

✔️ स्थानीय भाषा में शिक्षा

✔️ ज्यादा स्कूल और कॉलेज

✔️ योग्य शिक्षकों की नियुक्ति

✔️ सरकारी योजनाओं की सही जानकारी

✔️ समाज और NGOs की भागीदारी


आदिवासी छात्रों के लिए करियर के अवसर

  • शिक्षक

  • सरकारी नौकरी

  • मेडिकल और इंजीनियरिंग

  • सामाजिक कार्यकर्ता

  • डिजिटल स्किल्स और स्टार्टअप

  • NGOs और समाज की भागीदारी


भविष्य की दिशा (Future of Adiwasi Education)

यदि सरकार, समाज और आदिवासी समुदाय मिलकर कार्य करें तो:

  • ड्रॉपआउट दर कम हो सकती है

  • उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ेगी

  • एक शिक्षित और आत्मनिर्भर आदिवासी समाज का निर्माण होगा


निष्कर्ष (Conclusion)

आदिवासी शिक्षा (Adivasi Education) भारत के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि सरकार, समाज और स्वयं आदिवासी समुदाय मिलकर प्रयास करें, तो शिक्षा के माध्यम से एक मजबूत और आत्मनिर्भर समाज बनाया जा सकता है।


FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. आदिवासी छात्रों के लिए कौन-सी स्कॉलरशिप उपलब्ध है?
👉 Pre & Post Matric Scholarship, EMRS, State Government Scholarships

Q2. क्या आदिवासी छात्रों के लिए फ्री शिक्षा है?
👉 कई सरकारी स्कूलों और योजनाओं में मुफ्त शिक्षा उपलब्ध है।

आदिवासी शिक्षा पर NGOs और समाज का योगदान

 

Adivasi Education: आदिवासी शिक्षा पर NGOs और समाज का योगदान (विस्तृत अध्ययन)

adivasi education NGO in india


भूमिका (Introduction)

भारत में आदिवासी शिक्षा (Adivasi Education) आज भी कई चुनौतियों से घिरी हुई है। सरकार के प्रयासों के बावजूद, दूरदराज और वंचित आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना आसान नहीं है। ऐसे में NGOs (गैर-सरकारी संगठन) और समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। ये संस्थाएँ ज़मीनी स्तर पर काम करके आदिवासी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।


आदिवासी शिक्षा में NGOs की भूमिका क्यों ज़रूरी है?

NGOs सरकारी तंत्र से अलग, लचीले और समुदाय-केंद्रित तरीके से काम करते हैं। वे:

  • स्थानीय समस्याओं को बेहतर समझते हैं

  • समुदाय का विश्वास जीतते हैं

  • शिक्षा को संस्कृति के साथ जोड़ते हैं

इसी कारण NGOs आदिवासी शिक्षा में सेतु (Bridge) का काम करते हैं।


NGOs द्वारा आदिवासी शिक्षा में किए जाने वाले प्रमुख कार्य

1️⃣ स्कूल तक पहुँच (Access to Education)

कई NGOs:

  • दुर्गम इलाकों में गैर-औपचारिक स्कूल चलाते हैं

  • मोबाइल स्कूल और ब्रिज कोर्स शुरू करते हैं

  • स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ते हैं


2️⃣ छात्रवृत्ति और आर्थिक सहायता

गरीबी आदिवासी शिक्षा की सबसे बड़ी बाधा है। NGOs:

  • फीस, किताब और यूनिफॉर्म में सहायता देते हैं

  • स्कॉलरशिप दिलाने में मदद करते हैं

  • शिक्षा के लिए वित्तीय मार्गदर्शन देते हैं


3️⃣ आवासीय और छात्रावास सुविधा

कई संस्थाएँ:

  • आदिवासी बच्चों के लिए छात्रावास चलाती हैं

  • सुरक्षित और अनुशासित वातावरण देती हैं

  • लड़कियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देती हैं


4️⃣ मातृभाषा आधारित शिक्षा

NGOs स्थानीय भाषा और संस्कृति को महत्व देते हैं:

  • प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में

  • स्थानीय कहानियों और उदाहरणों का उपयोग

  • बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है


5️⃣ शिक्षक प्रशिक्षण और गुणवत्ता सुधार

कुछ NGOs:

  • स्थानीय युवाओं को शिक्षक बनाते हैं

  • शिक्षकों को आधुनिक प्रशिक्षण देते हैं

  • शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हैं


आदिवासी शिक्षा में समाज की भूमिका

🔹 अभिभावकों की भागीदारी

  • बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करना

  • बाल श्रम रोकना

  • शिक्षा को प्राथमिकता देना


🔹 स्थानीय समुदाय का सहयोग

  • स्कूल प्रबंधन में भागीदारी

  • शिक्षा जागरूकता अभियान

  • सामाजिक कुरीतियों को कम करना


🔹 युवाओं और स्वयंसेवकों का योगदान

  • ट्यूशन और मार्गदर्शन

  • डिजिटल साक्षरता

  • करियर काउंसलिंग


आदिवासी शिक्षा में योगदान देने वाले प्रमुख NGOs (उदाहरण)

(आप चाहें तो राज्य अनुसार नाम जोड़ सकते हैं)

  • Pratham

  • Teach For India

  • Akshaya Patra Foundation

  • Bharat Rural Livelihood Foundation (BRLF)

  • Room to Read

👉 ये संस्थाएँ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आदिवासी शिक्षा को सशक्त कर रही हैं।


NGOs और सरकार के बीच सहयोग

जब NGOs और सरकार मिलकर काम करते हैं:

  • योजनाओं का सही क्रियान्वयन होता है

  • संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है

  • शिक्षा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है


आदिवासी शिक्षा पर समाज और NGOs के योगदान का प्रभाव

  • स्कूल नामांकन में वृद्धि

  • ड्रॉपआउट दर में कमी

  • लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा

  • समुदाय में शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच


चुनौतियाँ जो NGOs को झेलनी पड़ती हैं

  • सीमित फंड

  • दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र

  • सरकारी प्रक्रियाओं की जटिलता

  • दीर्घकालिक समर्थन की कमी


आगे की राह (Way Forward)

  • स्थानीय समुदाय को नेतृत्व देना

  • डिजिटल शिक्षा का विस्तार

  • कॉर्पोरेट (CSR) सहयोग

  • दीर्घकालिक शिक्षा मॉडल


निष्कर्ष (Conclusion)

Adivasi Education को मजबूत बनाने में NGOs और समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जहाँ सरकार की पहुँच सीमित होती है, वहाँ NGOs आशा की किरण बनकर सामने आते हैं। यदि समाज, NGOs और सरकार मिलकर कार्य करें, तो आदिवासी शिक्षा की तस्वीर पूरी तरह बदली जा सकती है।


FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. NGOs आदिवासी शिक्षा में कैसे मदद करते हैं?
👉 स्कूल, छात्रवृत्ति, छात्रावास, शिक्षक प्रशिक्षण और जागरूकता के माध्यम से।

Q2. समाज आदिवासी शिक्षा में क्या योगदान दे सकता है?
👉 जागरूकता, सहयोग, स्वयंसेवा और बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करके।