हरियाणा की जनजातियाँ: जनसंख्या, संस्कृति, परंपरा, रहन-सहन, शिक्षा और व्यवसाय की पूरी जानकारी
हरियाणा भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित एक प्रमुख राज्य है। यह राज्य अपनी कृषि संस्कृति, ग्रामीण जीवन, लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक खानपान और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है। हरियाणा में विभिन्न सामाजिक समुदाय रहते हैं, जिनमें कुछ ऐसे समुदाय भी शामिल हैं जिनका इतिहास पारंपरिक रूप से घुमंतू जीवन, पशुपालन, हस्तशिल्प तथा पारंपरिक सेवाओं से जुड़ा रहा है।
हालाँकि, हरियाणा की जनजातियों का अध्ययन करते समय एक महत्वपूर्ण संवैधानिक तथ्य समझना आवश्यक है। भारत की जनगणना 2011 और जनजातीय कार्य मंत्रालय के प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार, हरियाणा में अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe–ST) के रूप में अधिसूचित आबादी दर्ज नहीं थी। इसलिए हरियाणा के लिए अन्य राज्यों की तरह अनुसूचित जनजातियों की आधिकारिक सूची और कुल ST जनसंख्या प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
इसके बावजूद, हरियाणा में विमुक्त जातियों, घुमंतू समुदायों और पारंपरिक रूप से वंचित रहे समूहों का अध्ययन सामाजिक इतिहास, संस्कृति और आजीविका को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
इस लेख में हम हरियाणा के इन समुदायों की सामाजिक स्थिति, इतिहास, संस्कृति, रहन-सहन, खानपान, शिक्षा और व्यवसाय का परिचय प्राप्त करेंगे।
हरियाणा में विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों की जनसंख्या कितनी है?
हरियाणा की जनजातीय जनसंख्या के बारे में जानकारी देते समय अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
हरियाणा की जनजातीय एवं विमुक्त-घुमंतू समुदाय संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| राज्य | हरियाणा |
| आधिकारिक अनुसूचित जनजाति (ST) की स्थिति | हरियाणा में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या दर्ज नहीं है। आधिकारिक जनगणना सामग्री में भी हरियाणा के लिए अनुसूचित जनजाति नहीं होने का उल्लेख मिलता है। |
| हरियाणा में विमुक्त जातियाँ | राज्य में विमुक्त एवं विमुक्त जनजाति/समुदायों से संबंधित अलग-अलग प्रशासनिक सूचियाँ और कल्याणकारी व्यवस्थाएँ उपलब्ध हैं। |
| राज्य सरकार द्वारा अलग से सूचीबद्ध | विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) की श्रेणी से अलग प्रशासनिक एवं कल्याणकारी संदर्भ में सूचीबद्ध किया जाता है। |
| घुमंतू समुदाय | हरियाणा में विभिन्न घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदाय पाए जाते हैं। इन समुदायों की सामाजिक एवं प्रशासनिक पहचान अलग-अलग श्रेणियों में हो सकती है। |
| विभिन्न समुदाय और उपसमूह | हरियाणा में विभिन्न विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदाय और उनके उपसमूह पाए जाते हैं। सरकारी सूचियों में इनके नाम अलग-अलग रूपों में दर्ज हो सकते हैं। |
| जनजातियों की कुल जनसंख्या | सभी विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों को मिलाकर कोई एकल, आधिकारिक रूप से सत्यापित जनसंख्या आँकड़ा इस तालिका में उपलब्ध नहीं है। |
| प्रमुख आधिकारिक स्रोत | भारत की जनगणना तथा हरियाणा सरकार का सामाजिक न्याय, अधिकारिता, कल्याण एवं अंत्योदय विभाग। |
हरियाणा में अनुसूचित जनजाति (ST) और विमुक्त/घुमंतू समुदायों को एक ही श्रेणी मानना उचित नहीं है। 2011 की आधिकारिक जनगणना सामग्री में हरियाणा के लिए अनुसूचित जनजाति नहीं होने का उल्लेख मिलता है। दूसरी ओर, हरियाणा सरकार विमुक्त जनजातियों तथा अन्य संबंधित समुदायों के कल्याण के लिए योजनाएँ एवं प्रशासनिक व्यवस्था संचालित करती है।
क्या हरियाणा में आदिवासी समुदाय नहीं रहते?
इस प्रश्न का उत्तर सावधानी से समझना चाहिए। किसी समुदाय का सांस्कृतिक या ऐतिहासिक रूप से आदिवासी, घुमंतू अथवा पारंपरिक समुदाय होना और उसका संविधान के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित होना अलग-अलग बातें हैं।
हरियाणा में विमुक्त जातियों और घुमंतू समुदायों का अस्तित्व है। राज्य सरकार ने ऐसे समुदायों की पहचान और कल्याण के लिए अलग व्यवस्थाएँ भी बनाई हैं। लेकिन किसी समुदाय को केवल उसकी जीवनशैली, परंपरा या सामाजिक पहचान के आधार पर अनुसूचित जनजाति नहीं माना जा सकता।
हरियाणा के प्रमुख विमुक्त एवं घुमंतू समुदाय
हरियाणा सरकार के विमुक्त एवं घुमंतू जनजातियों से संबंधित आधिकारिक पृष्ठ पर कई समुदायों का उल्लेख मिलता है। इनमें से कुछ समुदायों की राज्य में अनुसूचित जाति या पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत स्थिति भी बताई गई है।
1. बावरिया समुदाय
बावरिया समुदाय का नाम हरियाणा सरकार की विमुक्त जातियों की सूची में मिलता है। इस समुदाय के इतिहास, सामाजिक स्थिति और पारंपरिक आजीविका का अध्ययन उत्तर भारत के सामाजिक इतिहास को समझने में उपयोगी है।
संवैधानिक स्थिति: हरियाणा की आधिकारिक सूची में अनुसूचित जाति के अंतर्गत।
2. सांसी समुदाय
सांसी समुदाय का उल्लेख हरियाणा की विमुक्त जातियों की सूची में मिलता है। इस नाम के अंतर्गत कुछ उपसमूहों की प्रशासनिक श्रेणियाँ अलग-अलग हैं। इसलिए पूरे समुदाय को एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा।
संवैधानिक स्थिति: उपसमूह के अनुसार SC या पिछड़ा वर्ग की अलग स्थिति हो सकती है।
3. नट समुदाय
नट समुदाय के विभिन्न समूह उत्तर भारत में पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं और लोकमनोरंजन से ऐतिहासिक रूप से जुड़े रहे हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी आजीविका और जीवनशैली में काफी अंतर पाया जा सकता है।
संवैधानिक स्थिति: हरियाणा की सूची में नट, बड़ी के साथ अनुसूचित जाति के अंतर्गत उल्लेखित।
4. गांधिला समुदाय
गांधिला समुदाय का नाम हरियाणा की आधिकारिक विमुक्त जाति सूची और अनुसूचित जाति सूची में मिलता है। इस समुदाय की स्थानीय परंपराओं, सामाजिक इतिहास और आजीविका का अध्ययन क्षेत्रीय स्तर पर किया जाना चाहिए।
संवैधानिक स्थिति: हरियाणा की सूची में अनुसूचित जाति के अंतर्गत।
5. बंगाली समुदाय
हरियाणा सरकार की विमुक्त जातियों की सूची में बंगाली नाम का उल्लेख है। इसे हरियाणा में रहने वाले सभी बंगाली भाषी लोगों के समान नहीं समझना चाहिए; सरकारी सूची में नाम का संदर्भ विशिष्ट सामाजिक वर्ग से संबंधित है।
संवैधानिक स्थिति: संबंधित आधिकारिक सूची में अनुसूचित जाति के अंतर्गत।
महत्वपूर्ण: ऊपर दिए गए समुदाय हरियाणा की विमुक्त जातियों से संबंधित सरकारी सूची के उदाहरण हैं, हरियाणा की अनुसूचित जनजातियों की सूची नहीं। राज्य सरकार की सूची में बरार, बाजीगर, भांजरा तथा अन्य समुदायों के नाम भी मिलते हैं। किसी समुदाय की सटीक स्थिति जानने के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचना देखनी चाहिए।
इतिहास और उत्पत्ति
हरियाणा में रहने वाले विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों का इतिहास एक जैसा नहीं है। प्रत्येक समुदाय की अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामाजिक पहचान, परंपराएँ और आजीविका रही है।
इन समुदायों के इतिहास का अध्ययन करते समय निम्नलिखित विषय महत्वपूर्ण हैं:
पारंपरिक जीवन: कुछ समुदायों का जीवन घूम-घूमकर सेवाएँ देने, वस्तुओं का व्यापार करने, हस्तशिल्प, पशुपालन अथवा लोककलाओं से जुड़ा रहा है।
स्थानीय संपर्क: समय के साथ विभिन्न समुदायों का कृषि प्रधान गाँवों, कस्बों और शहरों के साथ आर्थिक तथा सामाजिक संपर्क बढ़ा।
औपनिवेशिक काल: ब्रिटिश शासन के दौरान कुछ घुमंतू और विमुक्त समुदायों को औपनिवेशिक कानूनों के अंतर्गत चिह्नित किया गया। इन कानूनों के प्रभावों का अध्ययन समुदाय-विशेष के ऐतिहासिक अभिलेखों से किया जाना चाहिए।
स्वतंत्रता के बाद: विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों की सामाजिक स्थिति, शिक्षा, आजीविका और सरकारी कल्याण योजनाओं से जुड़ी चुनौतियाँ महत्वपूर्ण विषय बनी रहीं।
यह भी ध्यान देना चाहिए कि सभी घुमंतू समुदायों की उत्पत्ति एक ही स्थान से हुई थी, ऐसा मानने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। इनके इतिहास को समझने के लिए मौखिक परंपराओं, स्थानीय अभिलेखों, समुदाय के बुजुर्गों के साक्षात्कार और शोध साहित्य को साथ पढ़ना उपयोगी होगा।
संस्कृति और परंपराएँ
हरियाणा की संस्कृति में लोकगीत, रागिनी, पारंपरिक संगीत, सामुदायिक मेल-मिलाप और मौसमी उत्सवों का महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ के विभिन्न समुदाय व्यापक क्षेत्रीय संस्कृति के साथ-साथ अपनी विशिष्ट परंपराओं को भी बनाए रख सकते हैं।
विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं का अध्ययन करते समय इन पहलुओं पर ध्यान दिया जा सकता है:
लोकगीत और संगीत
कुछ समुदायों में पारंपरिक गीत, मौखिक कथाएँ, धार्मिक गीत तथा अवसर-विशेष पर गाए जाने वाले गीत सामाजिक स्मृति को बनाए रखने का माध्यम होते हैं। हालाँकि, हरियाणा के सभी विमुक्त समुदायों के लिए एक जैसी संगीत परंपरा मानना उचित नहीं है।
विवाह और पारिवारिक परंपराएँ
विवाह की रस्में, रिश्तेदारी, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ और सामुदायिक समारोह समुदाय, क्षेत्र, धर्म तथा परिवार के अनुसार बदलते हैं। इनके बारे में स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाना अधिक विश्वसनीय तरीका है।
त्योहार और मेले
हरियाणा के व्यापक ग्रामीण समाज में होली, दीपावली, तीज और अन्य स्थानीय पर्व मनाए जाते हैं। अलग-अलग समुदाय इन अवसरों को अपने रीति-रिवाजों के अनुसार मना सकते हैं।
पारंपरिक ज्ञान
हस्तशिल्प, स्थानीय संसाधनों का उपयोग, पशुओं की देखभाल, लोककथाएँ तथा मौखिक इतिहास पारंपरिक ज्ञान के महत्वपूर्ण रूप हैं। ऐसे ज्ञान का दस्तावेजीकरण संबंधित समुदाय की सहमति और सहभागिता से किया जाना चाहिए।
रहन-सहन और आवास
हरियाणा के विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों का रहन-सहन समय के साथ बदलता रहा है। सभी समुदायों को एक ही प्रकार के आवास या जीवनशैली से जोड़ना सही नहीं है।
कुछ परिवार स्थायी गाँवों या शहरी बस्तियों में रहते हैं, जबकि कुछ समुदायों के कुछ समूहों में ऐतिहासिक रूप से मौसमी या घुमंतू आवागमन का महत्व रहा है।
आधुनिक समय में आवास की स्थिति पर कई कारक प्रभाव डालते हैं:
स्थायी निवास और भूमि तक पहुँच।
रोजगार के अवसर और आय की स्थिरता।
बच्चों की शिक्षा तथा विद्यालयों की उपलब्धता।
स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन तक पहुँच।
सरकारी पहचान-पत्र और कल्याण योजनाओं का लाभ।
यह जरूरी नहीं कि किसी समुदाय के सभी परिवार आज भी घुमंतू जीवन जीते हों। इसलिए वर्तमान रहन-सहन का विवरण देते समय स्थानीय सर्वेक्षण और नवीनतम अध्ययन को प्राथमिकता देनी चाहिए।
खानपान और भोजन की परंपरा
हरियाणा का सामान्य भोजन गेहूँ की रोटी, दाल, मौसमी सब्जियाँ, दूध, दही, छाछ और अन्य स्थानीय खाद्य पदार्थों के लिए जाना जाता है। राज्य के ग्रामीण जीवन में कृषि और पशुपालन का भोजन की उपलब्धता पर प्रभाव रहा है।
विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों के खानपान का विवरण देते समय तीन बातें महत्वपूर्ण हैं:
स्थानीय क्षेत्र में उपलब्ध अनाज, सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों का उपयोग।
परिवार की आय, रोजगार और ग्रामीण या शहरी निवास के अनुसार भोजन में अंतर।
समुदाय-विशेष की भोजन परंपराएँ, जो स्थानीय संस्कृति और पारिवारिक रीति-रिवाजों से जुड़ी हो सकती हैं।
ध्यान दें: सभी विमुक्त समुदायों के लिए एक समान पारंपरिक भोजन सूची उपलब्ध मानना उचित नहीं होगा। किसी विशेष समुदाय का पारंपरिक भोजन लिखने से पहले उस समुदाय के सदस्यों या विश्वसनीय नृवंशविज्ञान संबंधी अध्ययन से पुष्टि करनी चाहिए।
शिक्षा की स्थिति और चुनौतियाँ
विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों की शिक्षा का अध्ययन केवल साक्षरता के आधार पर नहीं, बल्कि विद्यालयों तक पहुँच, नियमित उपस्थिति, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों के आधार पर भी किया जाना चाहिए।
कुछ परिवारों के सामने निम्नलिखित समस्याएँ आ सकती हैं:
आर्थिक कठिनाइयों के कारण पढ़ाई जारी रखने में परेशानी।
मौसमी आवागमन होने पर विद्यालय में नियमित उपस्थिति की समस्या।
दस्तावेजों और निवास प्रमाण से संबंधित कठिनाइयाँ।
उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन की कमी।
सामाजिक भेदभाव अथवा शिक्षा के प्रति सीमित संसाधन।
ये संभावित चुनौतियाँ हैं; इन्हें हर समुदाय या प्रत्येक परिवार की स्थिति नहीं माना जाना चाहिए।
शिक्षा को बढ़ावा देने के उपाय
बच्चों का विद्यालय में नामांकन और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।
छात्रवृत्ति तथा पात्रता के अनुसार उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी देना।
विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोड़ना।
समुदाय की भाषा और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का सम्मान करने वाला शैक्षिक वातावरण बनाना।
बालिकाओं की शिक्षा और डिजिटल साक्षरता पर ध्यान देना।
शिक्षा से संबंधित योजनाओं की पात्रता और वर्तमान नियमों के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी देखनी चाहिए।
पारंपरिक और आधुनिक व्यवसाय
हरियाणा के विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों की आजीविका में ऐतिहासिक रूप से विविधता रही है। समुदाय और क्षेत्र के अनुसार पारंपरिक कार्यों में हस्तशिल्प, लोककला, छोटे व्यापार, पशुपालन, वस्तुओं की मरम्मत और विभिन्न प्रकार की सेवाएँ शामिल हो सकती हैं।
आधुनिक समय में परिवार कृषि मजदूरी, निर्माण कार्य, निजी रोजगार, स्वरोजगार, दुकानदारी, परिवहन, सरकारी सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में भी काम कर सकते हैं।
हरियाणा के विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों के संभावित आजीविका क्षेत्र
| व्यवसाय का क्षेत्र | संभावित कार्य |
|---|---|
| पारंपरिक कौशल | हस्तशिल्प, औजारों या विभिन्न वस्तुओं की मरम्मत तथा पारंपरिक कौशल से जुड़े कार्य। |
| लोककला | संगीत, प्रदर्शन कला तथा पारंपरिक मनोरंजन से जुड़े कार्य। |
| ग्रामीण रोजगार | कृषि एवं कृषि से संबंधित मजदूरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध अन्य रोजगार। |
| स्वरोजगार | छोटी दुकान, स्थानीय व्यापार, छोटे व्यवसाय और स्थानीय सेवाओं से जुड़े कार्य। |
| आधुनिक रोजगार | निजी क्षेत्र, तकनीकी कार्य तथा शिक्षा और कौशल के आधार पर अन्य आधुनिक पेशे। |
यह तालिका संभावित आजीविका क्षेत्रों के उदाहरण देती है, न कि सभी समुदायों के वर्तमान रोजगार का सांख्यिकीय विवरण। अलग-अलग समुदायों और परिवारों की आजीविका स्थानीय परिस्थितियों, शिक्षा, कौशल, रोजगार के अवसरों तथा आर्थिक स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
सामाजिक स्थिति और सरकारी सहायता
हरियाणा सरकार विमुक्त जातियों, टपरीवास जातियों और घुमंतू समुदायों से संबंधित जानकारी अपने सामाजिक न्याय, अधिकारिता, कल्याण एवं अंत्योदय विभाग के माध्यम से उपलब्ध कराती है।
इन समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, आवास और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है। हालाँकि, प्रत्येक योजना की पात्रता अलग हो सकती है।
किसी व्यक्ति को मिलने वाला लाभ उसकी संबंधित सामाजिक श्रेणी, प्रमाण-पत्र, निवास, आय और योजना के अन्य नियमों पर निर्भर करता है। केवल घुमंतू या विमुक्त समुदाय से संबंध रखने के आधार पर किसी विशेष आरक्षण या योजना का लाभ स्वतः मिलने का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
आधिकारिक जानकारी के लिए हरियाणा सरकार के विमुक्त एवं घुमंतू जातियों संबंधी विभागीय पृष्ठ को देखें।
हरियाणा की जनजातियों और अन्य सामाजिक श्रेणियों में अंतर
हरियाणा में विभिन्न सामाजिक एवं प्रशासनिक श्रेणियों का अंतर
| श्रेणी | अर्थ |
|---|---|
| अनुसूचित जनजाति (ST) | संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत अधिसूचित जनजातीय समुदाय। |
| अनुसूचित जाति (SC) | संविधान के अनुच्छेद 341 के अंतर्गत अधिसूचित समुदाय। |
| अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC/BC) | संबंधित सरकारी सूची और लागू नियमों के अंतर्गत पिछड़ा वर्ग। |
| विमुक्त जातियाँ | ऐतिहासिक रूप से विमुक्त श्रेणी में पहचाने गए समुदाय। |
| घुमंतू समुदाय | ऐसे समुदाय जिनकी जीवनशैली या इतिहास में पारंपरिक आवागमन का स्थान रहा है। |
इन श्रेणियों में कुछ जगहों पर सामाजिक या ऐतिहासिक संबंध हो सकते हैं, लेकिन इनका अर्थ एक जैसा नहीं है। हरियाणा में किसी समुदाय की वर्तमान संवैधानिक या प्रशासनिक श्रेणी जानने के लिए राज्य की लागू सूची और संबंधित आधिकारिक अधिसूचना देखनी चाहिए।
हरियाणा के विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों के अध्ययन का महत्व
इन समुदायों का अध्ययन कई कारणों से उपयोगी है:
हरियाणा के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को बेहतर समझने के लिए।
पारंपरिक कौशल, लोककला और मौखिक इतिहास का दस्तावेजीकरण करने के लिए।
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास से जुड़ी चुनौतियों को पहचानने के लिए।
समुदायों के बारे में प्रचलित गलत धारणाओं को दूर करने के लिए।
शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को संवैधानिक श्रेणियों तथा सामाजिक पहचान के बीच अंतर समझाने के लिए।
एक अच्छा अध्ययन वही होगा जो समुदायों को केवल उनकी समस्याओं से नहीं, बल्कि उनके ज्ञान, कौशल, इतिहास और वर्तमान सामाजिक योगदान के संदर्भ में भी समझे।
निष्कर्ष
हरियाणा के विमुक्त एवं घुमंतू समुदाय राज्य के सामाजिक इतिहास और सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके इतिहास, पारंपरिक आजीविका, लोककला, पारिवारिक परंपराओं, शिक्षा और आधुनिक रोजगार में बदलाव का अध्ययन समाज को अधिक व्यापक रूप से समझने में सहायता करता है।
इस विषय का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 2011 की जनगणना के अनुसार हरियाणा में अनुसूचित जनजाति की अधिसूचित आबादी दर्ज नहीं थी। इसलिए हरियाणा की जनजातियों के नाम पर विमुक्त जातियों और घुमंतू समुदायों को सीधे ST सूची में रखना या उनकी संयुक्त आबादी को अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या बताना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
आगे के शोध में प्रत्येक समुदाय की स्थानीय पहचान, मौखिक इतिहास, वर्तमान आजीविका और शिक्षा की स्थिति को विश्वसनीय स्रोतों तथा समुदाय के सदस्यों के अनुभवों के आधार पर दर्ज करना चाहिए। इससे Adiwasi Education पर प्रकाशित सामग्री अधिक प्रमाणिक, उपयोगी और शोधपरक बनेगी।







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