उत्तर प्रदेश की जनजातियाँ – सम्पूर्ण एवं परीक्षा उपयोगी जानकारी

 उत्तर प्रदेश की जनजातियाँ: जनसंख्या, संस्कृति, परंपरा, रहन-सहन, खानपान, शिक्षा और व्यवसाय की पूरी जानकारी



उत्तर प्रदेश भारत का एक विशाल एवं विविधतापूर्ण राज्य है। यहां विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक समुदाय निवास करते हैं। राज्य के कुछ क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों की आबादी विशेष रूप से दिखाई देती है। उत्तर प्रदेश की जनजातियों का सामाजिक जीवन, लोकपरंपराएँ, भाषा-बोलियां, खानपान, पारंपरिक व्यवसाय और प्रकृति से संबंध भारतीय जनजातीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजाति (ST) की कुल आबादी 11,34,273 थी। जनजातीय आबादी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता था; Census India के Linguistic Survey विवरण में लगभग 88.8% ST आबादी के गांवों में रहने का उल्लेख मिलता है। |जनगाणना 2011| 

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की राज्यवार सूची में उत्तर प्रदेश के लिए 15 अनुसूचित जनजातीय प्रविष्टियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ जनजातियों की ST मान्यता विशेष जिलों तक सीमित है। |ट्राइबल अफैर| 

उत्तर प्रदेश की जनजातीय जनसंख्या

उत्तर प्रदेश की 15 अनुसूचित जनजातियों की सूची

📋 महत्वपूर्ण जानकारी:
वर्तमान आधिकारिक राज्यवार सूची के अनुसार उत्तर प्रदेश में 15 अनुसूचित जनजातीय समुदाय/प्रविष्टियाँ सूचीबद्ध हैं। नीचे इनकी क्रमवार सूची दी गई है।
क्रम जनजाति
1 भोटिया
2 बुक्सा
3 जौनसारी
4 राजी
5 थारू
6 गोंड, धुरिया, नायक, ओझा, पठारी, राज गोंड
7 खरवार, खैरवार
8 सहरिया
9 परहिया
10 बैगा
11 पंखा, पनिका
12 अगरिया
13 पटारी
14 चेरो
15 भुइया, भुइयां
📌 महत्वपूर्ण:
इन सभी समुदायों को पूरे उत्तर प्रदेश में समान भौगोलिक क्षेत्र के लिए ST के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है। कई समुदायों की अनुसूचित जनजाति (ST) स्थिति निर्धारित जिलों तक सीमित है। इसलिए किसी विशेष जनजाति की ST स्थिति जानने के लिए संबंधित आधिकारिक राज्यवार सूची और लागू अधिसूचना को देखना आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश की प्रमुख जनजातियाँ

1. थारू जनजाति :-  अधिक पढ़े 

थारू जनजाति उत्तर प्रदेश की प्रमुख जनजातियों में से एक है। इसका प्रमुख निवास क्षेत्र राज्य के तराई क्षेत्र, विशेषकर नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में पाया जाता है।

थारू समाज की जीवनशैली में कृषि, पशुपालन और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इनके पारंपरिक घर, लोकगीत, नृत्य, पहनावा और सामाजिक रीति-रिवाज विशिष्ट जनजातीय पहचान प्रस्तुत करते हैं।

2011 की जनगणना में उत्तर प्रदेश में थारू जनसंख्या 1,05,291 दर्ज की गई थी।


2. गोंड जनजाति:-  अधिक पढ़े 

गोंड उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण जनजातीय समुदायों में शामिल है। उत्तर प्रदेश की आधिकारिक ST सूची में गोंड, धुरिया, नायक, ओझा, पठारी और राज गोंड को निर्धारित जिलों में अनुसूचित जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

इनका प्रमुख संबंध पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों से है। विशेष रूप से सोनभद्र और मिर्जापुर क्षेत्र जनजातीय अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

गोंड समाज की संस्कृति में प्रकृति, लोकदेवताओं, पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य और सामुदायिक जीवन की महत्वपूर्ण भूमिका है।


3. खरवार जनजाति:-  अधिक पढ़े 

खरवार/खैरवार जनजाति मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में पाई जाती है।

आधिकारिक सूची के अनुसार इनकी ST मान्यता देवरिया, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी और सोनभद्र जिलों में निर्धारित है।

इनकी पारंपरिक अर्थव्यवस्था में कृषि, मजदूरी तथा स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े कार्यों का महत्व रहा है।


4. बैगा जनजाति:-  अधिक पढ़े 

बैगा जनजाति का उत्तर प्रदेश में प्रमुख क्षेत्र सोनभद्र जिला है। भारत सरकार की राज्यवार सूची में बैगा को उत्तर प्रदेश में सोनभद्र जिले के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

बैगा समुदाय की पारंपरिक संस्कृति प्रकृति और जंगल से गहराई से जुड़ी रही है। कृषि, वनोपज संग्रह और मजदूरी इनके जीवनयापन के प्रमुख साधनों में रहे हैं।


5. परहिया जनजाति:-  अधिक पढ़े 

परहिया जनजाति उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से सोनभद्र जिले में सूचीबद्ध है।

इनकी पारंपरिक जीवनशैली ग्रामीण एवं वन क्षेत्रों से जुड़ी रही है। कृषि मजदूरी, वनोपज तथा अन्य स्थानीय कार्य इनके आर्थिक जीवन का हिस्सा रहे हैं।


6. पंखा और पनिका:-  अधिक पढ़े 

पंखा और पनिका उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जनजातीय सूची में शामिल हैं। इनकी ST स्थिति सोनभद्र और मिर्जापुर जिलों में निर्धारित है।

इन समुदायों में कृषि, मजदूरी, हस्तशिल्प और स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका देखने को मिलती है।


7. अगरिया जनजाति:-  अधिक पढ़े 

अगरिया जनजाति को उत्तर प्रदेश में सोनभद्र जिले के लिए अनुसूचित जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

ऐतिहासिक रूप से अगरिया समुदाय का संबंध पारंपरिक धातु-कर्म और लौह-कर्म से भी जोड़ा जाता है। वर्तमान समय में आजीविका के स्वरूपों में कृषि, मजदूरी और अन्य आर्थिक गतिविधियां भी शामिल हैं।


8. चेरो जनजाति:-  अधिक पढ़े 

चेरो जनजाति उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से सोनभद्र और वाराणसी जिलों में अनुसूचित जनजाति के रूप में सूचीबद्ध है।

चेरो समुदाय का इतिहास पूर्वी भारत और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में कृषि, मजदूरी तथा अन्य व्यवसाय इनके आर्थिक जीवन का हिस्सा हैं।


9. भुइया / भुइयां जनजाति:-  अधिक पढ़े 

भुइया/भुइयां को उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से सोनभद्र जिले के लिए अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किया गया है।

इनका जीवन ग्रामीण एवं वन क्षेत्र की परिस्थितियों से जुड़ा रहा है। कृषि, मजदूरी और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित कार्य पारंपरिक आजीविका के महत्वपूर्ण साधन रहे हैं।


10. सहरिया जनजाति:-  अधिक पढ़े 

उत्तर प्रदेश में सहरिया जनजाति की ST मान्यता ललितपुर जिले तक निर्धारित है।

सहरिया समुदाय मध्य भारत के बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़े जनजातीय समूहों में महत्वपूर्ण है। इनके पारंपरिक जीवन में जंगल, कृषि मजदूरी, वनोपज और स्थानीय रोजगार की भूमिका रही है।


11. भोटिया जनजाति:-  अधिक पढ़े 

भोटिया उत्तर प्रदेश की आधिकारिक ST सूची में शामिल है। हालांकि उत्तर प्रदेश में इसकी संख्या अपेक्षाकृत कम है।

भोटिया समुदाय का व्यापक सांस्कृतिक संबंध हिमालयी क्षेत्रों से रहा है। पारंपरिक रूप से व्यापार, पशुपालन और पहाड़ी अर्थव्यवस्था से जुड़े कार्य इनके सामाजिक-आर्थिक जीवन का हिस्सा रहे हैं।


12. बुक्सा जनजाति:-  अधिक पढ़े 

बुक्सा जनजाति उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी तराई क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण जनजातीय समुदाय है।

कृषि, मजदूरी, पशुपालन तथा स्थानीय रोजगार इनके जीवन का हिस्सा हैं। इनके सामाजिक जीवन में सामुदायिक सहयोग और पारंपरिक रीति-रिवाज महत्वपूर्ण हैं।


13. जौनसारी जनजाति:-  अधिक पढ़े 

जौनसारी समुदाय का मुख्य सांस्कृतिक क्षेत्र उत्तराखंड में है, लेकिन उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जनजाति सूची में भी इसका नाम दर्ज है।

जौनसारी संस्कृति में सामुदायिक जीवन, लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक पर्वों की महत्वपूर्ण भूमिका है।


14. राजी जनजाति:-  अधिक पढ़े 

राजी एक छोटी जनजातीय समुदाय है। उत्तर प्रदेश की ST सूची में इसका नाम भी शामिल है।

राजी समुदाय का व्यापक संबंध हिमालयी क्षेत्र से रहा है। पारंपरिक रूप से इनका जीवन जंगल और प्राकृतिक संसाधनों के आसपास विकसित हुआ।


15. पटारी जनजाति:-  अधिक पढ़े 

पटारी को उत्तर प्रदेश में सोनभद्र जिले के लिए अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किया गया है।

इनका पारंपरिक जीवन ग्रामीण और वन क्षेत्रों से जुड़ा रहा है तथा कृषि मजदूरी और स्थानीय आर्थिक गतिविधियां आजीविका का हिस्सा हैं।


उत्तर प्रदेश की जनजातियों की संस्कृति

उत्तर प्रदेश की जनजातीय संस्कृति अत्यंत विविध है। अलग-अलग जनजातियों में भाषा, खानपान, पहनावा, विवाह पद्धति, धार्मिक मान्यताओं और लोकनृत्यों में भिन्नता देखने को मिलती है।

जनजातीय संस्कृति की कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं:

  • प्रकृति के प्रति सम्मान
  • सामुदायिक जीवन
  • लोकगीत एवं लोकनृत्य
  • पारंपरिक पर्व एवं उत्सव
  • स्थानीय देवी-देवताओं की मान्यताएं
  • पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान
  • कृषि आधारित जीवन
  • जंगल और प्राकृतिक संसाधनों से संबंध
  • सामुदायिक सहयोग की परंपरा

उत्तर प्रदेश की जनजातियों की परंपराएं

जनजातीय समाज में परंपराएं केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।

प्रमुख परंपराएं

विवाह परंपरा:
विभिन्न समुदायों में विवाह की अपनी-अपनी सामाजिक परंपराएं हैं। विवाह समारोह में गीत-संगीत और सामुदायिक सहभागिता महत्वपूर्ण रहती है।

जन्म संस्कार:
बच्चे के जन्म के अवसर पर परिवार और समुदाय के लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हैं।

मृत्यु संस्कार:
अलग-अलग जनजातियों में मृत्यु संस्कार की अलग परंपराएं मिलती हैं।

सामुदायिक निर्णय:
परंपरागत रूप से बुजुर्गों और समुदाय के अनुभवी लोगों की सामाजिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।


जनजातियों का रहन-सहन

उत्तर प्रदेश की जनजातीय आबादी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता है। 2011 के Census विवरण के अनुसार लगभग 88.8% ST आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती थी।

जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक घरों के निर्माण में स्थानीय सामग्री का उपयोग किया जाता रहा है। ग्रामीण परिवेश, कृषि भूमि, जंगल और जल स्रोत इनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।

आधुनिक समय में शिक्षा, सड़क, मोबाइल, सरकारी योजनाओं और रोजगार के विस्तार के कारण जीवनशैली में तेजी से परिवर्तन आया है।


उत्तर प्रदेश की जनजातियों का खानपान

जनजातीय खानपान स्थानीय कृषि और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित रहा है।

सामान्य रूप से इनमें शामिल हैं:

  • चावल
  • गेहूं
  • मक्का
  • मोटे अनाज
  • दालें
  • मौसमी सब्जियां
  • कंद-मूल
  • स्थानीय फल
  • महुआ से जुड़े पारंपरिक खाद्य पदार्थ
  • जंगल से प्राप्त कुछ खाद्य वनोपज

हालांकि सभी जनजातियों का खानपान एक जैसा नहीं है। भौगोलिक क्षेत्र और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के अनुसार भोजन में काफी अंतर पाया जाता है।


उत्तर प्रदेश की जनजातियों में शिक्षा

आधुनिक समय में जनजातीय समाज में शिक्षा का महत्व लगातार बढ़ा है।

शिक्षा के क्षेत्र में निम्न बदलाव महत्वपूर्ण हैं:

  • प्राथमिक विद्यालयों तक पहुंच
  • माध्यमिक शिक्षा में भागीदारी
  • छात्रवृत्ति योजनाएं
  • आवासीय विद्यालय
  • उच्च शिक्षा की ओर बढ़ता रुझान
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में भागीदारी
  • डिजिटल शिक्षा
  • सरकारी रोजगार की तैयारी

फिर भी दूरस्थ और वन क्षेत्रों में विद्यालय तक पहुंच, आर्थिक स्थिति और उच्च शिक्षा जैसी चुनौतियां कई समुदायों के सामने बनी हुई हैं।

उत्तर प्रदेश की जनजातियों के प्रमुख व्यवसाय

💼 जनजातीय अर्थव्यवस्था:
परंपरागत रूप से उत्तर प्रदेश की जनजातीय अर्थव्यवस्था का संबंध कृषि, प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय रोजगार और पारंपरिक कौशल से रहा है। समय के साथ सरकारी, निजी तथा स्वरोजगार के अवसरों में भी भागीदारी बढ़ी है।
व्यवसाय महत्व
 कृषि प्रमुख आजीविका
 कृषि मजदूरी ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रोजगार
 पशुपालन सहायक आर्थिक गतिविधि
 वनोपज संग्रह कुछ समुदायों में पारंपरिक आजीविका का महत्वपूर्ण साधन
 मजदूरी आधुनिक आय का महत्वपूर्ण साधन
 हस्तशिल्प कुछ समुदायों में महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि
 स्थानीय व्यापार छोटे स्तर पर रोजगार एवं आय का साधन
 सरकारी नौकरी आधुनिक रोजगार का महत्वपूर्ण क्षेत्र
 निजी नौकरी वर्तमान समय में बढ़ती भागीदारी
 स्वरोजगार नए आर्थिक अवसरों के साथ बढ़ता रुझान
📌 महत्वपूर्ण जानकारी:
अलग-अलग जनजातीय समुदायों में व्यवसाय और आजीविका के साधन एक समान नहीं हैं। स्थानीय प्राकृतिक संसाधन, शिक्षा, क्षेत्रीय परिस्थितियाँ, कौशल तथा रोजगार के अवसरों के अनुसार इनके व्यवसायों में अंतर देखा जा सकता है।

उत्तर प्रदेश की जनजातियाँ – FAQ

1. उत्तर प्रदेश में कितनी अनुसूचित जनजातियां हैं?

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की राज्यवार सूची में उत्तर प्रदेश के लिए 15 अनुसूचित जनजातीय प्रविष्टियां दी गई हैं।

2. उत्तर प्रदेश की सबसे प्रमुख जनजाति कौन सी है?

2011 की जनगणना के अनुसार थारू उत्तर प्रदेश की बड़ी अनुसूचित जनजातियों में से एक है और इसकी जनसंख्या 1,05,291 दर्ज की गई थी।

3. उत्तर प्रदेश में थारू जनजाति कहां रहती है?

थारू जनजाति का प्रमुख क्षेत्र उत्तर प्रदेश का तराई क्षेत्र है।

4. सोनभद्र की प्रमुख जनजातियां कौन-कौन सी हैं?

सोनभद्र में गोंड, खरवार/खैरवार, परहिया, बैगा, पंखा-पनिका, अगरिया, पटारी और भुइया जैसे समुदायों की ST सूची में उपस्थिति है। चेरो की ST मान्यता भी सोनभद्र में है।

5. उत्तर प्रदेश में सहरिया जनजाति कहां पाई जाती है?

उत्तर प्रदेश की आधिकारिक ST सूची में सहरिया को ललितपुर जिले के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

6. उत्तर प्रदेश में बैगा जनजाति कहां रहती है?

उत्तर प्रदेश में बैगा की ST मान्यता सोनभद्र जिले में है।

7. उत्तर प्रदेश की जनजातियों का मुख्य व्यवसाय क्या है?

कृषि, कृषि मजदूरी, पशुपालन, वनोपज, मजदूरी, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसाय पारंपरिक एवं वर्तमान आजीविका के महत्वपूर्ण साधन हैं।

8. उत्तर प्रदेश की जनजातियों की जनसंख्या का आधिकारिक आधार क्या है?

विस्तृत जनसंख्या संबंधी जानकारी के लिए भारत की जनगणना 2011 की A-11 तथा अन्य ST तालिकाएं प्रमुख आधिकारिक स्रोत हैं।

9. उत्तर प्रदेश की जनजातियों से जुड़े प्रश्न किन परीक्षाओं में उपयोगी हैं?

ये तथ्य UPPSC, UPSSSC, UP Police, शिक्षक भर्ती, लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की सामान्य अध्ययन/सामान्य ज्ञान तैयारी में उपयोगी हो सकते हैं।


निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश की जनजातियां राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। थारू, गोंड, खरवार, बैगा, सहरिया, परहिया, पंखा-पनिका, अगरिया, चेरो, भुइया सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों की अपनी विशिष्ट सामाजिक परंपराएं, संस्कृति, जीवनशैली और आर्थिक गतिविधियां हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की आबादी 11,34,273 थी। वर्तमान आधिकारिक राज्यवार ST सूची में उत्तर प्रदेश के लिए 15 जनजातीय प्रविष्टियां दर्ज हैं, लेकिन इनमें से कई की ST मान्यता विशिष्ट जिलों तक सीमित है।

इसलिए UP Tribes, उत्तर प्रदेश की जनजातियां, UP Scheduled Tribes, थारू जनजाति, सोनभद्र की जनजातियां और उत्तर प्रदेश जनजाति जनसंख्या जैसे keywords इस विषय पर जानकारी खोजने वाले पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।

स्रोत: भारत की जनगणना 2011 तथा भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय की राज्यवार अनुसूचित जनजाति सूची। 

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