तेलंगाना की जनजातियाँ: इतिहास, जनजातीय समाज, संस्कृति और जीवन का विस्तृत अध्ययन
तेलंगाना दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है, जहाँ अनेक आदिवासी/अनुसूचित जनजाति समुदाय लंबे समय से अपनी विशिष्ट सामाजिक परंपराओं, भाषाओं, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े जीवन के साथ निवास करते हैं। राज्य की जनजातीय आबादी मुख्य रूप से उत्तरी, पूर्वी और वन क्षेत्रों के जिलों में अधिक केंद्रित है।
2011 की जनगणना के अनुसार तेलंगाना में अनुसूचित जनजातियों की आबादी 31,77,940 थी, जो राज्य की कुल आबादी का लगभग 9.1% थी। राज्य के आधिकारिक सांख्यिकीय प्रकाशन में भी यही आंकड़ा दिया गया है।
तेलंगाना की जनजातीय दुनिया एक जैसी नहीं है। यहाँ गोंड, कोलाम, कोया, चेंचू, नायकपोड, प्रधान, लम्बाडी/बंजारा आदि अलग-अलग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले समुदाय हैं।
तेलंगाना में अनुसूचित जनजातियों की सूची
📚 तेलंगाना की अनुसूचित जनजातियाँ:
तेलंगाना से संबंधित अनुसूचित जनजातियों की सूची में
32 प्रविष्टियाँ मिलती हैं। कई प्रविष्टियों में एक से
अधिक नाम अथवा उपसमुदाय शामिल हैं। इसलिए “32 जनजातियाँ” कहने और सूची
में दिखाई देने वाले समुदायों अथवा उपनामों की संख्या में अंतर हो सकता है।
क्र.
अनुसूचित जनजाति / समुदाय
1
अंध, साधु अंध
2
बगाता
3
भील
4
चेंचू
5
गडाबा
6
गोंड, नायकपोड, राजगोंड, कोइतूर
7
गौडू
8
हिल रेड्डी
9
जटापु
10
कम्मारा
11
कट्टुनायकन
12
कोलाम, कोलावर
13
कोंडा डोरा, कुबी
14
कोंडा कापू
15
कोंडारेड्डी
16
कोंध समूह
17
कोटिया समूह
18
कोया समूह
19
कुलिया
20
मन्ना धोरा
21
मुखा धोरा, नूका धोरा
22
नायक
23
प्रधान
24
पोरजा, परंगीपेरजा
25
रेड्डी डोरा
26
रोना, रेना
27
सवारा समूह
28
सुगाली, लम्बाडी, बंजारा
29
थोटी
30
येनादी समूह
31
येरुकुला समूह
32
नक्कला, कुर्वीकरण
📌 महत्वपूर्ण जानकारी:
यह सूची सरकारी/आधिकारिक स्रोतों में प्रयुक्त अनुसूचित जनजाति सूची पर
आधारित है। किसी समुदाय की स्थानीय पहचान, नाम, उपनाम और सरकारी
ST सूची में उसका उल्लेख हमेशा एक ही बात नहीं होते। इसलिए
जनजातियों का अध्ययन करते समय इन पहलुओं को अलग-अलग समझना अधिक उचित है।
तेलंगाना में अनुसूचित जनजातियों की सूची
तेलंगाना से संबंधित अनुसूचित जनजातियों की सूची में 32 प्रविष्टियाँ मिलती हैं। कई प्रविष्टियों में एक से अधिक नाम अथवा उपसमुदाय शामिल हैं। इसलिए “32 जनजातियाँ” कहने और सूची में दिखाई देने वाले समुदायों अथवा उपनामों की संख्या में अंतर हो सकता है।
| क्र. | अनुसूचित जनजाति / समुदाय |
|---|---|
| 1 | अंध, साधु अंध |
| 2 | बगाता |
| 3 | भील |
| 4 | चेंचू |
| 5 | गडाबा |
| 6 | गोंड, नायकपोड, राजगोंड, कोइतूर |
| 7 | गौडू |
| 8 | हिल रेड्डी |
| 9 | जटापु |
| 10 | कम्मारा |
| 11 | कट्टुनायकन |
| 12 | कोलाम, कोलावर |
| 13 | कोंडा डोरा, कुबी |
| 14 | कोंडा कापू |
| 15 | कोंडारेड्डी |
| 16 | कोंध समूह |
| 17 | कोटिया समूह |
| 18 | कोया समूह |
| 19 | कुलिया |
| 20 | मन्ना धोरा |
| 21 | मुखा धोरा, नूका धोरा |
| 22 | नायक |
| 23 | प्रधान |
| 24 | पोरजा, परंगीपेरजा |
| 25 | रेड्डी डोरा |
| 26 | रोना, रेना |
| 27 | सवारा समूह |
| 28 | सुगाली, लम्बाडी, बंजारा |
| 29 | थोटी |
| 30 | येनादी समूह |
| 31 | येरुकुला समूह |
| 32 | नक्कला, कुर्वीकरण |
यह सूची सरकारी/आधिकारिक स्रोतों में प्रयुक्त अनुसूचित जनजाति सूची पर आधारित है। किसी समुदाय की स्थानीय पहचान, नाम, उपनाम और सरकारी ST सूची में उसका उल्लेख हमेशा एक ही बात नहीं होते। इसलिए जनजातियों का अध्ययन करते समय इन पहलुओं को अलग-अलग समझना अधिक उचित है।
2. तेलंगाना में जनजातीय आबादी
2011 Census के अनुसार तेलंगाना में ST आबादी 31.78 लाख थी। राज्य की कुल आबादी में उनका हिस्सा लगभग 9.1% था। ग्रामीण क्षेत्रों में ST आबादी का बड़ा हिस्सा निवास करता था।
जिलावार आंकड़ों में जनजातीय आबादी का बड़ा संकेंद्रण विशेष रूप से राज्य के उत्तरी और पूर्वी जिलों में दिखाई देता है।
तेलंगाना में जनजातीय जनसंख्या – प्रमुख जिले
नीचे तेलंगाना के प्रमुख जिलों में अनुसूचित जनजाति (ST) की जनसंख्या और संबंधित जिले की कुल आबादी में ST के प्रतिशत का विवरण दिया गया है।
| जिला | ST आबादी | कुल आबादी में ST प्रतिशत |
|---|---|---|
| महबूबाबाद | 2,92,778 | 37.8% |
| भद्राद्री कोठागुडेम | 3,92,034 | 36.7% |
| आदिलाबाद | 2,24,622 | 31.7% |
| मुलुगु | 86,352 | 29.3% |
| कुमारम भीम आसिफाबाद | 1,33,627 | 25.9% |
| खम्मम | 1,99,342 | 14.2% |
| वारंगल | 1,06,860 | 14.5% |
ये आंकड़े 2011 Census पर आधारित तेलंगाना के आधिकारिक Statistical Abstract में दिए गए आंकड़ों के अनुसार हैं। इन्हें वर्तमान जनसंख्या के आंकड़े के रूप में नहीं समझना चाहिए।
3. तेलंगाना की प्रमुख जनजातियाँ
तेलंगाना में अनेक जनजातीय समुदाय हैं, लेकिन जनजातीय अध्ययन की दृष्टि से गोंड, कोलाम, कोया, चेंचू, नायकपोड, प्रधान और लम्बाडी/बंजारा जैसे समुदाय विशेष महत्व रखते हैं।
3.1 गोंड
गोंड मध्य भारत की प्रमुख आदिवासी समुदायों में से एक हैं और तेलंगाना के उत्तरी हिस्सों में भी उनका महत्वपूर्ण निवास रहा है।
विशेष रूप से पुराने आदिलाबाद क्षेत्र और वर्तमान कुमारम भीम आसिफाबाद, आदिलाबाद, निर्मल तथा आसपास के क्षेत्रों में गोंड समाज की उपस्थिति महत्वपूर्ण है।
तेलंगाना की आधिकारिक ST सूची में गोंड के साथ नायकपोड, राजगोंड और कोइतूर नाम भी सूचीबद्ध हैं।
गोंड समाज की सामाजिक संरचना, पारंपरिक संस्थाएँ, लोककथाएँ, कृषि, वन से संबंध और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराएँ आदिवासी अध्ययन के महत्वपूर्ण विषय हैं।
4. कोलाम जनजाति
कोलाम समुदाय मुख्य रूप से तेलंगाना के उत्तरी आदिवासी क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।
सरकारी ST सूची में इसे Kolam, Kolawar के रूप में दर्ज किया गया है।
कोलाम समाज का पारंपरिक जीवन जंगल, कृषि और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा रहा है। इनके अध्ययन में भाषा, पारंपरिक ज्ञान, धार्मिक विश्वास, सामाजिक संगठन और आर्थिक परिवर्तन महत्वपूर्ण विषय हैं।
5. कोया जनजाति
कोया तेलंगाना के महत्वपूर्ण आदिवासी समुदायों में से एक है। इनका संबंध विशेष रूप से गोदावरी नदी क्षेत्र और राज्य के पूर्वी वन क्षेत्रों से जोड़ा जाता है।
सरकारी सूची में कोया के साथ कई उपनाम/समुदाय नाम दिए गए हैं, जैसे:
- डोली कोया
- गुट्टा कोया
- कम्मारा कोया
- मुसारा कोया
- ओड्डी कोया
- पट्टीदी कोया
- राजह
- राशा कोया
- लिंगधारी कोया
- कोट्टू कोया
- राजकोया आदि।
कोया समाज की अर्थव्यवस्था में कृषि, वन उत्पाद, मजदूरी तथा स्थानीय संसाधनों की भूमिका रही है।
6. चेंचू जनजाति
चेंचू दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण आदिवासी समुदायों में से एक हैं और तेलंगाना के वन क्षेत्रों से उनका ऐतिहासिक संबंध रहा है।
इनका जीवन लंबे समय तक जंगल आधारित संसाधनों, शिकार-संग्रह, वन उपज और बाद में कृषि तथा अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़ा रहा।
चेंचू समुदाय के अध्ययन में वन, पारंपरिक ज्ञान, खाद्य-संग्रह, आवास, भाषा और आधुनिक विकास के प्रभाव विशेष महत्व रखते हैं।
तेलंगाना की ST सूची में चेंचू स्पष्ट रूप से शामिल है।
7. नायकपोड जनजाति
नायकपोड समुदाय मुख्यतः तेलंगाना के उत्तरी क्षेत्रों में पाया जाता है।
ST सूची में यह Gond, Naikpod, Rajgond, Koitur वाली प्रविष्टि में दर्ज है।
नायकपोड समाज की अपनी सामाजिक परंपराएँ, स्थानीय देवी-देवताओं से संबंधित मान्यताएँ, लोक-संस्कृति और कृषि आधारित जीवन का अध्ययन तेलंगाना के आदिवासी इतिहास को समझने में उपयोगी है।
8. प्रधान जनजाति
प्रधान (Pardhan) का संबंध मध्य भारतीय आदिवासी सांस्कृतिक क्षेत्र से भी देखा जाता है और तेलंगाना के गोंड बहुल क्षेत्रों में भी इनकी उपस्थिति का उल्लेख मिलता है।
प्रधान समुदाय के पारंपरिक सांस्कृतिक जीवन में लोककथा, संगीत और मौखिक परंपरा का विशेष महत्व रहा है।
इसलिए आदिवासी इतिहास लिखते समय केवल लिखित अभिलेखों पर निर्भर रहने के बजाय मौखिक इतिहास और समुदाय की अपनी परंपराओं को भी महत्व देना आवश्यक है।
9. लम्बाडी/बंजारा समुदाय
तेलंगाना में सुगाली, लम्बाडी और बंजारा नाम ST सूची में एक ही प्रविष्टि के अंतर्गत आते हैं।
बंजारा/लम्बाडी समुदाय का इतिहास भारत के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी गतिशीलता और व्यापारिक परंपराओं से जुड़ा रहा है।
इनकी संस्कृति में:
- विशिष्ट पारंपरिक वेशभूषा
- आभूषण
- लोकगीत
- नृत्य
- सामुदायिक उत्सव
- पारंपरिक सामाजिक संगठन
महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
10. थोटी जनजाति
थोटी समुदाय का उल्लेख तेलंगाना की ST सूची में विशेष क्षेत्रीय सीमा के साथ किया गया है। पुराने प्रशासनिक जिलों के संदर्भ में सूची में आदिलाबाद, हैदराबाद, करीमनगर, खम्मम, महबूबनगर, मेडक, नलगोंडा, निजामाबाद और वारंगल आदि जिलों का उल्लेख मिलता है।
पुराने जिला नामों को आज के जिलों से मिलाते समय सावधानी जरूरी है क्योंकि तेलंगाना में बाद में बड़े पैमाने पर जिला पुनर्गठन हुआ है।
तेलंगाना की जनजातीय संस्कृति
तेलंगाना की जनजातीय संस्कृति को एक ही संस्कृति के रूप में नहीं देखा जा सकता। अलग-अलग समुदायों की अपनी भाषा, परंपरा, देवी-देवता, सामाजिक संगठन, विवाह पद्धति, नृत्य और लोकगीत हैं।
प्रमुख सांस्कृतिक विशेषताएँ
लोकगीत और संगीत:
जनजातीय समाज में मौखिक परंपरा के माध्यम से इतिहास, वीरगाथाएँ, धार्मिक कथाएँ और सामाजिक स्मृतियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही हैं।
नृत्य:
विभिन्न जनजातीय समुदायों में सामुदायिक उत्सवों और धार्मिक अवसरों पर पारंपरिक नृत्य किए जाते हैं।
पारंपरिक वेशभूषा:
विशेष रूप से लम्बाडी/बंजारा समाज की पारंपरिक पोशाक और आभूषण अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं।
लोककथाएँ:
कई जनजातीय समाजों में इतिहास लिखित दस्तावेजों से अधिक मौखिक परंपराओं में संरक्षित रहा है।
जनजातीय भाषा और बोलियाँ
तेलंगाना का जनजातीय भाषाई परिदृश्य काफी विविध है।
गोंड और उनसे संबंधित समुदायों में गोंडी जैसी भाषाई परंपराओं का महत्व है। कोया समुदाय की अपनी भाषाई पहचान है, जबकि अन्य समुदाय तेलुगु, मराठी, गोंडी और अन्य स्थानीय भाषाओं/बोलियों के संपर्क में भी रहते हैं।
इसलिए किसी जनजाति की भाषा को केवल "स्थानीय तेलुगु की बोली" मान लेना हमेशा उचित नहीं है। प्रत्येक समुदाय की भाषाई पहचान का अध्ययन अलग से करना चाहिए।
जनजातीय अर्थव्यवस्था
तेलंगाना के आदिवासी क्षेत्रों की पारंपरिक अर्थव्यवस्था में निम्न गतिविधियों का महत्व रहा है:
- वर्षा आधारित कृषि
- वन उपज संग्रह
- पशुपालन
- मजदूरी
- छोटे स्तर का व्यापार
- स्थानीय हस्तशिल्प
- बांस एवं वन आधारित गतिविधियाँ
समय के साथ शिक्षा, सड़क, बाजार, सरकारी योजनाओं और रोजगार के अवसरों ने जनजातीय अर्थव्यवस्था में परिवर्तन किया है।
जंगल और जनजातीय जीवन
तेलंगाना के कई आदिवासी समुदायों का जंगलों से ऐतिहासिक संबंध रहा है।
जंगल केवल आर्थिक संसाधन नहीं बल्कि कई समुदायों के लिए:
- भोजन
- औषधीय पौधे
- ईंधन
- आवास सामग्री
- धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल
- आजीविका
का स्रोत रहे हैं।
इसी कारण जनजातीय अध्ययन में वन अधिकार, सामुदायिक संसाधन, भूमि, विस्थापन और आजीविका महत्वपूर्ण विषय बन जाते हैं।
शिक्षा की स्थिति
2011 के आंकड़ों के अनुसार तेलंगाना के ST समुदायों की कुल साक्षरता दर लगभग 49.51% थी। पुरुष साक्षरता लगभग 59.49% और महिला साक्षरता लगभग 39.44% थी।
इन आंकड़ों को वर्तमान स्थिति मानना उचित नहीं होगा क्योंकि वे 2011 Census से संबंधित हैं। वर्तमान स्थिति जानने के लिए नवीनतम आधिकारिक सर्वेक्षण/प्रशासनिक आंकड़ों का उपयोग करना चाहिए।
तेलंगाना में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए आवासीय शिक्षा संस्थानों की व्यवस्था भी विकसित की गई है। Telangana Tribal Welfare Residential Educational Institutions Society वर्तमान में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए आवासीय शैक्षणिक संस्थानों का संचालन करती है।
तेलंगाना सरकार और जनजातीय कल्याण
तेलंगाना में Tribal Welfare Department अनुसूचित जनजातियों से संबंधित शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, बुनियादी ढाँचे और संवैधानिक सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राज्य सरकार के अनुसार विभाग ST आरक्षण, Scheduled Areas में विशेष प्रावधान तथा जनजातीय विकास योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ा है।
राज्य के आधिकारिक दस्तावेज में ST आबादी के विकास के लिए Special Development Fund (SDF) Act, 2017 का भी उल्लेख है।
अनुसूचित क्षेत्र और जनजातीय प्रशासन
तेलंगाना के कुछ आदिवासी बहुल क्षेत्र संवैधानिक और प्रशासनिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं।
इन क्षेत्रों में भूमि, प्राकृतिक संसाधन, स्थानीय प्रशासन और जनजातीय समुदायों के अधिकारों से संबंधित प्रावधान महत्वपूर्ण हैं।
इस विषय को समझने के लिए आगे इन कानूनों का अध्ययन किया जा सकता है:
- संविधान की पाँचवीं अनुसूची
- Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996 — PESA
- Forest Rights Act, 2006
- भूमि एवं वन संबंधी राज्य कानून
तेलंगाना की जनजातियों के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
जनजातीय समाज के सामने आने वाली समस्याएँ सभी समुदायों में समान नहीं हैं। फिर भी कई क्षेत्रों में निम्न विषय महत्वपूर्ण हैं:
1. शिक्षा
दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उच्च शिक्षा तक पहुँच महत्वपूर्ण मुद्दा है।
2. स्वास्थ्य
दूरस्थ वन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच एक चुनौती हो सकती है।
3. भूमि और वन अधिकार
भूमि अधिकार और वन संसाधनों तक पहुँच कई जनजातीय परिवारों की आजीविका से सीधे जुड़ी है।
4. रोजगार
पारंपरिक आजीविका में बदलाव के कारण नए और स्थायी रोजगार के अवसर महत्वपूर्ण हैं।
5. भाषा और संस्कृति
आधुनिक शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन के साथ कई पारंपरिक भाषाओं और मौखिक परंपराओं के संरक्षण का प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है।
तेलंगाना की जनजातियों का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है?
तेलंगाना की जनजातियों का अध्ययन केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। यह भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
एक विस्तृत जनजातीय अध्ययन में केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि कौन-सी जनजाति किस जिले में रहती है। इसके साथ यह भी देखना चाहिए कि:
उनका इतिहास क्या है?
उनकी अपनी भाषा क्या है?
उनकी सामाजिक व्यवस्था कैसी है?
उनकी अर्थव्यवस्था किन संसाधनों पर निर्भर है?
उनकी मौखिक परंपराएँ क्या कहती हैं?
आधुनिक शिक्षा और प्रशासन से उनके जीवन में क्या बदलाव आए हैं?
इसी दृष्टिकोण से तेलंगाना की जनजातियों का अध्ययन अधिक व्यापक और उपयोगी बनता है।
निष्कर्ष
तेलंगाना की जनजातीय दुनिया अनेक समुदायों, भाषाओं, परंपराओं और ऐतिहासिक अनुभवों से मिलकर बनी है। गोंड, कोलाम, कोया, चेंचू, नायकपोड, प्रधान, लम्बाडी/बंजारा सहित अनेक समुदाय राज्य की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
2011 Census के अनुसार राज्य में ST आबादी लगभग 31.78 लाख, अर्थात कुल आबादी का लगभग 9.1%, थी।
तेलंगाना की जनजातियों को समझने के लिए सरकारी आंकड़ों के साथ समुदाय की मौखिक परंपरा, स्थानीय इतिहास, भाषा, लोकसाहित्य और समुदाय की अपनी आवाज को भी अध्ययन का हिस्सा बनाना जरूरी है। यही दृष्टिकोण किसी जनजातीय अध्ययन को केवल सामान्य जानकारी से आगे ले जाकर शोधपरक बनाता है।







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