पाँचवीं अनुसूची क्या है? | अनुसूचित क्षेत्र, अनुच्छेद 244 और आदिवासी अधिकार

पाँचवीं अनुसूची क्या है? (Fifth Schedule in Hindi) – अनुसूचित क्षेत्रों और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की संपूर्ण जानकारी 

संविधान की पाँचवीं अनुसूची


  • पाँचवीं अनुसूची क्या है
  • Fifth Schedule of Indian Constitution
  • अनुच्छेद 244(1)
  • अनुसूचित क्षेत्र क्या है
  • जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC)
  • PESA अधिनियम
  • आदिवासी अधिकार
  • Scheduled Areas in India
  • Tribal Rights in India
  • संविधान की पाँचवीं अनुसूची
  • प्रस्तावना

    भारत विश्व के उन देशों में से एक है जहाँ आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक विविधता अत्यंत समृद्ध है। देश के अनेक भागों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदायों की अपनी विशिष्ट भाषा, संस्कृति, सामाजिक व्यवस्था, परंपराएँ और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित जीवन शैली है।

    संविधान निर्माताओं ने यह महसूस किया कि यदि इन समुदायों को विशेष संवैधानिक सुरक्षा नहीं दी गई, तो वे आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से पिछड़ सकते हैं। इसी उद्देश्य से भारतीय संविधान में पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) का प्रावधान किया गया।

    यह अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन, आदिवासी भूमि की सुरक्षा तथा जनजातीय हितों के संरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था प्रदान करती है।


    पाँचवीं अनुसूची क्या है?

    पाँचवीं अनुसूची भारतीय संविधान का वह भाग है जो उन राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) के प्रशासन और वहाँ निवास करने वाली अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण से संबंधित है जहाँ छठी अनुसूची लागू नहीं होती।

    इसका मुख्य उद्देश्य है—

    • आदिवासी भूमि की रक्षा
    • प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
    • सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा
    • आर्थिक एवं सामाजिक विकास
    • प्रशासनिक संरक्षण
    • बाहरी शोषण से बचाव

    पाँचवीं अनुसूची का संवैधानिक आधार

    पाँचवीं अनुसूची का संबंध भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1) से है।

    अनुच्छेद 244(1) के अनुसार पाँचवीं अनुसूची उन राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू होती है जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित किया जाता है।


    पाँचवीं अनुसूची का ऐतिहासिक विकास

    1. ब्रिटिश शासन काल

    ब्रिटिश शासन के दौरान कई आदिवासी क्षेत्रों को सामान्य प्रशासन से अलग रखा गया था।

    1935 के भारत शासन अधिनियम (Government of India Act, 1935) में भी "Excluded Areas" और "Partially Excluded Areas" की अवधारणा थी।

    यही व्यवस्था बाद में संविधान निर्माण के समय पाँचवीं अनुसूची का आधार बनी।


    2. संविधान सभा की सोच

    संविधान सभा ने माना कि आदिवासी समाज की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए सामान्य प्रशासन पर्याप्त नहीं होगा।

    इसलिए विशेष प्रशासनिक व्यवस्था का प्रावधान किया गया ताकि विकास और संरक्षण दोनों साथ-साथ चल सकें।


    पाँचवीं अनुसूची का उद्देश्य

    पाँचवीं अनुसूची के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—

    1. आदिवासी समुदायों की सुरक्षा

    अनुसूचित जनजातियों को सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से सुरक्षित रखना।

    2. भूमि की रक्षा

    आदिवासियों की भूमि बाहरी व्यक्तियों के हाथों में न जाए।

    3. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण

    जंगल, जल और जमीन पर स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा।

    4. सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना

    भाषा, परंपरा, रीति-रिवाज और जीवन शैली का संरक्षण।

    5. संतुलित विकास

    विकास योजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना।


    अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Areas) क्या हैं?

    अनुसूचित क्षेत्र वे क्षेत्र हैं जिन्हें राष्ट्रपति विशेष अधिसूचना द्वारा घोषित करते हैं।

    इन क्षेत्रों की पहचान निम्न आधारों पर की जाती है—

    • आदिवासी आबादी का अनुपात
    • भौगोलिक अलगाव
    • आर्थिक पिछड़ापन
    • सामाजिक परिस्थितियाँ
    • प्रशासनिक आवश्यकता

    अनुसूचित क्षेत्रों की घोषणा कौन करता है?

    भारतीय संविधान के अनुसार—

    • राष्ट्रपति किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित कर सकते हैं।
    • उसका विस्तार या सीमांकन बदल सकते हैं।
    • आवश्यकता पड़ने पर अनुसूचित क्षेत्र समाप्त भी कर सकते हैं।

    पाँचवीं अनुसूची किन राज्यों में लागू होती है?

    वर्तमान में विभिन्न रूपों में निम्न राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू है—

    • छत्तीसगढ़
    • झारखंड
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • गुजरात
    • राजस्थान
    • ओडिशा
    • तेलंगाना
    • आंध्र प्रदेश
    • हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्र

    राज्यपाल की विशेष शक्तियाँ

    पाँचवीं अनुसूची राज्यपाल को असाधारण अधिकार प्रदान करती है।

    1. कानून लागू करने में परिवर्तन

    राज्यपाल किसी कानून को अनुसूचित क्षेत्र में—

    • पूर्ण रूप से लागू कर सकते हैं
    • आंशिक रूप से लागू कर सकते हैं
    • संशोधित रूप में लागू कर सकते हैं
    • लागू न करने का निर्णय ले सकते हैं

    2. विशेष विनियम बनाना

    राज्यपाल निम्न विषयों पर नियम बना सकते हैं—

    • भूमि हस्तांतरण रोकना
    • साहूकारी नियंत्रण
    • आदिवासी भूमि की सुरक्षा
    • स्थानीय प्रशासन

    3. राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजना

    राज्यपाल समय-समय पर अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन की रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजते हैं।


    जनजातीय सलाहकार परिषद (Tribal Advisory Council - TAC)

    पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत TAC का गठन किया जाता है।

    गठन

    • अधिकतम 20 सदस्य
    • लगभग तीन-चौथाई सदस्य अनुसूचित जनजाति के विधायक

    प्रमुख कार्य

    • आदिवासी कल्याण पर सलाह देना
    • विकास योजनाओं की समीक्षा
    • सरकार को नीति संबंधी सुझाव देना

    पाँचवीं अनुसूची की प्रमुख विशेषताएँ

    • अनुसूचित क्षेत्रों के लिए अलग प्रशासनिक व्यवस्था
    • राज्यपाल को विशेष अधिकार
    • राष्ट्रपति को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने की शक्ति
    • TAC की स्थापना
    • भूमि संरक्षण
    • आदिवासी हितों की सुरक्षा

    PESA अधिनियम 1996 और पाँचवीं अनुसूची

    Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996 को पाँचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था को स्थानीय परंपराओं के अनुरूप लागू करने के लिए बनाया गया।

    ग्राम सभा को दिए गए अधिकार

    • लघु वन उपज पर नियंत्रण
    • प्राकृतिक संसाधनों में भागीदारी
    • स्थानीय योजनाओं की स्वीकृति
    • परंपरागत व्यवस्थाओं का संरक्षण
    • भूमि अधिग्रहण पर परामर्श

    पाँचवीं अनुसूची और वन अधिकार अधिनियम 2006

    Forest Rights Act, 2006 ने आदिवासी समुदायों को—

    • व्यक्तिगत वन अधिकार
    • सामुदायिक वन अधिकार
    • पारंपरिक उपयोग अधिकार

    जैसे महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान किए।

    इससे पाँचवीं अनुसूची के उद्देश्यों को और मजबूती मिली।


    पाँचवीं अनुसूची के लाभ

    1. भूमि सुरक्षा

    भूमि हस्तांतरण पर नियंत्रण।

    2. सांस्कृतिक संरक्षण

    परंपराओं की रक्षा।

    3. सामाजिक न्याय

    कमजोर वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा।

    4. स्थानीय भागीदारी

    ग्राम सभा की भूमिका मजबूत होती है।

    5. संतुलित विकास

    स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएँ बनाई जाती हैं।


    प्रमुख चुनौतियाँ

    • कानूनों का कमजोर क्रियान्वयन
    • अवैध भूमि अधिग्रहण
    • खनन परियोजनाओं से विस्थापन
    • TAC की सीमित प्रभावशीलता
    • ग्राम सभा की उपेक्षा
    • प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी

    पाँचवीं अनुसूची और छठी अनुसूची में अंतर

    आधारपाँचवीं अनुसूचीछठी अनुसूची
    लागू क्षेत्रअधिकांश अनुसूचित क्षेत्रपूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्य
    प्रशासनराज्यपाल आधारितस्वायत्त जिला परिषद
    स्वशासनसीमितअधिक व्यापक
    विधायी अधिकारसीमितअपेक्षाकृत अधिक

    सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय

    समता बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1997)

    इस ऐतिहासिक निर्णय में आदिवासी भूमि की सुरक्षा और निजी कंपनियों को भूमि हस्तांतरण से जुड़े महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित किए गए।

    अन्य न्यायिक टिप्पणियाँ

    विभिन्न मामलों में न्यायालयों ने ग्राम सभा की भूमिका और आदिवासी अधिकारों के संरक्षण पर बल दिया है।


    प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

    • पाँचवीं अनुसूची – अनुच्छेद 244(1)
    • अनुसूचित क्षेत्र घोषित करता है – राष्ट्रपति
    • TAC – अधिकतम 20 सदस्य
    • PESA अधिनियम – 1996
    • उद्देश्य – अनुसूचित जनजातियों का संरक्षण और प्रशासन

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

    प्रश्न 1: पाँचवीं अनुसूची क्या है?

    उत्तर: यह भारतीय संविधान का प्रावधान है जो अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन एवं संरक्षण से संबंधित है।


    प्रश्न 2: पाँचवीं अनुसूची किस अनुच्छेद से संबंधित है?

    उत्तर: अनुच्छेद 244(1)।


    प्रश्न 3: अनुसूचित क्षेत्र कौन घोषित करता है?

    उत्तर: भारत के राष्ट्रपति।


    प्रश्न 4: TAC का पूरा नाम क्या है?

    उत्तर: Tribal Advisory Council (जनजातीय सलाहकार परिषद)।


    प्रश्न 5: PESA अधिनियम कब लागू हुआ?

    उत्तर: वर्ष 1996 में।


    निष्कर्ष

    पाँचवीं अनुसूची केवल एक संवैधानिक प्रावधान नहीं, बल्कि भारत के आदिवासी समुदायों के अधिकारों, संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए और ग्राम सभाओं को वास्तविक शक्ति मिले, तो अनुसूचित क्षेत्रों का विकास अधिक न्यायपूर्ण, सहभागी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

    पाँचवीं अनुसूची, Fifth Schedule, Fifth Schedule in Hindi, अनुसूचित क्षेत्र, अनुच्छेद 244, Tribal Advisory Council, TAC, PESA Act, आदिवासी अधिकार, Scheduled Areas, Constitution of India, ST Rights, UPSC Notes, PSC Notes