बिहार की सभी जनजातियाँ: जनसंख्या, संस्कृति और परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण जानकारी

बिहार की जनजातियाँ: जनसंख्या, संस्कृति, परंपरा, रहन-सहन, खानपान, शिक्षा और व्यवसाय की पूरी जानकारी

बिहार की जनजातियाँ राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बिहार में रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदायों का इतिहास, भाषा, लोकपरंपराएँ, जीवनशैली, आजीविका और सामाजिक संरचना एक-दूसरे से काफी अलग हो सकती है।

यह लेख बिहार की जनजातियों, बिहार की अनुसूचित जनजातियों, Bihar Tribes, Bihar Tribal Population, जनजातीय संस्कृति, परंपरा, रहन-सहन, खानपान, शिक्षा और व्यवसाय को एक साथ समझने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

महत्वपूर्ण नोट: जनजातियों की संख्या और नाम लिखते समय सरकारी अधिसूचना को आधार बनाना चाहिए। Census 2011 की बिहार संबंधी ST तालिकाओं में 32 जनजातीय entries दर्ज हैं। बाद की सरकारी सूची में नाम/प्रविष्टियों में संशोधन दिखाई देता है। इसलिए इस लेख में सरकारी स्रोतों के अनुसार नामों को प्राथमिकता दी गई है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बिहार की जनजातियाँ

📚 परीक्षा एवं SEO के लिए महत्वपूर्ण विषय:
Bihar GK, Bihar General Knowledge, बिहार सामान्य ज्ञान, बिहार की जनजातियाँ, Bihar Tribes, ST in Bihar और बिहार की अनुसूचित जनजातियाँ जैसे विषय BPSC, बिहार पुलिस, शिक्षक भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उपयोगी हो सकते हैं।

📖 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न उत्तर
1. बिहार में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 2011 में कितनी थी? 13,36,573
2. 2011 में बिहार की कुल आबादी में ST का प्रतिशत कितना था? लगभग 1.28 प्रतिशत
3. बिहार की जनजातियों के आधिकारिक आंकड़ों का प्रमुख स्रोत क्या है? Census of India 2011
4. बिहार की ST जनसंख्या का जिला-वार आंकड़ा कहाँ मिलता है? Census 2011 की A-11/ST संबंधी तालिकाओं में
5. बिहार में थारू जनजाति की प्रमुख उपस्थिति किस क्षेत्र में है? पश्चिमी चंपारण क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
📌 परीक्षा नोट:
जनसंख्या से संबंधित प्रश्नों में दिए गए आंकड़े Census of India 2011 पर आधारित हैं। परीक्षा की तैयारी के दौरान नवीनतम सरकारी अधिसूचनाओं एवं आधिकारिक स्रोतों से सूची और आंकड़ों का मिलान करना उपयोगी रहेगा।



बिहार में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या

जनगणना 2011 के अनुसार बिहार में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 13,36,573 थी। यह बिहार की कुल जनसंख्या का लगभग 1.28 प्रतिशत थी। बिहार सरकार के सांख्यिकीय दस्तावेज में भी 2011 के लिए ST आबादी 13,36,573 और राज्य की कुल आबादी में लगभग 1.3 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया है।

जनगणना के अनुसार बिहार की जनजातीय आबादी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता था। जनजातीय आबादी का वितरण पूरे बिहार में समान नहीं है। पश्चिमी चंपारण और कुछ सीमावर्ती/दक्षिणी क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों की उल्लेखनीय उपस्थिति मिलती है। Census 2011 की जिला-वार ST तालिका प्रत्येक जिले और जनजाति के अनुसार आबादी का विवरण उपलब्ध कराती है।

बिहार की जनजातियों की सूची

📚 बिहार की अनुसूचित जनजातियाँ:
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा उपलब्ध बिहार की अनुसूचित जनजातियों की सूची में विभिन्न समुदाय एवं समूह शामिल हैं। सरकारी सूची में कुछ समुदायों को एक ही प्रविष्टि में संबद्ध नामों के साथ रखा गया है।
क्र. बिहार की प्रमुख अनुसूचित जनजाति
1 असुर, अगरिया
2 बैगा
3 बनजारा
4 बठुडी
5 बेदिया
6 बिंझिया
7 बिरहोर
8 बिरजिया
9 चेरो
10 चिक बड़ाइक
11 गोंड
12 गोराइत
13 हो
14 करमाली
15 खरिया — ढेलकी खड़िया, दूध खड़िया, हिल खड़िया
16 खरवार
17 खोंड
18 किसान, नागेसिया
19 कोरा, मुड़ी-कोरा
20 कोरवा
21 लोहरा/लोहार
22 माहली
23 माल पहाड़िया, कुमारभाग पहाड़िया
24 मुंडा, पातार/तमारिया
25 उरांव, धांगड़ उरांव
26 परहैया
27 संताल
28 सौरिया पहाड़िया
29 सावर
30 भूमिज
31 कवार
32 कोल 
33 पुरान
📌 महत्वपूर्ण नोट:
सरकारी सूची में प्रविष्टियों की स्थिति और नाम समय के साथ संशोधित हो सकते हैं। 2025 की जनजातीय कार्य मंत्रालय की सूची में बिहार के लिए “Omitted” प्रविष्टि भी दिखाई देती है। इसलिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए नवीनतम आधिकारिक सूची और संबंधित मूल अधिसूचना को देखना उचित है।

बिहार की जनजाति जनसंख्या - प्रमुख तथ्य

📊 बिहार की जनजातीय जनसंख्या:
बिहार में अनुसूचित जनजाति (ST) की जनसंख्या से संबंधित प्रमुख तथ्य नीचे दिए गए हैं। ये आंकड़े जनगणना 2011 पर आधारित हैं।
तथ्य जानकारी
📅 जनगणना वर्ष 2011
👥 बिहार की ST जनसंख्या 13,36,573
📈 कुल आबादी में ST हिस्सा लगभग 1.28%
📍 प्रमुख जनजातीय क्षेत्र पश्चिमी चंपारण सहित विभिन्न क्षेत्र
📚 प्रमुख स्रोत Census of India 2011
🗓️ नवीनतम जनगणना उपलब्धता 2011 के आंकड़े
📌 महत्वपूर्ण नोट:
ऊपर दिए गए जनसंख्या संबंधी आंकड़े जनगणना 2011 पर आधारित हैं। इन्हें वर्तमान वर्ष की जनजातीय जनसंख्या के रूप में नहीं समझना चाहिए।

बिहार की प्रमुख जनजातियाँ एवं उनके संबंध में जानकारी 

बिहार की सभी जनजातियाँ अपनी-अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सामाजिक विशेषताओं के कारण महत्वपूर्ण हैं। इनमें संताल, उरांव, खरवार, गोंड, थारू, माल पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया, मुंडा, हो, चेरो, खरिया, कोरवा और परहैया जैसे समुदाय विशेष रूप से अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।


1. संताल जनजाति

संताल जनजाति पूर्वी भारत की प्रमुख आदिवासी समुदायों में से एक है। बिहार में भी संताल समुदाय की उपस्थिति रही है और Census 2011 की बिहार ST तालिका में संताल को अलग जनजातीय प्रविष्टि के रूप में दर्ज किया गया है।

संस्कृति और परंपरा

संताल समाज में सामुदायिक जीवन, लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक सामाजिक संस्थाओं का विशेष महत्व है। संताली भाषा, लोककला और पारंपरिक नृत्य इसकी सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख हिस्से हैं।

संताल समाज में प्रकृति, कृषि और सामुदायिक संबंधों का दैनिक जीवन से गहरा संबंध रहा है।

व्यवसाय

परंपरागत रूप से कृषि, कृषि मजदूरी, वन आधारित गतिविधियाँ और स्थानीय श्रम आजीविका के महत्वपूर्ण साधन रहे हैं। वर्तमान समय में शिक्षा, सरकारी सेवा, व्यापार, निजी रोजगार और अन्य आधुनिक व्यवसायों में भी लोगों की भागीदारी बढ़ी है।


2. उरांव जनजाति

उरांव जनजाति बिहार सहित झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाला प्रमुख आदिवासी समुदाय है। Census 2011 में बिहार के लिए “Oraon, Dhangar (Oraon)” के रूप में प्रविष्टि दर्ज है।

भाषा

उरांव समाज की प्रमुख पारंपरिक भाषा कुड़ुख है। इसके अतिरिक्त क्षेत्र के अनुसार हिंदी तथा अन्य स्थानीय भाषाओं का भी प्रयोग होता है।

संस्कृति

उरांव समाज में लोकगीत, नृत्य, सामुदायिक उत्सव और कृषि आधारित जीवन का महत्वपूर्ण स्थान है।

रहन-सहन

ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से मिट्टी, लकड़ी और स्थानीय सामग्री से बने घर देखने को मिलते रहे हैं। आधुनिक समय में पक्के मकानों और आधुनिक सुविधाओं का विस्तार हुआ है।

व्यवसाय

कृषि, कृषि मजदूरी, सरकारी/निजी नौकरी, व्यापार और अन्य श्रम आधारित गतिविधियाँ आजीविका के प्रमुख साधनों में शामिल हैं।


3. खरवार जनजाति

खरवार जनजाति बिहार की महत्वपूर्ण अनुसूचित जनजातियों में शामिल है। सरकारी सूची में खरवार से संबंधित कुछ संबद्ध नाम भी दर्ज हैं।

खरवार समुदाय की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं में ग्रामीण जीवन, कृषि तथा प्राकृतिक संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

प्रमुख आजीविका

  • कृषि
  • कृषि मजदूरी
  • पशुपालन
  • वन आधारित गतिविधियाँ
  • स्थानीय श्रम
  • व्यापार एवं नौकरी

4. गोंड जनजाति

गोंड जनजाति भारत की प्रमुख आदिवासी जनजातियों में से एक है और बिहार की ST सूची में भी गोंड शामिल है।

गोंड समाज की अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएँ, लोककथाएँ, गीत, नृत्य और प्रकृति से जुड़ी मान्यताएँ हैं।

गोंड समाज का जीवन

गोंड समुदाय के विभिन्न क्षेत्रों में रहन-सहन और सांस्कृतिक परंपराओं में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अंतर पाया जाता है।

आजीविका

  • कृषि
  • मजदूरी
  • वन आधारित कार्य
  • पशुपालन
  • सरकारी एवं निजी रोजगार
  • छोटे व्यवसाय

5. थारू जनजाति

थारू जनजाति बिहार की विशेष रूप से महत्वपूर्ण जनजातियों में से है। इसका प्रमुख संबंध बिहार के पश्चिमी चंपारण क्षेत्र से माना जाता है, जो नेपाल सीमा के निकट स्थित है।

पश्चिमी चंपारण में थारू समुदाय की उपस्थिति जनजातीय भूगोल की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

संस्कृति

थारू समाज की अपनी लोकपरंपराएँ, सामाजिक रीति-रिवाज, लोकगीत और स्थानीय जीवनशैली है।

रहन-सहन

स्थानीय पर्यावरण और कृषि आधारित जीवन का इनके पारंपरिक रहन-सहन पर प्रभाव रहा है।

व्यवसाय

  • कृषि
  • पशुपालन
  • कृषि मजदूरी
  • स्थानीय रोजगार
  • छोटे व्यवसाय

6. माल पहाड़िया और कुमारभाग पहाड़िया

माल पहाड़िया और कुमारभाग पहाड़िया बिहार की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल हैं।

इन समुदायों का जीवन ऐतिहासिक रूप से पहाड़ी और वन क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ा रहा है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • प्रकृति पर निर्भर जीवन
  • कृषि
  • वन आधारित गतिविधियाँ
  • स्थानीय संसाधनों का उपयोग
  • सामुदायिक जीवन
  • लोकपरंपराएँ

7. सौरिया पहाड़िया जनजाति

सौरिया पहाड़िया एक विशिष्ट पहाड़ी जनजातीय समुदाय है। बिहार की सरकारी ST सूची में इसका नाम शामिल है।

इस समुदाय की सामाजिक संरचना, लोकपरंपरा और आजीविका पर पहाड़ी तथा वन पर्यावरण का प्रभाव रहा है।


8. मुंडा जनजाति

मुंडा जनजाति पूर्वी भारत के प्रमुख आदिवासी समुदायों में से एक है और बिहार की अनुसूचित जनजाति सूची में भी शामिल है।

मुंडा समाज में सामुदायिक जीवन, कृषि, लोकगीत, नृत्य और प्रकृति से जुड़े सांस्कृतिक तत्व महत्वपूर्ण रहे हैं।


9. हो जनजाति

हो जनजाति भी बिहार की अनुसूचित जनजातियों में सूचीबद्ध है। Census 2011 की बिहार ST तालिका में Ho को अलग प्रविष्टि के रूप में दर्ज किया गया है।

हो समाज की अपनी भाषा, सामाजिक परंपराएँ, लोकगीत, नृत्य और सामुदायिक संस्थाएँ हैं।


10. चेरो जनजाति

चेरो जनजाति बिहार की ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण जनजातीय समुदायों में से है और वर्तमान ST सूची में शामिल है।

बिहार के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों के इतिहास और स्थानीय सामाजिक संरचना के अध्ययन में चेरो समुदाय का उल्लेख मिलता है।


11. खरिया जनजाति

सरकारी सूची में खरिया, ढेलकी खड़िया, दूध खड़िया और हिल खड़िया को संबद्ध नामों के साथ दर्ज किया गया है।

खरिया समुदाय के विभिन्न समूहों की भाषा, सामाजिक संरचना और जीवनशैली में क्षेत्रीय अंतर पाए जा सकते हैं।


12. बिरहोर जनजाति

बिरहोर बिहार की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल एक छोटा आदिवासी समुदाय है।

पारंपरिक रूप से बिरहोर समाज के जीवन में जंगल, स्थानीय प्राकृतिक संसाधन और पारंपरिक आजीविका का विशेष महत्व रहा है।


13. बिरजिया जनजाति

बिरजिया बिहार की अनुसूचित जनजातियों में शामिल समुदाय है। इसके पारंपरिक जीवन में जंगल और प्राकृतिक संसाधनों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।


14. असुर और अगरिया

असुर और अगरिया सरकारी सूची में एक प्रविष्टि के अंतर्गत आते हैं।

असुर समाज को पारंपरिक लौह-कर्म/धातु कार्य की ऐतिहासिक परंपरा के संदर्भ में भी अध्ययन किया जाता है। हालांकि किसी पूरे समुदाय को केवल एक पारंपरिक व्यवसाय तक सीमित करके देखना उचित नहीं है, क्योंकि आज आजीविका के साधनों में परिवर्तन हुआ है।


15. बैगा जनजाति

बैगा भारत की प्रसिद्ध आदिवासी जनजातियों में से एक है और बिहार की ST सूची में भी शामिल है।

बैगा समुदाय की पारंपरिक संस्कृति में जंगल, प्रकृति, पारंपरिक ज्ञान, कृषि और लोकचिकित्सा जैसी परंपराओं का अध्ययन महत्वपूर्ण है।


16. बंजारा जनजाति

बिहार की सरकारी ST सूची में बंजारा का नाम भी दर्ज है।

बंजारा समुदाय का ऐतिहासिक जीवन गतिशील व्यापार, परिवहन और विभिन्न क्षेत्रों में आवागमन से जुड़ा रहा है। वर्तमान समय में समुदाय के व्यवसायों में विविधता आई है।


17. बठुडी जनजाति

बठुडी बिहार की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल है। इसका सामाजिक जीवन पूर्वी भारत के व्यापक जनजातीय सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।


18. बेदिया जनजाति

बेदिया भी बिहार की ST सूची में शामिल समुदाय है। पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था, श्रम, कृषि और स्थानीय व्यवसाय इसके जीवन का हिस्सा रहे हैं।


19. बिंझिया जनजाति

बिंझिया बिहार की अनुसूचित जनजातियों में शामिल है। समुदाय की सामाजिक परंपराओं और आजीविका में ग्रामीण एवं प्राकृतिक पर्यावरण की भूमिका रही है।


20. चिक बड़ाइक जनजाति

चिक बड़ाइक बिहार की ST सूची में शामिल है। इस समुदाय की पारंपरिक सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का संबंध स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था से रहा है।


21. गोराइत जनजाति

गोराइत बिहार की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल समुदाय है। ग्रामीण क्षेत्र, कृषि और स्थानीय श्रम इसकी पारंपरिक अर्थव्यवस्था से जुड़े रहे हैं।


22. करमाली जनजाति

करमाली भी बिहार की ST सूची में शामिल है। समुदाय के पारंपरिक जीवन में स्थानीय शिल्प, श्रम, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की भूमिका रही है।


23. खोंड जनजाति

खोंड बिहार की अनुसूचित जनजातियों में शामिल समुदाय है। इसकी सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का संबंध व्यापक पूर्वी-मध्य भारतीय आदिवासी क्षेत्र से है।


24. किसान और नागेसिया

सरकारी सूची में किसान और नागेसिया को एक संबद्ध प्रविष्टि में रखा गया है।

इन समुदायों के जीवन में कृषि और प्राकृतिक संसाधनों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।


25. कोरा और मुड़ी-कोरा

कोरा और मुड़ी-कोरा बिहार की ST सूची में शामिल हैं।

इनके पारंपरिक जीवन में कृषि, श्रम और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का महत्व रहा है।


26. कोरवा

कोरवा बिहार की अनुसूचित जनजातियों में शामिल है। समुदाय के पारंपरिक जीवन में जंगल और प्राकृतिक संसाधनों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।


27. लोहरा/लोहार

सरकारी सूची में लोहरा/लोहार को अनुसूचित जनजाति सूची में दर्ज किया गया है।

पारंपरिक रूप से लोहार समुदाय का संबंध लौह-कार्य और धातु शिल्प से रहा है, लेकिन वर्तमान में रोजगार के साधन काफी विविध हो चुके हैं।


28. माहली जनजाति

माहली बिहार की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल है।

पारंपरिक रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, हस्तशिल्प और स्थानीय संसाधनों पर आधारित कार्य इनके जीवन का हिस्सा रहे हैं।


29. परहैया जनजाति

परहैया बिहार की अनुसूचित जनजातियों में शामिल एक महत्वपूर्ण समुदाय है।

इनके पारंपरिक जीवन में जंगल, कृषि और प्राकृतिक संसाधनों की भूमिका रही है।


30. सावर जनजाति

सावर बिहार की सरकारी अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल है।

सावर समुदाय की जीवनशैली में ग्रामीण वातावरण, कृषि तथा प्राकृतिक संसाधनों की भूमिका रही है।


31. कवार जनजाति

कवार भी बिहार की अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल समुदाय है।

इस समुदाय की आजीविका में कृषि, श्रम और स्थानीय व्यवसायों की भूमिका रही है।


32. कोल जनजाति

कोल बिहार की ST सूची में शामिल है। कोल नाम का व्यापक ऐतिहासिक और क्षेत्रीय उपयोग भी मिलता है, इसलिए किसी विशेष क्षेत्र में समुदाय की पहचान बताते समय आधिकारिक जनजातीय सूची और स्थानीय संदर्भ को देखना आवश्यक है।


33. पुरान

Ministry of Tribal Affairs की नवीनतम उपलब्ध सूची में पुरान (Puran) नाम बिहार के अंतर्गत दिखाई देता है।

इस समुदाय के बारे में इंटरनेट पर उपलब्ध सामान्य सामग्री अन्य बड़ी जनजातियों की तुलना में सीमित है। इसलिए इसके संबंध में अप्रमाणित लोककथाओं या वेबसाइटों से प्राप्त दावों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से बचना चाहिए।


बिहार की जनजातीय संस्कृति

बिहार की जनजातीय संस्कृति एक जैसी नहीं है। अलग-अलग समुदायों की भाषा, लोकगीत, नृत्य, विवाह परंपरा, धार्मिक/आध्यात्मिक मान्यताएँ और सामाजिक संगठन अलग हो सकते हैं।

फिर भी कई जनजातीय समाजों में कुछ सामान्य सांस्कृतिक विशेषताएँ दिखाई देती हैं:

1. प्रकृति से संबंध

कई जनजातीय समुदायों के पारंपरिक जीवन में जंगल, भूमि, जल, पहाड़ और कृषि का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।

2. सामुदायिक जीवन

कई समुदायों में सामाजिक निर्णय, त्योहार और सामूहिक गतिविधियाँ समुदाय आधारित रही हैं।

3. लोकगीत और लोकनृत्य

जनजातीय समाजों में लोकगीत और नृत्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम भी हैं।

4. पारंपरिक ज्ञान

वनस्पति, कृषि, मौसम, स्थानीय संसाधन और पारंपरिक चिकित्सा से जुड़ा स्थानीय ज्ञान अनेक समुदायों की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।


बिहार की जनजातियों की परंपराएँ

बिहार की जनजातीय परंपराओं में निम्न तत्व महत्वपूर्ण हैं:

  • पारंपरिक त्योहार
  • कृषि आधारित उत्सव
  • सामूहिक नृत्य
  • लोकगीत
  • पारंपरिक विवाह
  • सामुदायिक बैठक
  • प्रकृति से जुड़ी मान्यताएँ
  • पूर्वजों की स्मृति
  • स्थानीय देवी-देवताओं/आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विश्वास

इन परंपराओं को सभी जनजातियों पर एक समान लागू नहीं किया जा सकता।


बिहार की जनजातियों का रहन-सहन

पारंपरिक जनजातीय रहन-सहन पर भौगोलिक क्षेत्र, जलवायु, जंगल, कृषि भूमि और आर्थिक स्थिति का प्रभाव रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से मिट्टी, लकड़ी, बांस और अन्य स्थानीय सामग्री का उपयोग घर बनाने में किया जाता रहा है। आधुनिक समय में सरकारी आवास योजनाओं, बाजार, सड़क, शिक्षा और रोजगार के विस्तार के कारण आवासीय जीवन में परिवर्तन आया है।

आज जनजातीय समाज में पारंपरिक घरों के साथ-साथ पक्के मकान, बिजली, मोबाइल, इंटरनेट और आधुनिक घरेलू सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है।


बिहार की जनजातियों का खानपान

बिहार की जनजातियों का खानपान क्षेत्र और समुदाय के अनुसार अलग-अलग होता है।

पारंपरिक भोजन में स्थानीय रूप से उपलब्ध:

  • चावल
  • गेहूं
  • मक्का
  • दालें
  • कंद-मूल
  • मौसमी फल
  • हरी सब्जियाँ
  • वन उत्पाद
  • स्थानीय अनाज

का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जाता रहा है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी एक भोजन को पूरी बिहार की जनजातीय आबादी का “पारंपरिक भोजन” मानना सही नहीं होगा। भोजन स्थानीय कृषि, उपलब्ध संसाधनों और परिवार की आर्थिक स्थिति के अनुसार बदलता है।


बिहार की जनजातियों की शिक्षा

जनगणना 2011 में बिहार की अनुसूचित जनजाति आबादी के लिए शिक्षा और साक्षरता से संबंधित अलग-अलग आंकड़े उपलब्ध हैं। Census की ST-08 तालिका में आयु, लिंग और शैक्षणिक स्तर के अनुसार ST आबादी का विवरण दिया गया है।

आदिवासी समाज में शिक्षा के विस्तार के साथ:

  • प्राथमिक शिक्षा
  • माध्यमिक शिक्षा
  • उच्च शिक्षा
  • तकनीकी शिक्षा
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
  • सरकारी नौकरी
  • व्यावसायिक शिक्षा

जैसे क्षेत्रों में भागीदारी बढ़ी है।

हालांकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विद्यालय तक पहुंच, आर्थिक स्थिति, परिवहन और भाषा संबंधी चुनौतियाँ शिक्षा की निरंतरता को प्रभावित कर सकती हैं।


बिहार की जनजातियों के व्यवसाय और आजीविका

बिहार की जनजातियों के व्यवसाय समय के साथ बदल रहे हैं।

Census 2011 की ST Primary Census Abstract में जनजातीय आबादी के कामगारों को कृषक, कृषि मजदूर, घरेलू उद्योग और अन्य कार्य जैसी श्रेणियों में दर्ज किया गया है।

प्रमुख पारंपरिक एवं वर्तमान व्यवसाय

💼 आजीविका एवं व्यवसाय:
बिहार के जनजातीय समाज में पारंपरिक आजीविका के साथ-साथ आधुनिक रोजगार के क्षेत्रों में भी भागीदारी देखी जाती है। व्यवसाय और आजीविका का स्वरूप समुदाय तथा क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
व्यवसाय स्थिति
🌾 कृषि प्रमुख आजीविका
👷 कृषि मजदूरी ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण
🐄 पशुपालन कई समुदायों में सहायक आजीविका
🌳 वन आधारित कार्य कुछ समुदायों में पारंपरिक महत्व
🎨 हस्तशिल्प स्थानीय स्तर पर
🏠 घरेलू उद्योग कुछ क्षेत्रों में
🧑‍🔧 मजदूरी महत्वपूर्ण रोजगार स्रोत
🏛️ सरकारी नौकरी आधुनिक रोजगार का प्रमुख क्षेत्र
💼 निजी नौकरी बढ़ती भागीदारी
🛒 व्यापार विभिन्न समुदायों में
🚀 स्वरोजगार बढ़ता हुआ क्षेत्र
📌 महत्वपूर्ण जानकारी:
बिहार के जनजातीय समुदायों में आजीविका के साधन एक समान नहीं हैं। पारंपरिक व्यवसायों के साथ शिक्षा, सरकारी एवं निजी नौकरी, व्यापार और स्वरोजगार जैसे आधुनिक रोजगार क्षेत्रों में भी भागीदारी बढ़ रही है।


बिहार की जनजातीय भाषाएँ

बिहार के जनजातीय समाज में भाषा की विविधता महत्वपूर्ण है।

Census 2011 की ST-15 तालिका में प्रत्येक जनजाति के लिए मातृभाषा से संबंधित आंकड़े उपलब्ध हैं।

विभिन्न समुदाय अपनी पारंपरिक भाषाओं/बोलियों के साथ-साथ क्षेत्रीय संपर्क भाषा के रूप में हिंदी तथा अन्य स्थानीय भाषाओं का प्रयोग भी कर सकते हैं।

भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं है, बल्कि इसमें किसी समुदाय का इतिहास, लोकगीत, लोककथा, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक स्मृति भी संरक्षित रहती है।


बिहार में जनजातीय समाज और प्रकृति

बिहार की कई जनजातियों के पारंपरिक जीवन में प्रकृति का विशेष महत्व रहा है। जंगल, नदी, पहाड़, कृषि भूमि और स्थानीय वनस्पतियाँ उनके जीवन और अर्थव्यवस्था का हिस्सा रही हैं।

इसी कारण आदिवासी संस्कृति और प्रकृति, जनजातीय जीवनशैली, जनजातीय परंपरा और वन आधारित आजीविका जैसे विषयों का अध्ययन बिहार के जनजातीय समाज को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।


बिहार की जनजातियों की वर्तमान स्थिति

आधुनिक समय में बिहार के जनजातीय समाज में कई बदलाव दिखाई देते हैं।

सामाजिक बदलाव

  • शिक्षा का विस्तार
  • शहरों की ओर रोजगार के लिए प्रवास
  • मोबाइल और इंटरनेट का बढ़ता उपयोग
  • आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच
  • सरकारी योजनाओं की जानकारी में वृद्धि

आर्थिक बदलाव

पारंपरिक कृषि और मजदूरी के साथ सरकारी नौकरी, निजी रोजगार, व्यापार, निर्माण कार्य, सेवा क्षेत्र और स्वरोजगार जैसे नए विकल्प भी बढ़े हैं।

सांस्कृतिक बदलाव

आधुनिकता के साथ जीवनशैली में परिवर्तन आया है, लेकिन कई समुदाय अपनी भाषा, त्योहार, लोकगीत, नृत्य और सामाजिक परंपराओं को बनाए रखने का प्रयास करते हैं।


बिहार की जनजातियों से संबंधित सरकारी योजनाएँ

जनजातीय समुदायों के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा शिक्षा, छात्रवृत्ति, आवास, आर्थिक सहायता, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित विभिन्न योजनाएँ संचालित की जाती हैं।

योजनाओं की पात्रता और नियम समय के साथ बदल सकते हैं। इसलिए किसी योजना की जानकारी देते समय संबंधित सरकारी विभाग की नवीनतम अधिसूचना देखना आवश्यक है।


निष्कर्ष

बिहार का जनजातीय समाज राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संताल, उरांव, खरवार, गोंड, थारू, मुंडा, हो, चेरो, खरिया, माल पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया, कोरवा, परहैया और अन्य जनजातियाँ अपनी अलग-अलग ऐतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान रखती हैं।

जनगणना 2011 के अनुसार बिहार में अनुसूचित जनजाति की आबादी 13,36,573 थी, जो राज्य की कुल आबादी का लगभग 1.28 प्रतिशत थी।

बिहार की जनजातियों को समझने के लिए केवल उनकी जनसंख्या देखना पर्याप्त नहीं है। उनकी भाषा, संस्कृति, लोकपरंपरा, कृषि, वन आधारित ज्ञान, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक संगठन और बदलती जीवनशैली को भी समझना आवश्यक है।

साथ ही, जनजातीय समुदायों के बारे में जानकारी लिखते समय अलग-अलग समुदायों को एक ही सांस्कृतिक पहचान में समेटने के बजाय उनके स्थानीय और समुदाय-विशिष्ट संदर्भ को महत्व देना चाहिए।


FAQ – बिहार की जनजातियों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

1. बिहार में कितनी जनजातियाँ हैं?

सरकारी सूचियों में प्रविष्टियों की स्थिति समय के साथ बदल सकती है। Census 2011 की बिहार ST तालिका में 32 जनजातीय entries दर्ज हैं, जबकि Ministry of Tribal Affairs की बाद की सूची में संशोधित प्रविष्टियाँ दिखाई देती हैं। इसलिए संख्या बताते समय सूची के वर्ष और सरकारी स्रोत का उल्लेख करना चाहिए।

2. बिहार में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या कितनी है?

Census 2011 के अनुसार बिहार में ST जनसंख्या 13,36,573 थी।

3. बिहार की कुल आबादी में आदिवासी जनसंख्या कितनी है?

2011 Census के अनुसार अनुसूचित जनजाति की आबादी बिहार की कुल आबादी का लगभग 1.28 प्रतिशत थी।

4. बिहार की सबसे प्रमुख जनजातियों में कौन-कौन शामिल हैं?

संताल, उरांव, खरवार, गोंड, थारू, मुंडा, हो, चेरो, खरिया, माल पहाड़िया और सौरिया पहाड़िया आदि प्रमुख अध्ययन योग्य जनजातीय समुदाय हैं।

5. बिहार में थारू जनजाति कहाँ रहती है?

थारू समुदाय की महत्वपूर्ण उपस्थिति पश्चिमी चंपारण क्षेत्र में है।

6. बिहार की जनजातियों का मुख्य व्यवसाय क्या है?

कृषि, कृषि मजदूरी, पशुपालन, वन आधारित कार्य, घरेलू उद्योग, हस्तशिल्प, मजदूरी, व्यापार, सरकारी तथा निजी रोजगार आदि आजीविका के विभिन्न साधन हैं।

7. बिहार की जनजातियों की भाषाएँ कौन-कौन सी हैं?

विभिन्न जनजातियों की अपनी मातृभाषाएँ और बोलियाँ हैं। Census 2011 की ST-15 तालिका जनजाति-वार मातृभाषा संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराती है।

8. बिहार की जनजातियों की संस्कृति कैसी है?

बिहार की जनजातीय संस्कृति विविध है। इसमें लोकगीत, लोकनृत्य, कृषि उत्सव, सामुदायिक जीवन, पारंपरिक सामाजिक संस्थाएँ और प्रकृति से जुड़े सांस्कृतिक तत्व महत्वपूर्ण हैं।

9. क्या बिहार की सभी जनजातियों की संस्कृति एक जैसी है?

नहीं। प्रत्येक जनजातीय समुदाय की भाषा, इतिहास, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक परंपराओं में अंतर हो सकता है।

10. बिहार की जनजातियों के आधिकारिक आंकड़े कहाँ मिलते हैं?

Census of India और Ministry of Tribal Affairs के आधिकारिक स्रोतों में जनजातीय जनसंख्या, शिक्षा, भाषा, कामगार और अन्य आंकड़े उपलब्ध हैं।


इस जानकारी का मुख्या स्रोत:- 

  • Census of India 2011 – Scheduled Tribe Primary Census Abstract, Bihar
  • Census of India 2011 – District-wise Scheduled Tribe Population, Bihar
  • Census of India 2011 – ST Educational Data
  • Census of India 2011 – ST Mother Tongue Data
  • Ministry of Tribal Affairs, Government of India – State-wise List of Scheduled Tribes
  • Government of Bihar – Statistical publications

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