छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज का परिचय

 छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज का परिचय

  • छत्तीसगढ़ की लगभग 31% जनसंख्या अनुसूचित जनजातियों से संबंधित है। यह भारत के उन राज्यों में शामिल है जहाँ आदिवासी जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक है। छत्तीसगढ़ को "आदिवासी संस्कृति की प्रयोगशाला" कहा जाता है, क्योंकि यहाँ जनजातीय जीवन, लोककला, नृत्य, गीत और परंपराएँ आज भी जीवित हैं। यह पोस्ट Adivasi Education पर  कम्पलीट रूप में तैयार करने की कोशिस की गई है।
  • प्रमुख आदिवासी जिले हैं — बस्तर, कांकेर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोरबा, जशपुर, सरगुजा और बलरामपुर
  • राज्य में 42 से अधिक जनजातीय समुदाय पाए जाते हैं।

नीचे छत्तीसगढ़ राज्य की 42 अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) की सूची दी जा रही है:

  1. अबुझमाड़िया (Abujh Maria)

  2. अगरिया (Agaria)

  3. बैगा (Baiga)

  4. बैगानी (Baigani)

  5. बिन्झवार (Binjhwar)

  6. बिरहोर (Birhor)

  7. दंड़ामी माड़िया (Dandami Maria)

  8. धुरवा (Dhurwa)

  9. गोंड (Gond)

  10. हल्बा (Halba)

  11. कमार (Kamar)

  12. कंवर (Kanwar)

  13. कवर (Kawar)

  14. कोरकू (Korku)

  15. कोरवा (Korwa)

  16. मझवार (Majhwar)

  17. मांझी (Manjhi)

  18. मौरिया (Mouria)

  19. मुरिया (Muria)

  20. नागेशिया (Nagesia)

  21. ओझा (Ojha)

  22. पर्धान (Pardhan)

  23. परजा (Parja)

  24. सहारिया (Sahariya)

  25. सावर (Sawar)

  26. सवरा / सवरा (Saora / Savar)

  27. सोनझरी (Sonjhari)

  28. उरांव (Oraon)

  29. भतरा (Bhatra)

  30. भींजवार (Bhinjwar)

  31. खैरवार (Khairwar)

  32. कोल (Kol)

  33. कोरबा (Korba)

  34. मुनदा (Munda)

  35. परही (Parhi)

  36. पंडो (Pando)

  37. राजगोंड (Rajgond)

  38. सोंटा (Sonta)

  39. झरिया (Jharia)

  40. मुरिया गोंड (Muria Gond)

  41. गोंड माड़िया (Gond Maria)

  42. भैना (Bhaina) 

यह सूची भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त छत्तीसगढ़ की अनुसूचित जनजातियों पर आधारित है।


1. गोंड जनजाति (छत्तीसगढ़)

निवास क्षेत्र

बस्तर, कांकेर, नारायणपुर और कोरिया।

रहन-सहन

गोंड लोग जंगलों के आसपास बसे गाँवों में रहते हैं। घर मिट्टी, लकड़ी और खपरैल से बने होते हैं।

बोली-भाषा

गोंडी भाषा, साथ ही छत्तीसगढ़ी और हिंदी।

वेश-भूषा

पुरुष धोती-कुर्ता, महिलाएँ साड़ी या लुगड़ा पहनती हैं। चाँदी के गहने लोकप्रिय हैं।

खान-पान

कोदो, कुटकी, मक्का, चावल, दाल और वनोपज।

संस्कृति

लोकनृत्य, देवी-देवताओं और प्रकृति की पूजा।


2. मुरिया जनजाति

विशेष पहचान

घोटुल प्रथा — सामाजिक शिक्षा का अनोखा केंद्र।

निवास क्षेत्र

बस्तर और दंतेवाड़ा।

जीवनशैली

सामूहिक जीवन और कृषि आधारित समाज।

संस्कृति

मुरिया नृत्य, ढोल-मांदर और सामूहिक उत्सव।


3. माड़िया जनजाति (PVTG)

निवास

अबूझमाड़ क्षेत्र (नारायणपुर)।

जीवनशैली

अत्यंत सरल, वन-आश्रित जीवन।

भाषा

माड़िया गोंडी।

चुनौतियाँ

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी।


4. हल्बा जनजाति

निवास

बस्तर संभाग।

आजीविका

कृषि और शिल्प।

संस्कृति

नृत्य, गीत और सामाजिक उत्सव।


5. बैगा जनजाति (PVTG)

पहचान

बैगा को "धरती का पुजारी" माना जाता है।

निवास

कबीरधाम और बिलासपुर क्षेत्र।

जीवनशैली

झूम कृषि, जड़ी-बूटी ज्ञान।


6. कमार जनजाति (PVTG)

निवास

गरियाबंद और धमतरी।

स्थिति

अत्यंत पिछड़ी जनजाति।

आजीविका

वनोपज संग्रह और मजदूरी।


7. उरांव जनजाति

निवास

जशपुर और सरगुजा।

संस्कृति

सरहुल पर्व, नृत्य और गीत।

भाषा

कुड़ुख (उरांव)।


8. कोरवा जनजाति (PVTG)

पहचान

घुमंतू और वन-आश्रित समुदाय।

चुनौतियाँ

शिक्षा, आवास और स्वास्थ्य।


छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति की विशेषताएँ

  • घोटुल जैसी सामाजिक परंपरा

  • लोकनृत्य और वाद्ययंत्र

  • वन और प्रकृति से गहरा रिश्ता

  • सामुदायिक जीवन


छत्तीसगढ़ में जनजातीय शिक्षा की स्थिति

  • आश्रम शालाएँ

  • एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय

  • छात्रवृत्तियाँ

  • मातृभाषा आधारित शिक्षा के प्रयास

चुनौतियाँ: दूरस्थ क्षेत्र, गरीबी और पलायन।


निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ भारत की जीवित सांस्कृतिक विरासत हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के समन्वय से इनके जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है।


FAQs

प्रश्न 1: छत्तीसगढ़ की सबसे प्रसिद्ध जनजातीय परंपरा कौन-सी है?
उत्तर: मुरिया जनजाति की घोटुल प्रथा।

प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ की PVTG जनजातियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर: माड़िया, बैगा, कमार और कोरवा।

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