विश्व आदिवासी दिवस का संपूर्ण इतिहास (भाग–7) 1993 से 1995 तक की पूरी कहानी: अंतरराष्ट्रीय आदिवासी वर्ष से विश्व आदिवासी दिवस की आधिकारिक स्थापना तक
प्रस्तावना
- यदि 9 अगस्त 1982 को आयोजित Working Group on Indigenous Populations (WGIP) की पहली बैठक ने विश्व आदिवासी अधिकार आंदोलन की बौद्धिक नींव रखी, तो 1993 से 1995 का कालखंड उस आंदोलन का संस्थागत (Institutional) और वैश्विक (Global) रूप था।
- इसी अवधि में संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार पूरी दुनिया से अपील की कि मूल निवासी समुदायों के इतिहास, संस्कृति, भाषाओं और अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से समझा जाए। इसी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप 9 अगस्त को आधिकारिक रूप से International Day of the World's Indigenous Peoples घोषित किया गया।
1980 के दशक के अंत तक बदलता वैश्विक परिदृश्य
1980 के दशक के अंत तक कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हो चुके थे।
- WGIP नियमित रूप से बैठकें आयोजित कर रहा था।
- Martínez Cobo Study व्यापक रूप से चर्चित हो चुकी थी।
- ILO Convention No. 169 (1989) अपनाया जा चुका था।
- विभिन्न देशों के आदिवासी संगठन संयुक्त राष्ट्र के मंच पर अपनी भागीदारी बढ़ा रहे थे।
इससे यह स्पष्ट हो गया कि अब आदिवासी अधिकारों को वैश्विक विकास और मानवाधिकार एजेंडे का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
1992: एक ऐतिहासिक वर्ष
1992 कोलंबस की पहली यात्रा (1492) की 500वीं वर्षगांठ का वर्ष था।
इस अवसर पर विश्वभर में इतिहास, उपनिवेशवाद और मूल निवासी समुदायों की भूमिका पर व्यापक चर्चा हुई।
इसी वर्ष ग्वाटेमाला की आदिवासी मानवाधिकार कार्यकर्ता Rigoberta Menchú Tum को नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया।
इस सम्मान ने आदिवासी अधिकार आंदोलन को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संयुक्त राष्ट्र में नई पहल की आवश्यकता
WGIP की बैठकों और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय जागरूकता के बाद संयुक्त राष्ट्र के भीतर यह विचार मजबूत हुआ कि केवल विशेषज्ञ स्तर की चर्चाएँ पर्याप्त नहीं हैं।
आवश्यकता थी—
- वैश्विक जन-जागरूकता,
- सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी,
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग,
- और आदिवासी समुदायों के साथ साझेदारी बढ़ाने की।
इसी सोच ने 1993 को एक विशेष वर्ष घोषित करने का मार्ग प्रशस्त किया।
1993: International Year of the World's Indigenous People
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1993 को International Year of the World's Indigenous People घोषित किया।
आधिकारिक रूप से इसका केंद्रीय विषय था—
"A New Partnership" (नई साझेदारी)
अर्थात सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और आदिवासी समुदायों के बीच सहयोग और संवाद को मजबूत करना।
प्रमुख लक्ष्य
1. जागरूकता बढ़ाना
दुनिया भर में लोगों को मूल निवासी समुदायों के इतिहास और संस्कृति के बारे में जानकारी देना।
2. मानवाधिकारों को बढ़ावा देना
समानता, गरिमा और भागीदारी के सिद्धांतों को प्रोत्साहित करना।
3. सांस्कृतिक विविधता का सम्मान
विश्व की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण पर बल देना।
4. विकास में भागीदारी
आदिवासी समुदायों को विकास योजनाओं में सहभागी बनाने की आवश्यकता पर जोर देना।
1993 के दौरान क्या-क्या हुआ?
विभिन्न देशों में—
- सम्मेलन आयोजित किए गए,
- सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए,
- शैक्षणिक चर्चाएँ आयोजित की गईं,
- शोध प्रकाशित हुए,
- और सरकारों तथा नागरिक समाज के बीच संवाद बढ़ा।
संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों ने भी आदिवासी विषयों को अपने कार्यक्रमों में प्रमुखता दी।
क्या 1993 में ही विश्व आदिवासी दिवस घोषित हो गया था?
नहीं।
यह एक आम गलतफहमी है।
1993 को केवल International Year of the World's Indigenous People घोषित किया गया था।
विश्व आदिवासी दिवस की औपचारिक घोषणा बाद में हुई।
23 दिसंबर 1994: ऐतिहासिक निर्णय
23 दिसंबर 1994 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकार किया।
इस प्रस्ताव में निर्णय लिया गया कि—
प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को "International Day of the World's Indigenous Peoples" मनाया जाएगा।
9 अगस्त ही क्यों चुना गया?
यह तिथि किसी संयोग से नहीं चुनी गई।
9 अगस्त 1982 को जिनेवा में Working Group on Indigenous Populations (WGIP) की पहली बैठक आयोजित हुई थी।
उसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में संयुक्त राष्ट्र ने 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में निर्धारित किया।
घोषणा के पीछे मुख्य उद्देश्य
संयुक्त राष्ट्र चाहता था कि यह दिवस—
- आदिवासी समुदायों के प्रति सम्मान बढ़ाए,
- उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाए,
- सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहित करे,
- और सदस्य देशों को सकारात्मक नीतियाँ विकसित करने के लिए प्रेरित करे।
1995: पहला आधिकारिक आयोजन
1995 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के अंतर्गत विश्व आदिवासी दिवस के आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इन आयोजनों में—
- संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय,
- जिनेवा कार्यालय,
- विभिन्न सदस्य देश,
- विश्वविद्यालय,
- और नागरिक समाज संगठन
सक्रिय रूप से शामिल हुए।
क्या विश्व आदिवासी दिवस केवल एक उत्सव है?
नहीं।
इसका उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है।
यह दिवस निम्न विषयों पर वैश्विक चर्चा को प्रोत्साहित करता है—
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- भाषा संरक्षण
- पर्यावरण
- जलवायु परिवर्तन
- भूमि और संसाधन
- मानवाधिकार
- पारंपरिक ज्ञान
पहला अंतरराष्ट्रीय दशक (1995–2004)
1995 में संयुक्त राष्ट्र ने International Decade of the World's Indigenous People की शुरुआत भी की।
इस दशक का उद्देश्य था—
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना,
- नीतिगत सुधारों को प्रोत्साहित करना,
- और आदिवासी समुदायों की भागीदारी को मजबूत बनाना।
"A New Partnership" का वास्तविक अर्थ
- 1993 की थीम केवल एक नारा नहीं थी।
- इसका उद्देश्य था कि सरकारें आदिवासी समुदायों को विकास की प्रक्रिया में केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि साझेदार (Partners) के रूप में देखें।
- यह विचार आगे चलकर UNDRIP (2007) और FPIC (Free, Prior and Informed Consent) जैसे सिद्धांतों में भी दिखाई देता है।
वैश्विक प्रभाव
1993–1995 के बीच की घटनाओं के कारण—
- विश्वविद्यालयों में Indigenous Studies का विस्तार हुआ,
- अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने नए कार्यक्रम शुरू किए,
- आदिवासी प्रतिनिधित्व बढ़ा,
- और वैश्विक मीडिया में इन मुद्दों को अधिक स्थान मिलने लगा।
क्या सभी देशों की प्रतिक्रिया समान थी?
- नहीं, विभिन्न देशों की ऐतिहासिक, संवैधानिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण उनकी नीतियाँ और दृष्टिकोण अलग-अलग रहे।
- फिर भी संयुक्त राष्ट्र के इस कदम ने आदिवासी मुद्दों को वैश्विक एजेंडे में एक स्थायी स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1993–1995 की ऐतिहासिक विरासत
यदि 1982 ने संवाद की शुरुआत की थी, तो 1993–1995 ने उस संवाद को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी।
इसी अवधि में—
- आदिवासी अधिकारों को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता मिली,
- विश्व आदिवासी दिवस की स्थापना हुई,
- और आगे चलकर UNDRIP (2007) जैसी ऐतिहासिक घोषणा का मार्ग प्रशस्त हुआ।
निष्कर्ष
- 1993 से 1995 का कालखंड विश्व आदिवासी अधिकार आंदोलन के इतिहास में एक निर्णायक चरण था। 1993 के अंतरराष्ट्रीय वर्ष ने वैश्विक जागरूकता को नई दिशा दी, 23 दिसंबर 1994 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस घोषित किया और 1995 में इसका पहला आधिकारिक आयोजन हुआ। इस पूरी प्रक्रिया ने आदिवासी समुदायों के अधिकार, संस्कृति और पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थायी मान्यता दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 1993 को क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
क्योंकि संयुक्त राष्ट्र ने इसे International Year of the World's Indigenous People घोषित किया था।
प्रश्न 2: विश्व आदिवासी दिवस की घोषणा कब हुई?
23 दिसंबर 1994 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 9 अगस्त को International Day of the World's Indigenous Peoples के रूप में मनाने का निर्णय लिया।
प्रश्न 3: 9 अगस्त की तिथि क्यों चुनी गई?
क्योंकि 9 अगस्त 1982 को जिनेवा में Working Group on Indigenous Populations (WGIP) की पहली बैठक हुई थी।
प्रश्न 4: पहला आधिकारिक विश्व आदिवासी दिवस कब मनाया गया?
1995 में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के अंतर्गत इसका पहला आधिकारिक आयोजन किया गया।







0 Comments:
एक टिप्पणी भेजें