ऊराली जनजाति: इतिहास, जनसंख्या, निवास, संस्कृति, भाषा, परंपरा और जीवनशैली की संपूर्ण जानकारी
ऊराली जनजाति (Uraly Tribe) केरल की प्रमुख अनुसूचित जनजातियों में शामिल एक छोटी लेकिन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध आदिवासी समुदाय है। यह समुदाय मुख्य रूप से इडुक्की जिले में निवास करता है तथा इसकी छोटी आबादी कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों में भी पाई जाती है। केरल सरकार के आधिकारिक जनजातीय स्रोत के अनुसार ऊराली समुदाय की अपनी सामाजिक व्यवस्था, पारंपरिक कृषि पद्धतियां, लोकनृत्य और विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराएं हैं।ऊराली जनजाति का संक्षिप्त परिचय
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| जनजाति का नाम | ऊराली (Uraly) |
| अंग्रेजी नाम | Uraly Tribe |
| राज्य | केरल |
| प्रमुख निवास | इडुक्की |
| अन्य क्षेत्र | कोट्टायम एवं एर्नाकुलम |
| संवैधानिक स्थिति | अनुसूचित जनजाति (ST) |
| 2011 जनगणना जनसंख्या | 11,179 |
| पुरुष | 5,602 |
| महिला | 5,577 |
| लिंगानुपात | 996 महिलाएं/1000 पुरुष |
| साक्षरता दर | 80.1% |
| प्रमुख भाषा | मलयालम |
| प्रमुख लोकनृत्य | कंबुकली एवं चाविट्टुकली |
| प्रमुख आजीविका | कृषि, कृषि मजदूरी एवं वन-संबंधित गतिविधियां |
उपरोक्त जनसंख्या और साक्षरता संबंधी आंकड़े 2011 की जनगणना तथा केरल के KIRTADS के आधिकारिक विवरण पर आधारित हैं।
ऊराली जनजाति से संबंधित प्रमुख तथ्य
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| ऊराली किस राज्य की जनजाति है? | केरल |
| ऊराली की प्रमुख आबादी कहां है? | इडुक्की |
| 2011 में ऊराली की जनसंख्या कितनी थी? | 11,179 |
| ऊराली की साक्षरता दर कितनी थी? | 80.1% |
| ऊराली की प्रमुख भाषा क्या है? | मलयालम |
| ऊराली के प्रमुख लोकनृत्य कौन-से हैं? | कंबुकली और चाविट्टुकली |
| ऊराली की प्रमुख आजीविका क्या है? | कृषि एवं कृषि/वन आधारित कार्य |
| ऊराली किस श्रेणी में आती है? | अनुसूचित जनजाति |
| ऊराली के प्रमुख निवास जिले कौन-से हैं? | इडुक्की, कोट्टायम और एर्नाकुलम |
| ऊराली समाज की पारंपरिक सामाजिक इकाई क्या है? | कुट्टम/कुलम |
ऊराली के जनसंख्या, साक्षरता एवं अन्य सांख्यिकीय तथ्य मुख्यतः 2011 की जनगणना और संबंधित आधिकारिक स्रोतों पर आधारित हैं।
ऊराली जनजाति कौन है?
ऊराली (Uraly) केरल में निवास करने वाला एक अनुसूचित जनजाति समुदाय है। केरल की आधिकारिक अनुसूचित जनजाति सूची में ऊराली को अलग से शामिल किया गया है।
ऐतिहासिक रूप से ऊराली समुदाय का जीवन पहाड़ी और वन क्षेत्रों से जुड़ा रहा है। केरल वन विभाग के अनुसार इस समुदाय को पारंपरिक रूप से गांवों के शासक और सैनिकों से भी जोड़ा जाता है। भूमि और कृषि इनके जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
ऊराली जनजाति की जनसंख्या
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में ऊराली जनजाति की कुल आबादी 11,179 दर्ज की गई थी। इनमें:
- पुरुष – 5,602
- महिलाएं – 5,577
- लिंगानुपात – 996 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष
- साक्षरता दर – 80.1%
KIRTADS के अनुसार ऊराली समुदाय की अधिकांश आबादी केरल के इडुक्की जिले में रहती है, जबकि कोट्टायम और एर्नाकुलम में इसकी छोटी आबादी है।
परीक्षा तथ्य: ऊराली जनजाति की 2011 की जनसंख्या 11,179 है।
ऊराली जनजाति का निवास क्षेत्र
ऊराली समुदाय मुख्य रूप से केरल के पहाड़ी क्षेत्र में पाया जाता है।
प्रमुख जिले
- इडुक्की – प्रमुख केंद्र
- कोट्टायम
- एर्नाकुलम
केरल के आधिकारिक जनजातीय शोध संस्थान KIRTADS के अनुसार ऊराली समुदाय का मुख्य निवास इडुक्की जिले में है तथा कोट्टायम और एर्नाकुलम में इसकी छोटी उपस्थिति है।
ऊराली जनजाति का इतिहास और उत्पत्ति
ऊराली समुदाय के इतिहास में वन, पहाड़ी क्षेत्र और स्थानीय सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पुराने मानवशास्त्रीय अध्ययनों में ऊरालियों को त्रावणकोर के वन एवं पहाड़ी क्षेत्रों से जोड़ा गया है। भारत की 1971 की जनगणना के मानवशास्त्रीय अध्ययन में भी ऊराली समुदाय के इतिहास, उत्पत्ति, जनसंख्या, भाषा, आर्थिक जीवन, विवाह, धर्म और मनोरंजन जैसे विषयों का अध्ययन किया गया था।
केरल वन विभाग के अनुसार ऊराली समुदाय को ऐतिहासिक रूप से गांव के शासकों और सैनिकों के रूप में भी वर्णित किया गया है।
हालांकि ऊराली समुदाय की उत्पत्ति से संबंधित अलग-अलग लोककथाएं और मानवशास्त्रीय व्याख्याएं मिलती हैं, इसलिए किसी एक लोककथा को निश्चित ऐतिहासिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
ऊराली जनजाति की भाषा
ऊराली समुदाय की दैनिक सामाजिक और बाहरी संचार की भाषा मुख्य रूप से मलयालम है। केरल वन विभाग के अनुसार ऊराली लोग मलयालम बोलते और लिखते हैं तथा उनके उच्चारण में एक विशिष्ट स्थानीय प्रभाव पाया जाता है।
पुराने मानवशास्त्रीय अध्ययनों में ऊराली की स्थानीय बोली पर भी चर्चा की गई है। इसलिए ऊराली भाषा/बोली को समझने के लिए क्षेत्रीय मलयालम और समुदाय की पारंपरिक भाषायी विशेषताओं को साथ में देखना उपयोगी है।
ऊराली जनजाति की सामाजिक व्यवस्था
ऊराली समुदाय की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था में कुट्टम/कुलम (Kuttom/Kulam) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
KIRTADS के अनुसार इनके सामाजिक संगठन में लगभग आठ बहिर्विवाही कुट्टम या कुलम का उल्लेख मिलता है:
- कनकुट्टम
- वेट्टिकुट्टम
- एन्नियुट्टम
- पेरियिलाकुट्टम
- ओनकुट्टम
- तुरियाकुट्टम
- कुडियाकुट्टम
- विनावर्कुट्टम
इन सामाजिक समूहों की व्यवस्था पारंपरिक रूप से मातृवंशीय विशेषताओं से जुड़ी रही है।
ऊराली जनजाति की पारंपरिक सामाजिक नेतृत्व व्यवस्था
ऊराली समाज में पारंपरिक रूप से बुजुर्ग पुरुषों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। KIRTADS के अनुसार बाद के समय में कणिक्करण (Kanikkaran) और प्लाथी (Plathi) जैसी भूमिकाएं सामाजिक एवं धार्मिक व्यवस्था से जुड़ी रहीं।
प्लाथी जीवन-चक्र से जुड़े कुछ पारंपरिक अनुष्ठानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
ऊराली जनजाति की आजीविका
ऊराली समुदाय की पारंपरिक अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार कृषि और वन संसाधन रहा है।
इनके द्वारा उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों में शामिल हैं:
- धान
- काली मिर्च
- सुपारी
- नारियल
- टैपिओका/कसावा
KIRTADS के अनुसार ऊराली समुदाय ने अतीत में स्थानांतरित कृषि (Shifting Cultivation) भी की थी। वर्तमान में कृषि इनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ऊराली जनजाति के पारंपरिक व्यवसाय
परंपरागत रूप से ऊराली समुदाय की आर्थिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं:
- कृषि
- कृषि मजदूरी
- वन आधारित गतिविधियां
- खाद्य संग्रह
- गैर-काष्ठ वन उत्पादों का संग्रह
- स्थानीय हस्तशिल्प
- बांस/सरकंडे से वस्तुएं बनाना
केरल वन विभाग के अनुसार ऊराली महिलाओं द्वारा रीड मैट, अनाज साफ करने वाले सूप/विन्नोइंग फैन तथा टोकरियां बनाने जैसी हस्तशिल्प गतिविधियां की जाती हैं।
ऊराली जनजाति और वन
ऊराली समुदाय का पारंपरिक जीवन जंगल और भूमि से गहराई से जुड़ा रहा है। खेती के साथ वन क्षेत्र इनके लिए भोजन, प्राकृतिक संसाधन और आजीविका के महत्वपूर्ण स्रोत रहे हैं।
आज भी भूमि इनके सामाजिक और आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। केरल वन विभाग के अनुसार कई परिवारों द्वारा वन भूमि के आवंटित हिस्सों पर खेती की जाती है, हालांकि भूमि अधिकारों से जुड़े प्रश्न भी मौजूद रहे हैं।
ऊराली जनजाति के घर और रहन-सहन
ऊराली समुदाय के पारंपरिक निवास क्षेत्र पहाड़ी और वन क्षेत्रों में रहे हैं। पुराने मानवशास्त्रीय विवरणों में स्थानीय उपलब्ध सामग्री जैसे बांस, लकड़ी, सरकंडे और पत्तियों से बनाए जाने वाले घरों का उल्लेख मिलता है।
आधुनिक समय में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं के विस्तार के कारण इनके रहन-सहन में भी परिवर्तन आया है।
ऊराली जनजाति की संस्कृति और परंपरा
ऊराली समाज की संस्कृति में कृषि, जंगल, परिवार, कुल-व्यवस्था और धार्मिक विश्वासों का महत्वपूर्ण स्थान है।
इनकी संस्कृति की प्रमुख विशेषताएं हैं:
- सामुदायिक जीवन
- कृषि आधारित परंपराएं
- कुल/कुट्टम व्यवस्था
- पारंपरिक जीवन-चक्र संस्कार
- लोकनृत्य
- धार्मिक अनुष्ठान
- पूर्वजों और स्थानीय देवताओं से संबंधित मान्यताएं
ऊराली जनजाति के लोकनृत्य
ऊराली समुदाय के प्रमुख पारंपरिक लोकनृत्यों में:
1. कंबुकली (Kambukali)
2. चाविट्टुकली (Chavittukali)
का उल्लेख KIRTADS के आधिकारिक विवरण में मिलता है।
ये नृत्य ऊराली समुदाय की पारंपरिक सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
ऊराली जनजाति के धार्मिक विश्वास
आधुनिक समय में ऊराली समुदाय के धार्मिक जीवन में हिंदू धार्मिक परंपराओं के साथ स्थानीय और पारंपरिक विश्वासों का प्रभाव देखा जाता है।
केरल वन विभाग के अनुसार ऊराली समुदाय अय्यप्पन और भगवती जैसे देवी-देवताओं की पूजा करता है तथा नेडियाथु शास्ता (Nediyathu Sastha) को कुलदैवम के रूप में महत्व दिया जाता है। कृषि गतिविधियों और त्योहारों के अवसर पर पूर्वजों की स्मृति और उनसे संबंधित मान्यताओं का भी उल्लेख मिलता है।
ऊराली जनजाति के प्रमुख त्योहार
ऊराली समुदाय के वर्तमान सामाजिक जीवन में केरल के व्यापक त्योहारों का प्रभाव दिखाई देता है।
प्रमुख त्योहारों में:
- ओणम
- विशु
आदि शामिल हैं। केरल वन विभाग ने ऊराली समुदाय के संदर्भ में इन त्योहारों और पूर्वजों की मान्यताओं का उल्लेख किया है।
ऊराली जनजाति की शिक्षा
2011 की जनगणना के अनुसार ऊराली समुदाय की साक्षरता दर 80.1 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता लगभग 84 प्रतिशत और महिला साक्षरता लगभग 76 प्रतिशत के आसपास थी।
शिक्षा के विस्तार में सरकारी विद्यालयों, जनजातीय कल्याण कार्यक्रमों और आवासीय शिक्षा संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
ऊराली महिलाओं की भूमिका
ऊराली समाज में महिलाओं की भूमिका कृषि और घरेलू अर्थव्यवस्था दोनों में महत्वपूर्ण रही है।
विशेष रूप से:
- कृषि कार्य
- खाद्य प्रसंस्करण
- घरेलू कार्य
- वन संसाधनों से जुड़ी गतिविधियां
- हस्तशिल्प
- चटाई और टोकरियां बनाना
जैसी गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी का उल्लेख मिलता है। केरल वन विभाग ने ऊराली महिलाओं द्वारा रीड से चटाई, सूप और टोकरियां बनाने को विशेष हस्तशिल्प के रूप में दर्ज किया है।
ऊराली जनजाति में विवाह और पारिवारिक परंपराएं
ऊराली समाज की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था में विवाह केवल दो व्यक्तियों का संबंध नहीं बल्कि परिवार और सामाजिक समूहों से जुड़ी संस्था रही है।
पुराने मानवशास्त्रीय अध्ययनों में ऊराली समुदाय में विवाह संबंधी विनिमय परंपराओं, रिश्तेदारी और मातृवंशीय सामाजिक संगठन का उल्लेख मिलता है। समय के साथ इनमें परिवर्तन आया है।
इसलिए वर्तमान ऊराली समाज की विवाह व्यवस्था को समझते समय पारंपरिक और आधुनिक दोनों परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए।
ऊराली जनजाति का भोजन
ऊराली समुदाय का पारंपरिक भोजन स्थानीय कृषि एवं वन संसाधनों पर आधारित रहा है।
इनके भोजन में क्षेत्र और उपलब्धता के अनुसार:
- चावल
- कंद-मूल
- टैपिओका
- स्थानीय सब्जियां
- वन उत्पाद
- कृषि उत्पाद
का उपयोग किया जाता रहा है।
आधुनिक समय में बाजार और मुख्यधारा के समाज से संपर्क बढ़ने के कारण भोजन की आदतों में भी बदलाव आया है।
ऊराली जनजाति की वर्तमान स्थिति
आधुनिक समय में ऊराली समुदाय पारंपरिक कृषि और वन-आधारित जीवन के साथ-साथ शिक्षा और आधुनिक रोजगार की ओर भी बढ़ रहा है।
केरल वन विभाग के अनुसार समुदाय के कुछ लोग सरकारी कार्यालयों और निजी संस्थानों में भी रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही पारंपरिक हस्तशिल्प और कृषि अभी भी महत्वपूर्ण हैं।
ऊराली जनजाति के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले -FAQ
1. ऊराली जनजाति किस राज्य में पाई जाती है?
ऊराली जनजाति मुख्य रूप से केरल में पाई जाती है और इसकी सबसे अधिक उपस्थिति इडुक्की जिले में है।
2. ऊराली जनजाति की जनसंख्या कितनी है?
2011 की जनगणना के अनुसार ऊराली जनजाति की जनसंख्या 11,179 थी।
3. ऊराली जनजाति की भाषा क्या है?
ऊराली समुदाय मुख्य रूप से मलयालम भाषा का प्रयोग करता है। समुदाय के उच्चारण में स्थानीय विशेषताएं भी पाई जाती हैं।
4. ऊराली जनजाति के प्रमुख लोकनृत्य कौन से हैं?
कंबुकली और चाविट्टुकली ऊराली समुदाय के प्रमुख लोकनृत्य हैं।
5. ऊराली जनजाति की प्रमुख आजीविका क्या है?
कृषि, कृषि मजदूरी और वन आधारित गतिविधियां ऊराली समुदाय की प्रमुख पारंपरिक आजीविकाओं में शामिल हैं।
6. ऊराली जनजाति का मुख्य निवास जिला कौन सा है?
इडुक्की जिला ऊराली जनजाति का प्रमुख निवास क्षेत्र है।
7. ऊराली जनजाति की साक्षरता दर कितनी है?
2011 की जनगणना के अनुसार ऊराली समुदाय की साक्षरता दर 80.1% थी।
8. क्या ऊराली जनजाति अनुसूचित जनजाति है?
हाँ। ऊराली को केरल की आधिकारिक अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) सूची में शामिल किया गया है।
निष्कर्ष
ऊराली जनजाति केरल की एक महत्वपूर्ण अनुसूचित जनजाति है, जिसका पारंपरिक जीवन कृषि, वन और अपनी विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा रहा है। 2011 में इसकी जनसंख्या 11,179 दर्ज हुई थी। कंबुकली-चाविट्टुकली जैसे लोकनृत्य, कुट्टम व्यवस्था, कृषि और हस्तशिल्प इसकी सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख पहलू हैं। आधुनिक शिक्षा और रोजगार के साथ यह समुदाय अपनी पारंपरिक पहचान को बनाए रखते हुए परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
लेख में उपयोग किए गए प्रमुख स्रोत
- भारत की जनगणना 2011 – Census of India, Kerala: Scheduled Tribes की State Primary Census Abstract और A-11 संबंधित तालिकाएं।
- KIRTADS (Kerala Institute for Research, Training and Development Studies of Scheduled Castes and Scheduled Tribes) – ऊराली समुदाय का आधिकारिक परिचय, जनसंख्या, साक्षरता, सामाजिक व्यवस्था और लोकनृत्य।
- Kerala Scheduled Tribes Development Department – केरल की आधिकारिक अनुसूचित जनजाति सूची।
- Kerala Forest Department – Indigenous Communities – ऊराली समुदाय की आजीविका, भाषा, धर्म, भूमि और हस्तशिल्प संबंधी जानकारी।
- Census of India – Ethnographic Notes on Scheduled Tribes, 1971 – ऊराली समुदाय के इतिहास, भाषा, आर्थिक जीवन, सामाजिक व्यवस्था, विवाह और धार्मिक जीवन संबंधी ऐतिहासिक अध्ययन।
- Studies of Tribes in Kerala: A Trend Report – ऊराली समुदाय पर किए गए विभिन्न मानवशास्त्रीय अध्ययनों का संदर्भ।







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