विश्व आदिवासी दिवस का संपूर्ण इतिहास (भाग–1) "Indigenous" शब्द की उत्पत्ति, अवधारणा और वैश्विक विकास का इतिहास
प्रस्तावना
- आज दुनिया के 90 से अधिक देशों में लाखों लोग स्वयं को "Indigenous Peoples" अर्थात मूल निवासी समुदायों का हिस्सा मानते हैं। संयुक्त राष्ट्र प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस (International Day of the World's Indigenous Peoples) मनाता है, लेकिन इस दिवस को समझने से पहले यह जानना आवश्यक है कि आखिर "Indigenous" शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई, इसका अर्थ क्या है और यह आधुनिक अंतरराष्ट्रीय राजनीति तथा मानवाधिकार विमर्श का हिस्सा कैसे बना।दिलचस्प तथ्य यह है कि संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने आज तक "Indigenous Peoples" की कोई एक सार्वभौमिक और कानूनी रूप से बाध्यकारी परिभाषा निर्धारित नहीं की है। इसके पीछे ऐतिहासिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक कारण हैं, जिनकी चर्चा इस अध्याय में विस्तार से की जाएगी।
"Indigenous" शब्द की भाषाई उत्पत्ति
"Indigenous" शब्द की जड़ें लैटिन भाषा में मिलती हैं।
यह शब्द Latin के दो मूल शब्दों से मिलकर बना माना जाता है—
- Indu = भीतर या उसी स्थान पर
- Genere = जन्म लेना या उत्पन्न होना
इसी आधार पर लैटिन शब्द Indigena विकसित हुआ, जिसका सामान्य अर्थ था—
"वह व्यक्ति जो किसी स्थान का मूल निवासी हो या वहीं जन्मा हो।"
समय के साथ यह शब्द यूरोपीय भाषाओं में पहुँचा और अंग्रेज़ी में Indigenous के रूप में प्रचलित हुआ।
प्रारंभिक यूरोपीय उपयोग
मध्यकालीन यूरोप में "Indigenous" शब्द का प्रयोग केवल किसी क्षेत्र के स्थानीय निवासियों के लिए किया जाता था। उस समय इसका आधुनिक राजनीतिक या मानवाधिकार संबंधी अर्थ नहीं था।
15वीं और 16वीं शताब्दी में जब यूरोपीय शक्तियों ने समुद्री यात्राएँ शुरू कीं और नए महाद्वीपों तक पहुँचीं, तब उन्होंने वहाँ रहने वाले समुदायों के लिए अलग-अलग शब्दों का प्रयोग किया।
इनमें प्रमुख थे—
- Native
- Aboriginal
- Indian
- Savage (जो आज अपमानजनक माना जाता है)
- Tribal
- Indigenous
धीरे-धीरे "Indigenous" शब्द अधिक सम्मानजनक और तटस्थ शब्द के रूप में उभरने लगा।
1492 और अर्थ का परिवर्तन
1492 के बाद यूरोपीय विस्तार ने विश्व इतिहास की दिशा बदल दी।
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और एशिया के अनेक क्षेत्रों में यूरोपीय शासन स्थापित होने लगा। इस प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों और उपनिवेशवादी शक्तियों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंध विकसित हुए।
इसी दौर में "Indigenous" शब्द का प्रयोग उन समुदायों के लिए बढ़ा जो किसी क्षेत्र में यूरोपीय शासन से पहले से निवास कर रहे थे।
"Native", "Aboriginal", "Tribal" और "Indigenous" में अंतर
1. Native
Native का सामान्य अर्थ है—किसी स्थान पर जन्मा व्यक्ति।
यह शब्द कई संदर्भों में प्रयुक्त होता है और आवश्यक नहीं कि वह किसी विशिष्ट सांस्कृतिक समूह को दर्शाए।
2. Aboriginal
यह शब्द विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी समुदायों के लिए प्रसिद्ध हुआ।
हालाँकि अन्य संदर्भों में भी इसका प्रयोग हुआ है, लेकिन आज यह मुख्यतः ऑस्ट्रेलियाई संदर्भ से जुड़ा माना जाता है।
3. Tribal
"Tribal" का अर्थ जनजातीय समूह से है।
लेकिन सभी Indigenous समुदाय Tribal हों, यह आवश्यक नहीं है, और सभी Tribal समुदायों को हर देश में Indigenous की कानूनी मान्यता भी प्राप्त नहीं होती।
4. Indigenous
यह शब्द केवल जन्मस्थान नहीं बल्कि ऐतिहासिक निरंतरता, सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक संस्थाओं और भूमि से गहरे संबंध को भी इंगित करता है।
आधुनिक अवधारणा का विकास
20वीं शताब्दी तक आते-आते "Indigenous" शब्द केवल भाषाई नहीं बल्कि राजनीतिक और मानवाधिकार संबंधी अवधारणा बन चुका था।
इस परिवर्तन के पीछे कई कारण थे—
- उपनिवेशवाद का इतिहास
- भूमि अधिकारों पर संघर्ष
- सांस्कृतिक संरक्षण
- भाषाई विविधता
- आत्मनिर्णय (Self-Determination)
- मानवाधिकार आंदोलन
संयुक्त राष्ट्र इस शब्द की एक निश्चित परिभाषा क्यों नहीं देता?
यह प्रश्न सबसे अधिक पूछा जाता है।
उत्तर सरल नहीं है।
कारण 1 – प्रत्येक देश का इतिहास अलग है
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूज़ीलैंड, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया की ऐतिहासिक परिस्थितियाँ अलग-अलग हैं।
इसलिए एक ही परिभाषा सभी पर लागू करना कठिन माना गया।
कारण 2 – राजनीतिक संवेदनशीलता
यदि किसी समुदाय को "मूल निवासी" का दर्जा दिया जाता है, तो भूमि, संसाधन और सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़े कानूनी प्रश्न उठ सकते हैं।
इसी कारण कई सरकारें सावधानीपूर्वक दृष्टिकोण अपनाती हैं।
कारण 3 – आत्म-पहचान (Self-Identification)
संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में यह सिद्धांत महत्वपूर्ण माना गया है कि कोई समुदाय स्वयं को Indigenous मानता है या नहीं, यह भी उसकी पहचान का एक महत्वपूर्ण तत्व हो सकता है।
José Martínez Cobo का ऐतिहासिक योगदान
1970 और 1980 के दशक में संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक José Ricardo Martínez Cobo ने एक व्यापक अध्ययन तैयार किया।
उन्होंने सुझाव दिया कि Indigenous समुदायों की पहचान निम्न आधारों पर समझी जा सकती है—
- ऐतिहासिक निरंतरता
- उपनिवेशवाद से पूर्व अस्तित्व
- विशिष्ट संस्कृति
- विशिष्ट भाषा
- पारंपरिक भूमि से संबंध
- स्वयं की अलग पहचान
यह कोई बाध्यकारी कानूनी परिभाषा नहीं थी, बल्कि एक कार्यकारी (Working Definition) समझ थी।
"Peoples" शब्द पर विवाद
विवाद केवल "Indigenous" शब्द पर ही नहीं था।
कई देशों ने "Peoples" शब्द पर भी आपत्ति व्यक्त की क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कानून में यह शब्द आत्मनिर्णय (Self-Determination) से जुड़ा माना जाता है।
लंबी चर्चा के बाद संयुक्त राष्ट्र ने "Indigenous Peoples" शब्द को अपनाया, लेकिन इसकी व्याख्या को संतुलित रूप में विकसित किया गया।
आज दुनिया में Indigenous Peoples कौन-कौन हैं?
विभिन्न देशों में अलग-अलग नामों से मूल निवासी समुदाय पहचाने जाते हैं, जैसे—
- ऑस्ट्रेलिया – Aboriginal Peoples और Torres Strait Islander Peoples
- कनाडा – First Nations, Inuit और Métis
- न्यूज़ीलैंड – Māori
- संयुक्त राज्य अमेरिका – Native American और Alaska Native
- लैटिन अमेरिका – Maya, Quechua, Aymara सहित अनेक समुदाय
- उत्तरी यूरोप – Sámi
प्रत्येक क्षेत्र का ऐतिहासिक और कानूनी संदर्भ अलग है।
क्या भारत में "Indigenous" शब्द का प्रयोग होता है?
भारत में संवैधानिक रूप से "अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes)" शब्द का प्रयोग किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर "Indigenous Peoples" की अवधारणा और भारत की अनुसूचित जनजातियों के संबंध में विभिन्न शैक्षणिक और नीतिगत दृष्टिकोण मौजूद हैं। इस विषय पर समय-समय पर विद्वानों, नीति-निर्माताओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बीच अलग-अलग मत व्यक्त किए गए हैं।
निष्कर्ष
"Indigenous" शब्द केवल एक शब्द नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति, पहचान और मानवाधिकारों से जुड़ी एक जटिल अवधारणा है। इसकी जड़ें लैटिन भाषा तक जाती हैं, लेकिन आधुनिक अर्थ उपनिवेशवाद, वैश्विक आदिवासी आंदोलनों और संयुक्त राष्ट्र की बहसों के दौरान विकसित हुआ। यही कारण है कि आज भी इसकी कोई एक सार्वभौमिक कानूनी परिभाषा नहीं है, बल्कि विभिन्न देशों के ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों के अनुसार इसकी व्याख्या की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: Indigenous शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर: सामान्य रूप से इसका अर्थ किसी स्थान का मूल निवासी या वहाँ ऐतिहासिक रूप से निवास करने वाला समुदाय होता है।
प्रश्न 2: क्या संयुक्त राष्ट्र ने Indigenous की आधिकारिक परिभाषा दी है?
उत्तर: नहीं। संयुक्त राष्ट्र ने कोई एक सार्वभौमिक और बाध्यकारी कानूनी परिभाषा निर्धारित नहीं की है।
प्रश्न 3: José Martínez Cobo का योगदान क्या है?
उत्तर: उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के लिए आदिवासी समुदायों पर एक ऐतिहासिक अध्ययन तैयार किया जिसने आधुनिक अंतरराष्ट्रीय विमर्श को गहराई से प्रभावित किया।
प्रश्न 4: क्या "Native" और "Indigenous" समान हैं?
उत्तर: दोनों शब्द कई संदर्भों में मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन "Indigenous" आधुनिक मानवाधिकार और ऐतिहासिक पहचान के व्यापक संदर्भ में प्रयुक्त होता है।






