इरुला / इरुलर जनजाति : संपूर्ण जानकारी, इतिहास, संस्कृति, भाषा, जनसंख्या और जीवनशैली
Irula Tribe, Irular Tribe, इरुलर जनजाति, इरुला जनजाति की जनसंख्या, इरुला जनजाति की संस्कृति, इरुला जनजाति का इतिहास, इरुला जनजाति कहाँ रहती है, इरुला भाषा, इरुला जनजाति का रहन-सहन, इरुला जनजाति का व्यवसाय, इरुला जनजाति के त्योहार
इरुला जनजाति का परिचय
इरुला (Irula) या इरुलर (Irular) दक्षिण भारत की एक प्रमुख आदिवासी जनजाति है। इनका प्रमुख निवास क्षेत्र तमिलनाडु है, जबकि इरुलर समुदाय के लोग केरल और कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में भी पाए जाते हैं। भारत की जनगणना में इरुलर को अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) के रूप में दर्ज किया गया है। तमिलनाडु की अनुसूचित जनजातियों की आधिकारिक जनगणना तालिकाओं में Irular नाम दर्ज है; केरल में Irular, Irulan नाम से दर्ज किया गया है और कर्नाटक में Irular तथा Iruliga नाम मिलते हैं।
इरुला समाज का पारंपरिक जीवन जंगल, पहाड़ी क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों से गहराई से जुड़ा रहा है। शिकार-संग्रह, कृषि मजदूरी, वन-आधारित कार्य और स्थानीय स्तर के अन्य व्यवसाय इनके पारंपरिक जीवन का हिस्सा रहे हैं।
इरुला जनजाति से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
| क्रम | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| 1 | इरुला दक्षिण भारत की प्रमुख आदिवासी जनजातियों में से एक है। |
| 2 | इरुला को Irular नाम से भी जाना जाता है। |
| 3 | तमिलनाडु इरुला समुदाय का प्रमुख निवास क्षेत्र है। |
| 4 | इरुला समुदाय के लोग केरल और कर्नाटक में भी पाए जाते हैं। |
| 5 | इरुला को तमिलनाडु में PVTG के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। |
| 6 | इरुला भाषा द्रविड़ भाषा परिवार से संबंधित है। |
| 7 | केरल की जनगणना में Irular, Irulan नाम दर्ज है। |
| 8 | कर्नाटक में Irular तथा Iruliga नाम दर्ज हैं। |
| 9 | पलक्कड़ का अट्टाप्पाडी क्षेत्र केरल में इरुलर समुदाय के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में है। |
| 10 | पारंपरिक रूप से इरुला समाज का जीवन जंगल और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा रहा है। |
| 11 | इरुला लोगों के बीच साँपों की पहचान और पकड़ने का पारंपरिक ज्ञान प्रसिद्ध रहा है। |
| 12 | कृषि मजदूरी और वन-आधारित गतिविधियाँ पारंपरिक आजीविका का हिस्सा रही हैं। |
| 13 | इरुला संस्कृति में मौखिक परंपराओं का विशेष महत्व है। |
| 14 | शिक्षा और आधुनिक रोजगार के कारण इरुला समाज में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन हो रहे हैं। |
| 15 | जनगणना 2011 इरुला जनसंख्या के लिए प्रमुख आधिकारिक आधार है। |
इरुला समुदाय से संबंधित नाम, जनसंख्या और प्रशासनिक वर्गीकरण अलग-अलग राज्यों की जनगणना एवं अनुसूचित जनजाति तालिकाओं में कुछ भिन्न रूपों में दर्ज हो सकते हैं। इसलिए राज्यवार जानकारी को संबंधित आधिकारिक स्रोतों के संदर्भ में देखना उचित है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इरुला जनजाति
UPSC, SSC, State PSC, शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती, वन विभाग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में जनजातियों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1: इरुला जनजाति मुख्य रूप से किस क्षेत्र में पाई जाती है?
उत्तर: दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु।
प्रश्न 2: इरुला जनजाति किन राज्यों में पाई जाती है?
उत्तर: प्रमुख रूप से तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक।
प्रश्न 3: इरुला किस भाषा परिवार से संबंधित भाषा बोलते हैं?
उत्तर: द्रविड़ भाषा परिवार।
प्रश्न 4: क्या इरुला PVTG में शामिल है?
उत्तर: हाँ, तमिलनाडु की राज्यवार PVTG सूची में Irular शामिल है।
प्रश्न 5: केरल में इरुलर समुदाय का प्रमुख क्षेत्र कौन-सा है?
उत्तर: पलक्कड़ जिले का अट्टाप्पाडी क्षेत्र।
प्रश्न 6: कर्नाटक में इरुला समुदाय किस नाम से भी दर्ज है?
उत्तर: Iruliga।
प्रश्न 7: इरुला समुदाय की पारंपरिक विशेषज्ञता किससे प्रसिद्ध रही है?
उत्तर: साँपों की पहचान और पकड़ने के पारंपरिक ज्ञान से।
इरुला जनजाति कहाँ पाई जाती है?
इरुला समुदाय मुख्य रूप से दक्षिण भारत में पाया जाता है। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक इसके प्रमुख निवास क्षेत्रों में शामिल हैं।
| राज्य / क्षेत्र | इरुला समुदाय की स्थिति |
|---|---|
| तमिलनाडु | इरुला समुदाय का प्रमुख केंद्र |
| केरल | विशेषकर पलक्कड़ और अट्टाप्पाडी क्षेत्र में महत्वपूर्ण आबादी |
| कर्नाटक | कुछ क्षेत्रों में Irular/Iruliga नाम से समुदाय |
| अन्य क्षेत्र | सीमावर्ती क्षेत्रों में भी कुछ परिवार मिल सकते हैं |
भारत की जनगणना 2011 की राज्यवार अनुसूचित जनजाति तालिकाओं में तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में इरुला/इरुलर नाम दर्ज है। अलग-अलग राज्यों में समुदाय के नाम और प्रशासनिक वर्गीकरण में कुछ भिन्नता दिखाई दे सकती है।
इरुला जनजाति की जनसंख्या
इरुला जनसंख्या के लिए जनगणना 2011 प्रमुख आधिकारिक आधार है। उपलब्ध जनगणना-आधारित संकलनों में दक्षिण भारत के तीन प्रमुख राज्यों में इरुला समुदाय की संख्या लगभग 2 लाख से अधिक बताई जाती है।
एक जनगणना-आधारित संकलन के अनुसार 2011 में:
| राज्य | इरुला/इरुलर जनसंख्या |
|---|---|
| तमिलनाडु | लगभग 1,89,621 |
| केरल | लगभग 23,721 |
| कर्नाटक | लगभग 10,259 |
| कुल | लगभग 2,13,601 |
महत्वपूर्ण: अलग-अलग स्रोतों में समुदाय के नाम, प्रशासनिक वर्गीकरण और राज्यवार गणना के तरीके के कारण संख्या में अंतर दिखाई दे सकता है। इसलिए परीक्षा या शोध के लिए Census of India 2011 की राज्यवार A-11/ST तालिकाओं को प्राथमिक स्रोत मानना बेहतर है। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक की आधिकारिक जनगणना तालिकाएँ इरुलर/इरुलर-सम्बंधित नामों को अलग-अलग राज्यीय अनुसूचित जनजाति सूचियों में दर्ज करती हैं।
इरुला जनजाति और PVTG का दर्जा
इरुला को तमिलनाडु में Particularly Vulnerable Tribal Group (PVTG) अर्थात विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की राज्यवार PVTG सूची में Tamil Nadu – Irular का उल्लेख है।
यह जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
इरुला जनजाति का इतिहास
इरुला दक्षिण भारत के पुराने आदिवासी समुदायों में से एक है। इनका पारंपरिक जीवन दक्षिण भारत के जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़ा रहा है।
ऐतिहासिक रूप से इरुला समाज ने स्थानीय पर्यावरण के अनुसार अपनी जीवनशैली विकसित की। जंगल से प्राप्त खाद्य सामग्री, छोटे वन उत्पाद, कृषि तथा पशुपालन आदि इनके जीवन का हिस्सा रहे।
समय के साथ जंगलों पर बढ़ते सरकारी नियंत्रण, भूमि व्यवस्था में परिवर्तन, आधुनिक कृषि व्यवस्था और रोजगार के बदलते स्वरूप का प्रभाव इरुला समाज पर पड़ा। इसके परिणामस्वरूप इनके पारंपरिक व्यवसायों में भी परिवर्तन आया।
इरुला जनजाति का नाम और पहचान
इरुला समुदाय को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों से भी जाना जाता है।
- Irula
- Irular
- Irulan
- Iruliga — कर्नाटक में संबंधित नाम के रूप में दर्ज
- इरुला
- इरुलर
केरल की जनगणना तालिका में Irular, Irulan नाम मिलता है, जबकि कर्नाटक की आधिकारिक जनगणना सूची में Irular और Iruliga दोनों नाम दर्ज हैं।
इरुला जनजाति की भाषा
इरुला समुदाय की पारंपरिक भाषा को इरुला भाषा (Irula/Irular language) कहा जाता है। यह द्रविड़ भाषा परिवार से संबंधित मानी जाती है।
क्षेत्र के अनुसार इरुला समुदाय पर तमिल, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं का प्रभाव भी देखने को मिलता है।
केरल की जनगणना 2011 की मातृभाषा तालिका में Irula/Irular Mozhi का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
भाषा की प्रमुख विशेषताएँ
- द्रविड़ भाषाई परंपरा से संबंध
- मौखिक परंपरा का महत्व
- स्थानीय तमिल/कन्नड़/मलयालम का प्रभाव
- लोककथाओं और पारंपरिक ज्ञान का मौखिक संरक्षण
- आधुनिक शिक्षा के कारण क्षेत्रीय प्रमुख भाषाओं का बढ़ता प्रयोग
इरुला जनजाति का निवास क्षेत्र
इरुला लोगों का निवास मुख्य रूप से वन, पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहा है।
तमिलनाडु
तमिलनाडु इरुला जनजाति का सबसे प्रमुख क्षेत्र है। विशेष रूप से राज्य के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों के वन एवं पहाड़ी क्षेत्रों में इनकी उपस्थिति रही है।
केरल
केरल में पलक्कड़ जिले का अट्टाप्पाडी क्षेत्र इरुलर समुदाय के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
केरल सरकार के एक सामाजिक-आर्थिक अध्ययन के अनुसार इरुलर समुदाय की बड़ी आबादी पलक्कड़ जिले में केंद्रित थी और अट्टाप्पाडी क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में इसका महत्वपूर्ण संकेंद्रण पाया गया था।
कर्नाटक
कर्नाटक की अनुसूचित जनजाति जनगणना सूची में Irular और Iruliga दोनों नाम दर्ज हैं।
इरुला जनजाति का सामाजिक जीवन
इरुला समाज में परिवार और समुदाय का महत्वपूर्ण स्थान है। पारंपरिक रूप से सामाजिक संबंधों, विवाह, सामुदायिक निर्णय और धार्मिक गतिविधियों में समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
आधुनिक समय में शिक्षा, सरकारी योजनाओं, सड़क एवं संचार व्यवस्था तथा रोजगार के नए अवसरों के कारण सामाजिक जीवन में परिवर्तन आया है।
इरुला जनजाति की पारंपरिक आजीविका
इरुला समाज की अर्थव्यवस्था लंबे समय तक प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित रही है।
प्रमुख पारंपरिक व्यवसाय
- कृषि एवं कृषि मजदूरी
- वन उत्पाद संग्रह
- शिकार एवं पारंपरिक संग्रहण
- पशुपालन
- छोटे स्तर का स्थानीय व्यापार
- जंगल से संबंधित पारंपरिक कार्य
- दिहाड़ी मजदूरी
आज कई इरुला परिवार कृषि मजदूरी, निर्माण कार्य, छोटे व्यवसाय और अन्य आधुनिक रोजगारों से भी जुड़े हैं।
इरुला और साँप पकड़ने की पारंपरिक विशेषज्ञता
इरुला समुदाय की पहचान का एक महत्वपूर्ण पक्ष साँप पकड़ने और साँपों की पहचान से जुड़ा पारंपरिक ज्ञान है।
विशेषकर दक्षिण भारत में इरुला लोगों के बीच साँपों की पहचान, पकड़ने और उनके व्यवहार को समझने का पारंपरिक ज्ञान लंबे समय से प्रसिद्ध रहा है।
यह ज्ञान केवल आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि स्थानीय पर्यावरण के साथ समुदाय के लंबे संबंध का उदाहरण भी है।
आज वन्यजीव संरक्षण कानूनों के कारण पारंपरिक शिकार एवं वन्यजीवों से संबंधित गतिविधियों पर कानूनी प्रतिबंध लागू हैं। इसलिए इरुला समुदाय की पारंपरिक विशेषज्ञता को आधुनिक संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और वैधानिक रोजगार के संदर्भ में देखना आवश्यक है।
इरुला जनजाति की संस्कृति और परंपरा
इरुला संस्कृति प्रकृति और सामुदायिक जीवन से गहराई से जुड़ी रही है।
संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ
- प्रकृति के प्रति सम्मान
- जंगल और प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक ज्ञान
- मौखिक परंपराएँ
- लोककथाएँ और गीत
- सामुदायिक उत्सव
- पारंपरिक धार्मिक विश्वास
- स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा
- परिवार और समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका
इरुला जनजाति के धार्मिक विश्वास
इरुला समुदाय में पारंपरिक धार्मिक विश्वासों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इनके धार्मिक जीवन में प्रकृति, पूर्वजों, स्थानीय देवी-देवताओं और ग्राम/क्षेत्रीय देवताओं की मान्यताएँ देखने को मिलती हैं।
क्षेत्र और परिवार के अनुसार धार्मिक प्रथाओं में अंतर हो सकता है। आधुनिक समय में कुछ लोगों पर हिंदू धर्म तथा ईसाई धर्म का भी प्रभाव देखने को मिलता है।
इसलिए पूरे इरुला समुदाय की धार्मिक परंपराओं को एक समान मानना उचित नहीं होगा।
इरुला जनजाति के त्योहार
इरुला समाज के त्योहार और सामुदायिक धार्मिक आयोजन स्थानीय क्षेत्र और आसपास की संस्कृति से प्रभावित होते हैं।
इन अवसरों पर सामान्यतः:
- सामुदायिक पूजा
- पारंपरिक गीत
- नृत्य
- भोजन
- सामाजिक मेल-मिलाप
- देवी-देवताओं की आराधना
जैसी गतिविधियाँ होती हैं।
कई इरुला परिवार आसपास के तमिल, कन्नड़ या मलयाली समाज के प्रमुख त्योहारों में भी भाग लेते हैं।
इरुला जनजाति का पारंपरिक भोजन
इरुला समाज का पारंपरिक भोजन स्थानीय पर्यावरण और उपलब्ध संसाधनों से प्रभावित रहा है।
प्रमुख खाद्य पदार्थ
- रागी
- बाजरा जैसे मोटे अनाज
- चावल
- कंद-मूल
- जंगली फल
- स्थानीय सब्जियाँ
- दालें
- वन से प्राप्त खाद्य पदार्थ
आधुनिक समय में बाजार और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के कारण भोजन की आदतों में काफी बदलाव आया है।
इरुला जनजाति का पहनावा
परंपरागत रूप से इरुला समुदाय का पहनावा दक्षिण भारतीय ग्रामीण एवं वनवासी क्षेत्रों की जलवायु और स्थानीय परंपराओं के अनुरूप रहा है।
आज अधिकांश इरुला परिवार सामान्य आधुनिक भारतीय पहनावे का उपयोग करते हैं। हालांकि विशेष सामुदायिक कार्यक्रमों और सांस्कृतिक अवसरों पर पारंपरिक शैली के वस्त्र और आभूषणों का उपयोग देखने को मिल सकता है।
इरुला जनजाति के लोकगीत और मौखिक परंपरा
इरुला समाज की सांस्कृतिक विरासत में मौखिक परंपरा का विशेष महत्व है।
लोकगीत, कहानियाँ, कहावतें, पहेलियाँ और पारंपरिक ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक मौखिक रूप से पहुंचते रहे हैं।
इस प्रकार इरुला समाज का पारंपरिक ज्ञान केवल लिखित साहित्य तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके बड़े हिस्से का संरक्षण समुदाय की स्मृति और मौखिक परंपराओं में हुआ है।
इरुला जनजाति का शिक्षा स्तर
आधुनिक समय में इरुला समुदाय में शिक्षा का महत्व बढ़ा है। फिर भी दूरस्थ बस्तियों, आर्थिक कठिनाइयों, विद्यालयों तक पहुंच, भाषा संबंधी समस्याओं और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा के क्षेत्र में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
शिक्षा से जुड़ी प्रमुख चुनौतियाँ
- दूरस्थ बस्तियाँ
- विद्यालय तक पहुंच
- आर्थिक कमजोरी
- पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी
- भाषा संबंधी कठिनाइयाँ
- उच्च शिक्षा तक कम पहुंच
- रोजगारोन्मुख शिक्षा की आवश्यकता
सरकारी छात्रवृत्ति, छात्रावास, आश्रम विद्यालय, आवासीय विद्यालय और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रम इस अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इरुला जनजाति की महिलाओं की स्थिति
इरुला समाज में महिलाएँ परिवार और आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
ग्रामीण एवं वन क्षेत्रों में महिलाएँ:
- कृषि कार्य
- वन उत्पाद संग्रह
- घरेलू कार्य
- पशुपालन
- स्थानीय रोजगार
जैसी गतिविधियों में योगदान देती हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी योजनाएँ इरुला महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
इरुला जनजाति की प्रमुख समस्याएँ
इरुला समुदाय के सामने कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ रही हैं।
प्रमुख समस्याएँ
- गरीबी
- भूमि एवं आवास संबंधी समस्याएँ
- स्थायी रोजगार की कमी
- शिक्षा तक सीमित पहुंच
- स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
- दूरस्थ बस्तियाँ
- पारंपरिक आजीविका में परिवर्तन
- वन संसाधनों तक पहुंच में बदलाव
- सामाजिक एवं आर्थिक पिछड़ापन
- आधुनिक रोजगार के लिए कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकता
इरुला जनजाति के विकास के लिए सरकारी प्रयास
भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा अनुसूचित जनजातियों तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
इरुला को तमिलनाडु की PVTG सूची में शामिल किए जाने के कारण PVTG विकास कार्यक्रमों का विशेष महत्व है। जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा PVTG के लिए विकास योजनाएँ संचालित की जाती रही हैं।
इनका उद्देश्य सामान्यतः:
- आवास
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- पेयजल
- आजीविका
- सड़क एवं संपर्क
- कौशल विकास
- बुनियादी सुविधाएँ
जैसे क्षेत्रों में सुधार करना है।
इरुला जनजाति और वन से संबंध
इरुला समाज का पारंपरिक जीवन जंगल से गहराई से जुड़ा रहा है। जंगल से उन्हें भोजन, ईंधन, औषधीय ज्ञान और आजीविका के विभिन्न साधन प्राप्त होते रहे हैं।
इस कारण इरुला जनजाति का पारंपरिक पर्यावरणीय ज्ञान अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय है।
आधुनिक वन संरक्षण नीतियों और वन्यजीव संरक्षण कानूनों के बाद पारंपरिक गतिविधियों में बदलाव आया है। इसलिए आज चुनौती यह है कि वन संरक्षण और आदिवासी समुदायों के पारंपरिक अधिकार एवं आजीविका के बीच संतुलन बनाया जाए।
इरुला जनजाति से संबंधित FAQ
1. इरुला जनजाति कौन है?
इरुला दक्षिण भारत की एक प्रमुख अनुसूचित जनजाति है, जिसका प्रमुख निवास तमिलनाडु में है तथा समुदाय के लोग केरल और कर्नाटक में भी पाए जाते हैं।
2. इरुला जनजाति कहाँ रहती है?
इरुला जनजाति मुख्य रूप से तमिलनाडु के वन एवं पहाड़ी क्षेत्रों में रहती है। इसके अलावा केरल और कर्नाटक में भी इसकी आबादी है।
3. इरुला जनजाति की भाषा क्या है?
इरुला समुदाय की पारंपरिक भाषा इरुला/इरुलर भाषा है, जो द्रविड़ भाषा परिवार से संबंधित है। केरल की जनगणना में Irula/Irular Mozhi का उल्लेख मिलता है।
4. क्या इरुला PVTG जनजाति है?
हाँ। भारत सरकार की राज्यवार सूची में तमिलनाडु के अंतर्गत Irular को PVTG के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
5. इरुला जनजाति का मुख्य व्यवसाय क्या है?
परंपरागत रूप से कृषि, कृषि मजदूरी, वन उत्पाद संग्रह और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित विभिन्न कार्य इनके जीवन का हिस्सा रहे हैं। वर्तमान में मजदूरी, कृषि और अन्य आधुनिक रोजगार भी महत्वपूर्ण हैं।
6. इरुला जनजाति की संस्कृति कैसी है?
इरुला संस्कृति प्रकृति, जंगल, सामुदायिक जीवन, मौखिक परंपरा, लोकगीत, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है।
7. केरल में इरुलर जनजाति कहाँ रहती है?
केरल में इरुलर समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण संकेंद्रण पलक्कड़ जिले के अट्टाप्पाडी क्षेत्र में है।
8. इरुला और इरुलर में क्या अंतर है?
दोनों नाम एक ही व्यापक समुदाय के लिए प्रयुक्त होते हैं। अलग-अलग राज्यों और आधिकारिक अभिलेखों में नामकरण में थोड़ा अंतर दिखाई देता है।
9. इरुला जनजाति की जनसंख्या कितनी है?
जनगणना 2011 के आधार पर तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में इरुला/सम्बंधित नामों वाली आबादी मिलाकर यह संख्या 2 लाख से अधिक थी। राज्यवार आधिकारिक आंकड़ों के लिए Census 2011 की A-11/ST तालिकाओं को देखना चाहिए।
10. इरुला जनजाति का सबसे अधिक निवास किस राज्य में है?
उपलब्ध 2011 जनगणना-आधारित आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु में इरुला समुदाय की सबसे बड़ी आबादी है।
निष्कर्ष
इरुला/इरुलर जनजाति दक्षिण भारत की महत्वपूर्ण आदिवासी समुदायों में से एक है। तमिलनाडु इसका प्रमुख निवास क्षेत्र है और केरल तथा कर्नाटक में भी इसकी उपस्थिति है। इसकी भाषा, पारंपरिक वन-ज्ञान, सांस्कृतिक परंपराएँ और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली इसकी विशिष्ट पहचान हैं। इरुला को तमिलनाडु की PVTG सूची में शामिल किया गया है, इसलिए इसके सामाजिक-आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण का विशेष महत्व है।
जानकारी के प्रमुख स्रोत
- Census of India 2011 — Office of the Registrar General & Census Commissioner, India (ORGI): तमिलनाडु की अनुसूचित जनजातियों और Irular संबंधी जनगणना तालिकाएँ।
- Census of India 2011 — Karnataka A-11/ST Tables: कर्नाटक में Irular और Iruliga सहित अनुसूचित जनजातियों के आंकड़े।
- Census of India 2011 — Kerala A-11/ST Tables: केरल में Irular/Irulan की आधिकारिक सूची।
- Census of India 2011 — Kerala ST-15 Mother Tongue Table: Irula/Irular Mozhi संबंधी भाषाई जानकारी।
- Kerala Scheduled Tribes Development Department: 2011 जनगणना के आधार पर राज्य की अनुसूचित जनजाति जनसंख्या संबंधी आधिकारिक आंकड़े।
- Government of India, Ministry of Tribal Affairs: राज्यवार PVTG सूची, जिसमें तमिलनाडु के अंतर्गत Irular शामिल है।
- Government of Kerala — Socio-Economic Status of Scheduled Tribes: केरल में इरुलर समुदाय, विशेषकर पलक्कड़ और अट्टाप्पाडी क्षेत्र से संबंधित सामाजिक-आर्थिक जानकारी।







0 Comments:
एक टिप्पणी भेजें